“हथिनी माधुरी के साथ विश्वासघात”: PETA इंडिया ने माधुरी को अन्य हाथियों के साथ रहने से अलग कर उसी उदास शेड में कैद करने की मठ की योजना का पर्दाफाश किया, जहां वह वर्षों तक जंजीरों में बंधी रही[

Posted on by Surjeet Singh

दिनांक 19 जून को आयोजित एक प्रेस वार्ता में, PETA इंडिया ने कोल्हापुर के नंदिनी मठ, आधिकारिक रूप से श्री स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ (करवीर), नंदानी- द्वारा  रचाई गई एक योजना का खुलासा किया। यह योजना बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत हथिनी माधुरी (जिसे महादेवी के नाम से भी जाना जाता है) के शारीरिक और मानसिक पुनर्वास हेतु की गई व्यवस्था को निरस्त करने और पलटने का प्रयास है। मठ ने पहले भी जनता के सामने माधुरी की भविष्य की देखभाल को लेकर भ्रामक दावे किए थे।

PETA इंडिया ने खुलासा किया है कि कोल्हापुर के नंदिनी मठ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त हाई पावर्ड कमेटी (HPC) के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत किया है, जिसमें माधुरी को उसके वर्तमान विशाल वन क्षेत्र वाले नए घर राधे कृष्णा टेंपल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट (RKTEWT), जिसे सामान्यतः वनतारा कहा जाता है, से हटाने की मांग की गई है। साथ ही, उसे उन अन्य हाथियों से भी अलग करने का प्रयास किया जा रहा है, जिनकी संगति उसके मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस आवेदन में माधुरी को फिर से उसी पुराने उदास और तंग शेड में कैद करने की मांग की गई है, जहां वह पिछले 33 वर्षों तक अकेले जंजीरों में बंधी रही और उसके अकेलेपन तथा निराशा ने उसे हिंसक बना दिया था। नंदिनी मठ द्वारा माधुरी की सामाजिक, पर्यावरणीय और शारीरिक आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहने के कारण उसे जब्त कर वहां से तत्काल हटाने का आदेश दिया गया था। जिन परिस्थितियों के परिणामस्वरूप माधुरी ने वर्ष 2017 में मठ के मुख्य पुजारी की जान ले ली थी और 2022 में एक जुलूस के दौरान एक व्यक्ति पर हमला किया था।

विशेष रूप से, HPC के 3 जून 2025 के आदेश तथा बॉम्बे हाई कोर्ट के 16 जुलाई 2025 के आदेशों के माध्यम से माधुरी को स्थायी रूप से RKTEWT में पुनर्वासित करने का निर्देश दिया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इन आदेशों को बरकरार रखा। हर स्तर पर मथ परिसर में माधुरी को झेलनी पड़ी शारीरिक और मानसिक पीड़ा का संज्ञान लिया गया, जिसके चलते उसे पैरों की गंभीर पुरानी बीमारी, गठिया और दर्द व लंबे समय तक एकांत में रखे जाने से उपजे मानसिक आघात के व्यवहारिक संकेतों जैसी तकलीफ़ों का सामना करना पड़ा।

पुनर्वास के बाद माधुरी को विशेष पशु-चिकित्सकीय देखभाल मिलने लगी और दशकों में पहली बार उसे अन्य हाथियों के साथ रहने का अवसर मिला। मादा हाथियों के लिए यह बेहद आवश्यक है, क्योंकि प्राकृतिक परिस्थितियों में वे कई पीढ़ियों वाले पारिवारिक झुंडों में रहती हैं। वनतारा की रिपोर्टों के अनुसार, माधुरी अब जामनगर में बचाई गई एक अन्य हथिनी के साथ गहरा संबंध बना चुकी है। वह उसकी संगति तलाशती है और दोनों साथ में गतिविधियों में भाग लेती हैं, संयुक्त हाइड्रोथेरेपी सत्रों में शामिल होती हैं तथा चिंघाड़ कर और अन्य आवाजे निकालकर आपस में संवाद करती हैं।

 

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महाराष्ट्र सरकार और वनतारा द्वारा 2025 में मीडिया में दिए गए आश्वासनों के बावजूद—जिसमें महाराष्ट्र में वनतारा की एक अत्याधुनिक सैटेलाइट सुविधा स्थापित करने की बात कही गई थी—माधुरी या किसी अन्य हाथी के लिए ऐसी कोई भी सुविधा बनाई जाने की योजना नहीं है। (माधुरी की देखभाल करने को लेकर वनतारा की मूल कंपनी रिलायंस पर एक सुनियोजित हमले के तहत निशाना साधा गया था।)माधुरी के कल्याण की चिंता करने वाली जनता को संतुष्ट करने के लिए कोल्हापुर में एक ऐसे केंद्र का वादा किया गया था, जिसमें 24 घंटे चिकित्सा सुविधाएं, “जोड़ों और मांसपेशियों को राहत देने के लिए विशेष हाइड्रोथेरेपी तालाब, तैरने और प्राकृतिक गतिविधियों के लिए बड़ा जलाशय, तथा शारीरिक पुनर्वास के लिए लेजर थेरेपी और उपचार कक्ष” जैसी सुविधाएं होंगी। लेकिन मठ द्वारा HPC में दायर नए आवेदन ने इन दावों को झूठा साबित कर दिया है। अब योजना यह है कि माधुरी को उसी शेड में कैद रखा जाए, जहां वह दशकों तक अकेले बंद रही थी, जहां अब पास एक नई सार्वजनिक सड़क भी प्रस्तावित है।

माधुरी गंभीर और लाइलाज स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही है, जिनमें पैरों और हड्डियों की दीर्घकालिक बीमारियां शामिल हैं। ये समस्याएं मठ में वर्षों तक कंक्रीट पर रहने के कारण विकसित हुई हैं और इनके लिए अभी भी विशेष पशु-चिकित्सकीय उपचार तथा निरंतर निगरानी की आवश्यकता है। इसके बावजूद, मठ उसे जामनगर से लगभग 30 घंटे की सड़क यात्रा कराकर वापस कोल्हापुर ले जाने का प्रस्ताव रख रहा है, जिससे वह अस्पताल और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं से दूर हो जाएगी।

PETA इंडिया ने कहा कि HPC ने अभी तक माधुरी की वापसी को मंजूरी नहीं दी है और उसके पुनर्वास संबंधी बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश अभी भी प्रभावी है। इसके बावजूद, मठ और वनतारा (संभवतः दबाव में) द्वारा सार्वजनिक घोषणाएं की गई हैं कि माधुरी को वापस कोल्हापुर लाया जाएगा। इससे न्यायालय के आदेशों के पालन और माधुरी के कल्याण को प्राथमिकता दिए जाने को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। PETA इंडिया ने इस प्रस्ताव के खिलाफ HPC के समक्ष आपत्तियां दायर की हैं और पूर्व न्यायिक आदेशों के अनुरूप माधुरी को स्थायी रूप से वनतारा में ही रहने देने की मांग की है।