‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ से पहले PETA इंडिया की समर्थक पिंजरों में कैद होकर मुर्गियों के साथ एकजुटता दिखायेंगी

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06 March 2025

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आगरा – दिनांक 8 मार्च को ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ आने वाला है और इस अवसर पर, शुक्रवार को आगरा में महिलाएँ पिंजरों मैं बंद होकर मुर्गियों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन करेंगी। । PETA इंडिया की ये महिला समर्थक जनता को यह संदेश देना चाहती हैं कि अंडे देने के लिए पाली गई मुर्गियाँ आजीवन छोटे पिंजड़ों में कैद रहती हैं, जहाँ वे अपना एक पंख भी नहीं फैला सकतीं, उन्हें आजाद रहने दिया जाए।

कब:                       शुक्रवार, 7 मार्च, दोपहर 12 बजे
कहाँ:                      आगरा फोर्ट मुख्य प्रवेश द्वार, छत्रपति शिवाजी महाराज स्मारक के पास, राका गंज, आगरा, उत्तर प्रदेश 282001

PETA इंडिया की मीडिया और सेलिब्रिटी प्रोजेक्ट्स असिस्टेंट, अनुष्का यादव ने कहा, “सभी महिलाओं को स्वतंत्रता और खुशी का अधिकार है, जिसमें वे मुर्गियाँ भी शामिल हैं, जो हर दिन तारों से बने गंदे पिंजरों में बंद रहती हैं, ताकि इंसान उनके अंडों का सेवन कर सके। PETA इंडिया इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी से अपील करता है कि हम सभी प्रजातियों की महिलाओं के प्रति दया और सम्मान दिखाएं, और वीगन भोजन का चयन करके उनके लिए एक बेहतर भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाएं।”

अंडा उद्योग में मुर्गियों का प्रजनन इस तरह से किया जाता है कि वे हर साल 300 अंडे देती हैं, जबकि उनके पूर्वज प्राकृतिक रूप से केवल 15 अंडे देते थे। इसके कारण, वे हड्डियों की कमजोरी, संक्रमण, अंडाशय के कैंसर, प्रजनन संबंधी ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाती हैं, और कभी-कभी अंडे उनके शरीर में फंस भी जाते हैं। अगर उचित देखभाल मिले, तो एक मुर्गी लगभग 10 साल तक जीवित रह सकती है, लेकिन पॉल्ट्री फार्मस में, जहां बहुत गंदगी और भीड़-भाड़ होती है, वह मुश्किल से 2 साल तक जीवित रहती है। जब मुर्गियों अंडे देने लायक नहीं रह जाती तो उन्हें बेकार मानकर उन सबको एक ट्रक में ठूस-ठूस कर मरने के लिए बूचड़खाने या पशु मंडियों में भेजा जाता है, जहाँ जिंदा और सचेत अवस्था में होने के दौरान ही उनका गला काट दिया  जाता है।

मुर्गियों को अंडे देने के लिए मजबूर करने वाली वीडियो फुटेज यहां देखी और डाउनलोड की जा सकती हैं।

वीगन बनने से हम हर साल लगभग 200 पशुओं को क्रूरता और हिंसक, दर्दनाक मौतों से बचा सकते हैं। इसके साथ ही, वीगन भोजनशैली हृदय रोग, मधुमेह, मोटापे और कैंसर जैसी बीमारियों के जोखिम को भी कम करती है। यह भोजनशैली न केवल हमारी सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि भविष्य में महामारियों को भी रोकने में मदद करती है। सार्स, स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू और कोविड-19 जैसी बीमारियाँ पशुओं के शोषण और अत्याचार के कारण मनुष्यों में फैलीं, जो मुख्य रूप से उन्हें भोजन के रूप में उपयोग करने से होती हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में जलवायु संकट के सबसे विनाशकारी प्रभावों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर वीगन जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

PETA इंडिया जो इस धारणा में विश्वास रखता है कि “पशु हमारा भोजन बनने के लिए नहीं है”, प्रजातिवाद का विरोध करता है क्योंकि यह एक ऐसी विचारधारा है जिसमें मनुष्य इस संसार में स्वयं को सर्वोपरि मानकर अपनी अलग अलग जरूरतों के अनुसार अन्य प्रजातियों का शोषण करना अपना अधिकार समझता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाईट PETAIndia.com पर जाएँ और XFacebook, व Instagram पर हमें फॉलो करें।

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