दिल्ली उच्च न्यायालय: पशुओं पर क्रूरता के आरोपी संस्थान IISC के वैज्ञानिक को पालमुर बायोसाइंसेज़ के निरीक्षण हेतु नियुक्त कराने के लिए सरकारी संस्था CCSEA का दबाव, PETA इंडिया ने दर्ज कराई आपत्ति

Posted on by Shreya Manocha

PETA इंडिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय में पशुओं पर परीक्षणों की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए गठित सरकारी समिति (CCSEA) की उस मांग पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई, जिसमें भारतीय विज्ञान संस्थान (IISC) के मुख्य अनुसंधान वैज्ञानिक डॉ. रामचंद्र एस. जी. को पालमुर बायोसाइंसेज़ में पशुओं पर की गई क्रूरता की जांच हेतु न्यायालय द्वारा नियुक्त आयुक्त बनाने की सिफारिश की गई है। CCSEA ने यह तथ्य न्यायालय से छुपा लिया कि IISC स्वयं 2022 में पूर्व केंद्रीय मंत्री और CPCSEA (अब CCSEA) की पूर्व अध्यक्ष मेनका गांधी द्वारा बड़ी संख्या में प्रजातियों की हत्या और अन्य क्रूरता के आरोपों के घेरे में रहा है।

CCSEA ने यह सुनिश्चित करने का भरसक प्रयास किया कि पालमुर बायोसाइंसेज़ की जांच के लिए नियुक्त किए जाने वाले दो निरीक्षकों में से एकमात्र पशु चिकित्सा या वैज्ञानिक पृष्ठभूमि रखने वाले व्यक्ति डॉ. रामचंद्र एस. जी. हों, जबकि उसने PETA इंडिया द्वारा सुझाए गए सभी पशु चिकित्सा विशेषज्ञ और वैज्ञानिकों के नामों को सख्ती से खारिज कर दिया। CCSEA ने डॉ. रामचंद्र एस. जी. को एक स्वतंत्र निरीक्षक के रूप में प्रस्तुत किया जबकि वह स्वयं CCSEA की कोर कमेटी के सदस्य हैं, इस तथ्य को PETA इंडिया ने न्यायालय के समक्ष स्पष्ट किया है। निरीक्षण के लिए न्यायालय द्वारा नियुक्त किए जाने वाले दूसरे निरीक्षक एक वकील होंगे जो प्रक्रिया में पर्यवेक्षक (observer) की भूमिका निभाएंगे। साथ ही PETA इंडिया ने यह भी अनुरोध किया है कि न्यायालय पालमुर बायोसाइंसेज़ द्वारा पुनर्वास हेतु चिन्हित की गई 73 बीगल प्रजातियों को रिहा करने का निर्देश दे जिन्हें अब भी प्रयोगशाला में पिंजरों में बंद रखा गया है ताकि उन्हें देखभाल एवं गोद लेने के लिए इच्छुक प्रतिष्ठित संगठनों को सौंपा जा सके। 

PETA इंडिया द्वारा कुत्तों, बंदरों और मिनीपिग्स के साथ की गई क्रूरता से संबंधित अंदरूनी सूचनाओं के आधार पर, CCSEA द्वारा नियुक्त निरीक्षकों की एक बहुविषयक टीम ने 11–12 जून 2025 को पालमुर बायोसाइंसेज़ में व्यापक निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण के निष्कर्षों को 17 जून 2025 को CCSEA को सौंपे गए एक विस्फोटक रिपोर्ट में प्रस्तुत किया गया, जिसमें पालमुर बायोसाइंसेज़ द्वारा पशुओं के प्रति गंभीर दुर्व्यवहार और कुप्रबंधन की पुष्टि की गई थी। निरीक्षकों ने “आगे होने वाले दर्द और पीड़ा को रोकने के लिए तत्काल नियामकीय कार्रवाई, जिसमें पशुओं को हटाना और उनका पुनर्वास शामिल है,” की सिफारिश की, साथ ही संस्थान के पंजीकरण और प्रजनन लाइसेंस की समीक्षा की आवश्यकता भी जताई। लेकिन इन सिफारिशों पर कार्रवाई करने के बजाय, CCSEA ने असामान्य रूप से यह मांग करते हुए PETA इंडिया को कानूनी कार्रवाई की धमकी दी कि वह बताए कि उसे यह निरीक्षण रिपोर्ट किसने दी, और अपनी वेबसाइट पर एक ‘पब्लिक नोटिस’ जारी करते हुए पालमुर बायोसाइंसेज़ के ग्राहकों से अनुरोध किया कि वे पालमुर से संबंधित PETA इंडिया की किसी भी जानकारी को नज़रअंदाज़ करें।

PETA इंडिया का कहना है कि IISC और पालमुर बायोसाइंसेज़ में हुई कथित क्रूर घटनाओं और इन मामलों को संभालने के तरीके में कई समानताएँ हैं। दोनों ही संस्थानों में वहाँ काम करने वाले लोगों ने पशुओं के साथ हो रही क्रूरता की जानकारी दी थी, और दोनों ही मामलों में CCSEA द्वारा किए गए पहले निरीक्षण में इस क्रूरता की पुष्टि हुई थी। साल 2022 में IISC में कुछ समय के लिए प्रयोग रोक दिए गए थे। दोनों संस्थानों ने यह कहकर आरोपों को टालने की कोशिश करी कि जो खामियाँ सामने आईं, वे सिर्फ ‘गलतफहमी’ या ‘बातों की ठीक से समझ न बनने’ की वजह से हुईं। इसके बावजूद, IISC ने यह माना है कि वहाँ हर दिन करीब 50 पशुओं को मारा जाता था। साथ ही, साल 2018 में IISC ने एक वरिष्ठ प्रोफेसर को, जिस पर एक शोध छात्रा से यौन उत्पीड़न का आरोप था, जबरन रिटायरमेंट लेने को कहा था।

17 जून 2025 को CCSEA द्वारा नियुक्त निरीक्षकों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में निष्कर्ष दिया गया है: पालमुर बायोसाइंसेज़ (PBPL) में पाए गए परिचालन दोष केवल एकल घटनाएं नहीं हैं, बल्कि यह संस्थागत, प्रक्रियात्मक और नैतिक विफलताओं का गहरा संकेत हैं। निरीक्षण के दौरान दर्ज किए गए उल्लंघनों का पैमाना और गंभीरता पशु कल्याण और नियामक जवाबदेही के स्थापित मानकों के पालन को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न करती है। यह स्थिति तुरंत ध्यान देने योग्य है—विशेष रूप से पशुओं को और अधिक दर्द, पीड़ा या कष्ट से बचाने के लिए उन्हें हटाने और पुनर्वासित करने के संदर्भ में। रिपोर्ट के निष्कर्षों में यह भी कहा गया है कि संस्थान के पंजीकरण और प्रजनन लाइसेंस की गंभीर और बार-बार नियमों के उल्लंघन के मद्देनजर गंभीर समीक्षा की जानी चाहिए।”

PETA इंडिया द्वारा किए गए अंदरूनी जानकारों आधारित खुलासे में दिखाया गया कि बीगल नस्ल के कुत्तों को इतने भीड़भाड़ वाले बाड़ों में ठूंसकर रखा गया कि वे एक-दूसरे को घायल कर खून बहाने लगे। मिनीपिग्स को इतनी बेरहमी से ज़हर दिया गया कि उनका खून निकल आया और जंगल से पकड़े गए डरे-सहमे बंदरों पर क्रूर प्रयोग किए जा रहे थे। अंदरूनी सूत्रों ने आरोप लगाए कि दर्द निवारक दवाएं तक उपलब्ध नहीं थीं, कई कुत्ते प्रक्रियाओं के दौरान अपंग हो गए या मर गए और पशुओं के साथ बेरुखी से बर्ताव किया गया। निरीक्षकों की रिपोर्ट ने भी पशुओं के प्रति क्रूरता और कुप्रबंधन की इन बातों की पुष्टि की है।