जॉन अब्राहम की केंद्रीय मंत्री से अपील: पालामूर बायोसाइंसेज़ से 1200 से अधिक बीगल कुत्तों और अन्य पशुओं को तुरंत बचाया जाए

Posted on by Shreya Manocha

अभिनेता, दो अपनाए गए देसी कुत्तों के पिता और PETA इंडिया के मानद निदेशक जॉन अब्राहम ने केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह को एक आपातकालीन अपील भेजकर तेलंगाना स्थित पालामूर बायोसाइंसेज़ में पीड़ा झेल रहे 1200 से अधिक बीगल कुत्तों और अन्य पशुओं को तुरंत बचाने की माँग की है। यह संस्थान एक कॉन्ट्रैक्ट एनिमल टेस्टिंग लैब है, जिसे अंदरूनी जानकारों द्वारा उजागर किए गए दर्दनाक खुलासों के चलते कुख्याति प्राप्त हुई है।

 

जॉन अब्राहम ने अपने पत्र में उन ‘दिल दहला देने वाली’ तस्वीरों और वीडियो फुटेज पर गहरी संवेदना व्यक्त की, जिन्हें अंदरूनी सूत्रों ने साझा किया था। इन फुटेज में पिंजरों में ठूंसे गए घायल कुत्ते, ज़हर से तड़पते और खून बहाते सुअर, तथा जंगल से पकड़े गए बंदरों पर हो रहे क्रूर प्रयोग स्पष्ट रूप से दिखाए गए हैं। उन्होंने 17 जून 2025 को पशु प्रयोगों पर नियंत्रण और निगरानी समिति (CCSEA) को सौंपी गई रिपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिसमें इस प्रयोगशाला में हो रही क्रूरता और गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि की गई है।

 

अपने पत्र में जॉन ने लिखा, “कुत्तों को घायल अवस्था में तंग पिंजरों में बंद देखना कितना  पीड़ादायक था, यह शब्दों में बयां करना मुश्किल है। कई कुत्तों को सिर्फ इसलिए मार दिया गया क्योंकि उन्हें अब ‘काम का’ नहीं समझा गया। उतनी ही दिल दहला देने वाली स्थिति उन सुअरों की थी जिन्हें ज़हर देकर तड़पने के लिए छोड़ दिया गया। यह जानकर बहुत दुख पहुंचा कि जंगल से पकड़े गए बंदरों को भी इन प्रयोगों में इस्तेमाल किया जा रहा है।”

17 जून 2025 की रिपोर्ट में, CCSEA द्वारा नियुक्त निरीक्षकों ने तत्काल नियामक कार्रवाई करने, जिसमें पशुओं को हटाना और पुनर्वास करना शामिल है ताकि उन्हें आगे किसी भी प्रकार के दर्द और कष्ट से बचाया जा सके’ की सिफारिश की है। इसके साथ ही पालामूर बायोसाइंसेज़ के पंजीकरण और प्रजनन लाइसेंस की समीक्षा करने की भी आवश्यकता जताई गई है।

हाल ही में जारी CCSEA निरीक्षण रिपोर्ट में पालामूर बायोसाइंसेज़ की कार्यप्रणाली में ऐसी खामियाँ उजागर हुई हैं, जो केवल कुछ घटनाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये गहराई से जमी हुई संरचनात्मक, प्रक्रियागत और नैतिक खामियों का स्पष्ट प्रमाण हैं। निरीक्षण के दौरान मिली व्यापक और गंभीर अनियमितताएँ इस बात की गवाही देती हैं कि यह संस्था न तो पशु कल्याण के निर्धारित मानकों का पालन कर रही है और न ही नियामक जवाबदेही की मूलभूत शर्तों को पूरा कर रही है। रिपोर्ट में तत्काल नियामक कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जिसमें पशुओं को क्रूर परिस्थितियों से मुक्त कर पुनर्वास कराना शामिल है, ताकि उन्हें और अधिक दर्द, तनाव या कष्ट से बचाया जा सके। साथ ही, इस संस्था के पंजीकरण और प्रजनन लाइसेंस की पुनः समीक्षा करने की भी आवश्यकता जताई गई है, क्योंकि यहाँ लगातार नियमों के उल्लंघन हो रहे हैं।

इसके बावजूद, एक महीने से अधिक बीत जाने के बाद भी CCSEA द्वारा नियुक्त निरीक्षकों की इस रिपोर्ट पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। जॉन ने यह भी जोड़ा, “यह बेहद दुखद है कि कंपनी द्वारा स्वयं पुनर्वास के लिए चिन्हित किए गए 73 बीगल आज भी पिंजरों में बंद हैं, जबकि उन्हें अब तक सुरक्षित घरों में भेजा जाना चाहिए था।”

PETA इंडिया ने इस रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू कराने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।

पालामूर बायोसाइंसेज़ में पशुओं के लिए आवाज़ उठाइए