PETA इंडिया की शिकायत के बाद भरतपुर वन प्रभाग ने वायरल होकर प्रसिद्धि हासिल करने वाली मंजू पूजा अघोरी के कब्जे से वन्यजीवों को बचाया।
हम भरतपुर वन प्रभाग, विशेष रूप से रेंज वन अधिकारी श्री देवेंद्र सिंह, के प्रति अवैध रूप से कैद रखे गए तोतों और बंदरों को त्वरित कार्रवाई करते हुए बचाने के लिए आभारी हैं। रीसस मकाक यानि भारतीय प्रजाति के बंदरों को छोटी रस्सियों से बांधकर रखा गया था, जबकि तोतों को एक छोटे से पिंजरे में कैद किया गया था। बचाव और संक्षिप्त पुनर्वास के बाद, पक्षियों और बंदरों को चिकित्सकीय रूप से जंगल में छोड़े जाने के लिए स्वस्थ पाया गया और उन्हें सफलतापूर्वक वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया।
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची II के तहत अलेक्ज़ेंड्राइन पैराकीट और रोज़-रिंग्ड पैराकीट संरक्षित प्रजातियाँ हैं। इस अधिनियम का उल्लंघन करते हुए इन प्रजातियों की खरीद, बिक्री या उन्हें अपने पास रखना एक अपराध है, जिसके लिए तीन वर्ष तक का कारावास, ₹1 लाख तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
भारत में बंदरों का प्रदर्शन के लिए उपयोग करना अवैध है। वर्ष 1998 में केंद्र सरकार ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 22 के तहत एक अधिसूचना जारी कर बंदरों का प्रदर्शन के लिए उपयोग प्रतिबंधित कर दिया था। रीसस मकाक वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची IV के परिशिष्ट II के तहत संरक्षित हैं। अधिनियम की धारा 49M तथा जीवित पशु प्रजातियाँ (रिपोर्टिंग एवं पंजीकरण) नियम, 2024 के अनुसार PARIVESH 2.0 पोर्टल के माध्यम से रिपोर्ट और पंजीकरण कराए बिना रीसस मकाक 9 भारतीय प्रजाति के बंदर) को अपने पास रखना दंडनीय अपराध है, जिसके लिए तीन वर्ष तक का कारावास, ₹1 लाख तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) ने अपने पत्र क्रमांक F. No. WL-8/91/2024-WL, दिनांक 9 सितंबर 2024, में स्पष्ट किया है कि सभी प्राइमेट CITES के परिशिष्ट II में सूचीबद्ध हैं तथा रीसस मकाक का निर्यात वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 49-I द्वारा विनियमित है। इसलिए, रीसस मकाक अधिनियम के अनुसूची IV/CITES नियामक ढाँचे के अंतर्गत आते हैं।
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 49M के अनुसार, अनुसूची IV में सूचीबद्ध किसी पशु प्रजाति के जीवित नमूने को अपने पास रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए उस नमूने का विवरण प्रबंधन प्राधिकरण या अधिकृत अधिकारी को देना अनिवार्य है। साथ ही, कोई भी व्यक्ति ऐसे नमूने को धारा 49M तथा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुरूप हुए बिना अपने पास नहीं रख सकता, उसका हस्तांतरण नहीं कर सकता और न ही उसका प्रजनन करा सकता है।
धारा 49M को लागू करने के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) ने 28 फरवरी 2024 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से जीवित पशु प्रजातियाँ (रिपोर्टिंग एवं पंजीकरण) नियम, 2024 अधिसूचित किए। इन नियमों के अनुसार, अधिनियम की अनुसूची IV में सूचीबद्ध किसी भी प्रजाति के जीवित नमूने को अपने पास रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को उस पशु का विवरण देना तथा उसके पंजीकरण के लिए संबंधित राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को PARIVESH 2.0 पोर्टल के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से आवेदन प्रस्तुत करना अनिवार्य है। यह कार्य नियमों के लागू होने की तिथि से छह माह के भीतर तथा उसके बाद ऐसी पशु प्रजाति को अपने पास रखने के 30 दिनों के भीतर किया जाना आवश्यक है।
हिंदू धर्म में पूजनीय होने के अतिरिक्त, रीसस मकाक मुख्य रूप से फल खाने वाले होने के कारण बीजों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। उनकी अनुपस्थिति वनों के लिए हानिकारक हो सकती है।
अवैध पक्षी व्यापार में अनगिनत पक्षियों को उनके परिवारों से अलग कर दिया जाता है और उनसे उनका प्राकृतिक जीवन तथा उनकी सभी स्वाभाविक आवश्यकताएँ छीन ली जाती हैं, ताकि उन्हें पालतू पशु के रूप में बेचा जा सके या नकली भविष्यवक्ता के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। अक्सर चूजों को उनके घोंसलों से उठा लिया जाता है, जबकि अन्य पक्षी जालों और फंदों में फँस जाते हैं, जिनसे निकलने के प्रयास में वे गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं या उनकी मृत्यु हो जाती है। पकड़े गए पक्षियों को छोटे-छोटे डिब्बों में ठूंस दिया जाता है, और अनुमान है कि परिवहन के दौरान उनमें से लगभग 60 प्रतिशत टूटे हुए पंखों और पैरों, प्यास या अत्यधिक भय के कारण मर जाते हैं। जो जीवित बचते हैं, उन्हें कैद में कुपोषण, अकेलेपन, अवसाद और तनाव से भरा जीवन बिताना पड़ता है।
कैद पशुओं से वह स्वतंत्रता, गरिमा और प्राकृतिक जीवन छीन लेती है, जिसके वे हकदार हैं।
यदि आप पशुओं पर क्रूरता या उनसे संबंधित किसी आपात स्थिति की सूचना देना चाहते हैं, तो कृपया PETA इंडिया से (0) 98201 22602 पर संपर्क करें।
