‘गाय प्रशंसा दिवस’ पर PETA इंडिया की अपील : गायों से प्यार है तो पनीर छोड़ें, तोफू अपनाएं !
‘गाय प्रशंसा दिवस’ (8 जुलाई) के अवसर पर पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA), इंडिया ने अहमदाबाद सहित देश के अन्य दुग्ध-प्रधान क्षेत्रों में वीगन भोजन पर एक साहसिक अपील वाले बड़े-बड़े बिलबोर्ड लगाए हैं। इन बिलबोर्ड के ज़रिए लोगों से आग्रह किया गया है कि वे पनीर छोड़कर तोफू को अपनाएं, एक ऐसा करुणामय विकल्प जिसमें न तो बछड़ों को उनकी मांओं से अलग किया जाता है और न ही उन्हें कोई पीड़ा दी जाती है। बिलबोर्ड पर छपा संदेश “तोफू है गाय का सबसे अच्छा दोस्त” यह उजागर करता है कि डेयरी उद्योग में गायों और उनके नन्हें बछड़ों को कितनी यातनाएं सहनी पड़ती हैं और लोगों को प्रेरित करता है कि वे अपनी थाली में प्रोटीन से भरपूर और पूरी तरह वीगन तोफू को जगह देकर करुणा और सेहत दोनों का चुनाव करें।
गायें अपने नन्हें बच्चों से उतना ही प्यार करती हैं, जितना एक मां अपने शिशु से करती है। लेकिन डेयरी उद्योग उनकी ममता को कुचलकर उन्हें जन्म के तुरंत बाद ही उनके बच्चों से जुदा कर देता है, सिर्फ इसलिए कि इंसान उन मासूम बछड़ों के लिए बने दूध से पनीर खा सकें। जो भी व्यक्ति सच में गायों का सम्मान करता है, उन्हें पूजनीय मानता है, उसे उनकी पीड़ा का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। PETA इंडिया सभी से करुणा की राह अपनाने और पनीर के एजगह सेहतमंद, स्वादिष्ट तोफू को अपनाने की अपील करता है।
PETA India’s billboard is located at 132 Feet Ring Road, Nava Vadaj, Ahmedabad, Gujarat 380013.
PETA India’s billboard is located at Income Tax Chowk, Amritsar 143001.
PETA India’s billboard is located near Taj Lakefront hotel, Bhadbhada Road, Prempura, Bhopal, Madhya Pradesh, 462003.
PETA India’s billboard is located near Lajpat Nagar Metro Station, towards Metro Station, Delhi, 110024.
PETA India’s billboard is located at Marine Lines, Sonapur, Mumbai, Maharashtra, 400002.
गायें समर्पित माएं होती हैं जो अपने बछड़ों से गहरा भावनात्मक रिश्ता बनाती हैं। लेकिन डेयरी उद्योग में इनकी ममता को बेरहमी से कुचल दिया जाता है। उन्हें बार-बार गर्भवती किया जाता है और जन्म के तुरंत बाद ही उनके बछड़ों को उनसे छीन लिया जाता है ताकि उनका दूध चुराकर इंसानों को बेचा जा सके। आजकल गायों और भैंसों को डेयरी उद्योग में अक्सर कारखाने जैसी अमानवीय परिस्थितियों में रखा जाता है और उन्हें जबरन गर्भवती करने के लिए कृत्रिम गर्भाधान किया जाता है जिसमें कर्मचारी अपना हाथ गाय के मलाशय में डालकर और बैल के वीर्य से भरी धातु की रॉड को गर्भाशय में डालकर उनकी देह और गरिमा को तोड़ते हैं।
नर बछड़ों, जो डेयरी कारोबार के लिए बेकार माने जाते हैं, को अक्सर भूखा मरने के लिए छोड़ दिया जाता है, सड़कों पर भटकने को मजबूर कर दिया जाता है या बूचड़खानों में बेच दिया जाता है। मादा बछड़ों को भी अपनी मांओं जैसा ही जीवन जीना पड़ता है। उन्हें तब तक दूध की मशीन की तरह इस्तेमाल किया जाता है जब तक उनका शरीर पूरी तरह टूट न जाए और उसके बाद उन्हें या तो बेसहारा छोड़ दिया जाता है या मार डाला जाता है। भारत में डेयरी उद्योग ही मांस उद्योग को सबसे ज़्यादा मवेशी सप्लाई करने वाला क्षेत्र है।
तोफू पनीर की तुलना में कम कैलोरी और कम वसा वाला होता है, इसमें कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता और यह प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम (विशेषकर कैल्शियम-सेट तोफू) का अच्छा स्रोत है। यह पूरी तरह वीगन है और उन लोगों के लिए भी सुरक्षित है जिन्हें लैक्टोज पचाने में दिक्कत होती है, जो भारतीय आबादी के बड़े हिस्से में आम समस्या है। इसके विपरीत, पनीर डेयरी से बनता है जिसमें लैक्टोज और संतृप्त वसा मौजूद होती है। गाय का दूध एक आम एलर्जी उत्पन्न करने वाला पदार्थ है और डेयरी का सेवन मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज़ और कुछ हार्मोन-संबंधी कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ है।
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