दिल्ली उच्च न्यायालय ने आपत्तिजनक गतिविधियों का हवाला देते हुए पालमुर बायोसाइंसेज़ को नए पशु लाने से रोका, PETA इंडिया की याचिका पर अंतरिम सुधारात्मक कार्रवाई के आदेश
PETA इंडिया द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की एकल पीठ ने पालमुर बायोसाइंसेज़ प्राइवेट लिमिटेड को किसी भी नए पशु की ख़रीद या आवास की अनुमति देने पर तत्काल रोक लगा दी है और इस संस्था के खिलाफ अंतरिम सुधारात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश पशुओं पर प्रयोगों के नियंत्रण और निगरानी के लिए बनाए गए केंद्रीय निकाय (CCSEA) को 17 जून 2025 को सौंपी गई एक निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज आपत्तिजनक गतिविधियों और सिफारिशों के आधार पर जारी किया गया, जिसमें पशुओं के साथ पालमुर बायोसाइंसेज़ द्वारा किए जा रहे व्यवहार, उनके रखरखाव, मरणासन्न करने की प्रक्रियाओं और पशु-चिकित्सकीय देखभाल को लेकर गंभीर खामियाँ उजागर हुई थीं।
CCSEA द्वारा नियुक्त एक समिति द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में संस्था को पशुओं पर प्रजनन और प्रयोग करने के लिए प्रदान किए गए पंजीकरण की तत्काल समीक्षा की सिफारिश की गई है, साथ ही संस्थान में बंद 1200 से अधिक पशुओं के पुनर्वास की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। अदालत ने CCSEA को निर्देशित किया है कि वह PETA इंडिया और CCSEA के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में अगले एक सप्ताह के भीतर पालमुर बायोसाइंसेज़ की सुविधाओं का एक नया निरीक्षण कराए और पहचान की गई सभी समस्याओं का समाधान करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। न्यायालय ने CCSEA को दो सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का भी आदेश दिया है। यह मामला अब 4 अगस्त 2025 को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
PETA इंडिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राजशेखर राव और कीस्टोन पार्टनर्स ने अदालत में दलील दी कि 11–12 जून 2025 को निरीक्षण किए जाने के तीन सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद CCSEA द्वारा पालमुर बायोसाइंसेज़ के खिलाफ कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। इसके उलट, संस्था में कथित रूप से और ऑडिट कराए गए, जिससे पालमुर बायोसाइंसेज़ को केवल सतही सफाई का मौका मिल गया जिससे वास्तविक समस्याएँ छुपाई जा सकें। इस पर उच्च न्यायालय ने स्पष्ट टिप्पणी की कि “पशुओं की स्थिति में सुधार के लिए त्वरित अंतरिम निर्देश आवश्यक हैं।”
PETA इंडिया ने अपनी याचिका के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त निरीक्षण समिति की उस सिफारिश के तत्काल क्रियान्वयन की मांग की जिसमें पालमुर बायोसाइंसेज़ में “पशुओं को और अधिक पीड़ा और कष्ट से बचाने के लिए तत्काल नियामक कार्रवाई, जिसमें पशुओं को हटाना और उनका पुनर्वास शामिल है” की सख्त अनुशंसा की गई थी। विस्तृत निरीक्षण के बाद तैयार इस रिपोर्ट में पालमुर बायोसाइंसेज़ के पंजीकरण और प्रजनन लाइसेंस की समीक्षा करने की सिफारिश भी की गई है। इसके अतिरिक्त, PETA इंडिया की याचिका में संस्था द्वारा धारित सभी पंजीकरणों और अनुमोदनों को स्थायी रूप से रद्द करने और संस्थान को पूरी तरह से बंद किए जाने की मांग भी की गई है।
PETA इंडिया द्वारा जून माह में तेलंगाना स्थित बीगल प्रजनन केंद्र और कॉन्ट्रैक्ट प्रयोगशाला के खिलाफ अंदरूनी जानकारों की मदद से सामने लाया गया एक खुलासा, जिसमें संस्थान के भीतर की वीडियो रिकॉर्डिंग भी शामिल थी, सार्वजनिक किए जाने के बाद सरकारी निरीक्षण किया गया। यह प्रयोगशाला विदेशी ग्राहकों से परीक्षण अनुबंध स्वीकार करती है। PETA इंडिया की याचिका में इस क्रूरता को उजागर किया गया है और संस्था के जानबूझकर तथ्य छिपाने और आंकड़ों में फर्जीवाड़ा करने के प्रमाणित इतिहास को भी रेखांकित किया गया है।
पहली बार इतिहास रचते हुए, 16 जून 2025 को महबूबनगर के बूथपुर थाना में पालमुर बायोसाइंसेज़ के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173(1) के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई। यह प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धाराओं 34, 269, 289, 337 और 429 के उल्लंघन के आरोप में दर्ज की गई। यह भारत में किसी पशु प्रयोगशाला के खिलाफ पुलिस द्वारा दर्ज की गई पहली प्राथमिकी है।
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17 जून 2025 को CCSEA को सौंपी गई निरीक्षण रिपोर्ट की रिपोर्ट की सिफारिशों पर डॉ. मुकेश कुमार गुप्ता (CCSEA के सदस्य और ICMR-नेशनल एनिमल रिसोर्स फैसिलिटी फॉर बायोमेडिकल रिसर्च के निदेशक), डॉ. विवेक त्यागी (CCSEA के सीनियर कंसल्टेंट), भारतीय जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड के एक सदस्य, इंस्टीट्यूशनल एनिमल एथिक्स कमिटी के दो नामांकित सदस्य और ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स की प्रबंध निदेशक आलोकपर्णा सेनगुप्ता ने हस्ताक्षर किए हैं। बताया जाता है कि आलोकपर्णा सेनगुप्ता ने इस रिपोर्ट पर कार्रवाई में हो रही देरी को लेकर मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह को पत्र भी लिखा है। इसके बावजूद, CCSEA ने अपने द्वारा नियुक्त निरीक्षकों की रिपोर्ट लागू करने या पालमुर बायोसाइंसेज़ के खिलाफ कोई कार्रवाई करने के बजाय हाल ही में अपनी वेबसाइट पर एक ‘पब्लिक नोटिस’ जारी किया है, जिसमें PETA इंडिया को बदनाम किया गया है। यह कदम न केवल असामान्य है बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह किसी भी कीमत पर एक निजी कंपनी पालमुर बायोसाइंसेज़ और उसके कॉर्पोरेट हितों की रक्षा करने के इरादे से उठाया गया है।
PETA इंडिया द्वारा किए गए अंदरूनी जानकारों आधारित खुलासे में दिखाया गया कि बीगल नस्ल के कुत्तों को इतने भीड़भाड़ वाले बाड़ों में ठूंसकर रखा गया कि वे एक-दूसरे को घायल कर खून बहाने लगे। मिनीपिग्स को इतनी बेरहमी से ज़हर दिया गया कि उनका खून निकल आया और जंगल से पकड़े गए डरे-सहमे बंदरों पर क्रूर प्रयोग किए जा रहे थे। अंदरूनी सूत्रों ने आरोप लगाए कि दर्द निवारक दवाएं तक उपलब्ध नहीं थीं, कई कुत्ते प्रक्रियाओं के दौरान अपंग हो गए या मर गए और पशुओं के साथ बेरुखी से बर्ताव किया गया। निरीक्षकों की रिपोर्ट ने भी पशुओं के प्रति क्रूरता और कुप्रबंधन की इन बातों की पुष्टि की है।
PETA इंडिया की साइंटिस्ट और रिसर्च पॉलिसी एडवाइजर डॉ. अंजना अग्रवाल कहती हैं, “हम दिल्ली उच्च न्यायालय के आभारी हैं जिन्होंने स्पष्ट कर दिया कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और पालमुर बायोसाइंसेज़ में पशुओं की पीड़ा को खत्म करने के लिए सुधारात्मक कार्रवाई का आदेश दिया। विडंबना यह है कि CCSEA ने अंदरूनी जानकारों और अपने ही निरीक्षकों की रिपोर्टों पर कार्रवाई करने के बजाय, जिन्होंने संस्थान में गड़बड़ी की पुष्टि की और 1200 से अधिक पशुओं को तुरंत बचाने की सिफारिश की, PETA इंडिया पर लगातार हमले किए, उसे बदनाम करने का प्रयास किया और दबाव बनाने की कोशिश की। अब PETA इंडिया पालमुर बायोसाइंसेज़ को पूरी तरह बंद कराने की मांग करता है ताकि वहां के पशुओं को स्थायी और सुरक्षित राहत मिल सके।”
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