डुबारे एलीफेंट कैंप में एक महिला और हाथी की मौत के बाद PETA इंडिया ने केंद्र सरकार से हाथियों से निकट संपर्क वाले सभी पर्यटन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की अपील की
कर्नाटक के डुबारे एलीफेंट कैंप में हाल ही में पर्यटकों के साथ स्नान सत्र के दौरान एक पर्यटक और एक हाथी की मौत, उत्तर प्रदेश के दुधवा टाइगर रिजर्व में एक बंदी हाथी द्वारा महावत पर किए गए घातक हमले तथा ऐसी अन्य घटनाओं के बाद PETA इंडिया ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री (MOEFCC) श्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर देशभर में बंदी हाथियों से जुड़ी हाथी सवारी, हाथियों के साथ स्नान, सेल्फी और अन्य सभी निकट-संपर्क पर्यटन गतिविधियों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है। PETA ने कहा है कि ये गतिविधियाँ हाथियों और मनुष्यों दोनों की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं तथा इनके स्थान पर जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाले हाथियों के अवलोकन पर आधारित नैतिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
View this post on Instagram
पत्र में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि जीवंत मशीनी हाथी, जीवित हाथियों के शोषण का मानवीय, सुरक्षित और व्यावहारिक विकल्प हैं। अपनी आंखें, कान, पूंछ और सूंड हिलाने में सक्षम तथा पहियों वाले आधार पर स्थापित ये नई तकनीक वाले मशीनी हाथी पहले से ही भारत के विभिन्न मंदिरों में उपयोग किए जा रहे हैं। वहीं, केरल पर्यटन ने थम्बूरमोज़ी बटरफ्लाई पार्क में यांत्रिक हाथी सफारी शुरू की है जो यह दर्शाती है कि जीवित हाथियों का उपयोग किए बिना भी पर्यटन और सांस्कृतिक अनुभव आकर्षक तथा यादगार बनाए जा सकते हैं। हाल ही में बेंगलुरु में एक विवाह समारोह में भी एक मशीनी हाथी का उपयोग किया गया, जिसकी स्वामी बाबा रामदेव ने सराहना की।
PETA इंडिया ने बताया कि बंदी हाथियों द्वारा पर्यटकों पर हमले आम बात हैं। फरवरी 2024 में आमेर किले में सवारी करवाने के दौरान ‘गौरी’ नामक एक हथिनी ने एक पर्यटक को अपनी सूंड में पकड़कर जमीन पर पटक दिया था, जिससे उसे गंभीर चोटें आई थीं। यही हथिनी इससे पहले आमेर किले के बाहर एक स्थानीय दुकानदार पर भी हमला कर चुकी थी। वर्ष 2019 में आमेर किले में पर्यटकों को ले जा रहे हाथियों के बीच हुई लड़ाई ने भी सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम पैदा किया था। हेरिटेज एनिमल टास्क फोर्स के अनुसार, केवल केरल में ही 15 वर्षों की अवधि में बंदी हाथियों ने 526 लोगों की जान ली है।
पर्यटन में उपयोग किए जाने वाले हाथियों सहित बंदी हाथियों को आमतौर पर भय और शारीरिक दंड के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। उनके पास हमेशा नुकीले हथियार रखे जाते हैं और उपयोग में न होने पर उन्हें लंबे समय तक जंजीरों से बांधकर रखा जाता है। जब हाथी मनुष्यों पर हमला करते हैं, तो इसके बाद आमतौर पर उनकी पिटाई और अन्य प्रकार की सज़ाएं दी जाती हैं, जिससे वे और अधिक निराश तथा व्यथित हो जाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, इंडोनेशिया सरकार ने पूरे देश में हाथी सवारी पर प्रतिबंध लगा दिया है। वर्ष 2023 में यूनाइटेड किंगडम ने एनिमल्स (लो-वेलफेयर एक्टिविटीज़ अब्रॉड) अधिनियम पारित किया, जिसके तहत यूके की कंपनियों को विदेशों में पशु क्रूरता से जुड़ी गतिविधियों जैसे हाथी सवारी का प्रचार या उनकी बिक्री करने से रोकने के लिए एक ढांचा तैयार किया गया। जनमत और पर्यटन उद्योग की प्रवृत्तियाँ भी शोषणकारी हाथी आकर्षणों से दूर जा रही हैं। वर्ष 2022 के एक वैश्विक सर्वेक्षण में पाया गया कि 84% प्रतिभागियों का मानना था कि टूर ऑपरेटरों को ऐसी गतिविधियाँ नहीं बेचनी चाहिए जो जंगली पशुओं को पीड़ा पहुँचाती हों, जबकि 79% लोगों ने कहा कि अवसर मिलने पर वे बंदी अवस्था में पशुओं को देखने के बजाय उन्हें जंगल में देखना पसंद करेंगे। ट्रिपएडवाइज़र ने भी घोषणा की है कि वह अब हाथी सवारी और कुछ अन्य वन्यजीव आकर्षणों के टिकट नहीं बेचेगा, जबकि दुनिया भर की 250 से अधिक ट्रैवल कंपनियों ने हाथी सवारी और हाथी शो का प्रचार न करने की प्रतिज्ञा की है।
हाथियों की मदद के लिए अभी श्री भूपेंद्र यादव जी को tweet करें
हाथी न तो सजावट की वस्तु हैं और न ही सवारी का साधन। उनकी मदद के लिए अभी कार्रवाई करें