आगरा में ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ से पूर्व PETA इंडिया की महिला समर्थकों ने मुर्गियों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन किया

Posted on by Erika Goyal

‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ के अवसर पर, आगरा में PETA इंडिया की महिला समर्थकों ने पिंजरों में बंद होकर मुर्गियों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन किया। इस अभियान का उद्देश्य जनता को यह संदेश देना था कि अंडे देने के लिए पाली गई मुर्गियाँ आजीवन छोटे पिंजड़ों में बंद रहती हैं, जहाँ वे अपना एक पंख भी नहीं फैला सकतीं। PETA इंडिया की इन समर्थकों ने लोगों से अपील की कि मुर्गियों को आज़ाद रहने दिया जाए और उनके साथ मानवता और सहानुभूति का व्यवहार किया जाए।

अंडा उद्योग में मुर्गियों का प्रजनन इस तरह से किया जाता है कि वे हर साल 300 अंडे देती हैं, जबकि उनके पूर्वज प्राकृतिक रूप से केवल 15 अंडे देते थे। इसके कारण, वे हड्डियों की कमजोरी, संक्रमण, अंडाशय के कैंसर, प्रजनन संबंधी ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाती हैं, और कभी-कभी अंडे उनके शरीर में फंस भी जाते हैं। अगर उचित देखभाल मिले, तो एक मुर्गी लगभग 10 साल तक जीवित रह सकती है, लेकिन पॉल्ट्री फार्मस में, जहां बहुत गंदगी और भीड़-भाड़ होती है, वह मुश्किल से 2 साल तक जीवित रहती है। जब मुर्गियों अंडे देने लायक नहीं रह जाती तो उन्हें बेकार मानकर उन सबको एक ट्रक में ठूस-ठूस कर मरने के लिए बूचड़खाने या पशु मंडियों में भेजा जाता है, जहाँ जिंदा और सचेत अवस्था में होने के दौरान ही उनका गला काट दिया  जाता है।

वीगन बनने से हम हर साल लगभग 200 पशुओं को क्रूरता और हिंसक, दर्दनाक मौतों से बचा सकते हैं। इसके साथ ही, वीगन भोजनशैली हृदय रोग, मधुमेह, मोटापे और कैंसर जैसी बीमारियों के जोखिम को भी कम करती है। यह भोजनशैली न केवल हमारी सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि भविष्य में महामारियों को भी रोकने में मदद करती है। सार्स, स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू और कोविड-19 जैसी बीमारियाँ पशुओं के शोषण और अत्याचार के कारण मनुष्यों में फैलीं, जो मुख्य रूप से उन्हें भोजन के रूप में उपयोग करने से होती हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में जलवायु संकट के सबसे विनाशकारी प्रभावों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर वीगन जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

सच्ची फेमिनिस्ट बनें, अंडे को अलविदा कहें। वीगन जीवनशैली को अपनाकर बदलाव लाएं!