बिलबोर्ड पर हुई गलतफ़हमी के लिए PETA माफी चाहता है – चमड़े के विरोध पर अब नया बिलबोर्ड अभियान।

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21 July 2020

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क्रूर उद्योग में गायों की सुरक्षा हेतु PETA अपने अभियानों को निरंतर जारी रखेगा

अहमदाबाद : गायों को चमड़े की जैकेट, पर्स, बेल्ट और जूतों में बदलने से बचाने के लिए पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया का सफल जागरूकता अभियान जो रक्षाबंधन की थीम के साथ शुरू हुआ था अब आगे बढ़ रहा है। इस श्रंखला में अब PETA इंडिया कानपुर, भोपाल, अहमदाबाद, चंडीगढ़, जयपुर, पटना, एवं पुणे में नए बिलबोर्ड स्थापित करने जा रहा है। इन नए बिलबोर्ड में एक खूबसूरत गाए एवं भैंस के चित्र के साथ संदेश लिखा है “मैं एक जीव हूँ, कोई वस्तु नहीं ।  कृपया चमड़ा मुक्त बने!” यह नया बिलबोर्ड हमारे पुराने अभियान “मैं एक जीव हूँ” की श्रंखला का ही एक भाग है जिसमे अलग अलग जानवरों के चित्रों के साथ इस तरह का संदेश लिखकर लोगों को वीगन भोजन के प्रति प्रेरित करना है।

PETA इंडिया का पहला बिलबोर्ड जो पूरी तरह से लोगों को वीगन भोजन के प्रति प्रेरित करने के उद्देश्य से लगाया गया था, उसे काफी सराहना मिली लेकिन साथ ही कुछ गलतफ़हमी भी हुई। कुछ लोग PETA इंडिया के बिलबोर्ड में लिखे संदेश को सही से समझ नहीं पाये और यह सोचने लगे की PETA यह कहना चाहता है की राखियाँ चमड़े की बनी होती हैं। हालांकि हमारा संदेश गायों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ था जिसका राखी में चमड़ा होने से कोई लेना देना भी नहीं था। जल्लीकट्टू पर रोक लगवाने एवं मंदिरों में कैदी हाथियों की रिहाई के लिए हमारे काम का विरोध करने वाले कुछ लोगों की घर्णित सोच के चलते PETA को बदनाम करने की कोशिश की गयी।

पहले विज्ञापन में एक गाय के चित्र के साथ लोगों को यह संदेश देना था जैसे वो रक्षाबंधन पर अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं ठीक उसी तरह हमारी प्रिय गाय की रक्षा का भी संकल्प लें व चमड़े का बहिष्कार करें। इस नए बिलबोर्ड में हमने ‘रक्षाबंधन’ शब्द को हटा दिया है व जनता को संदेश दिया है कि ‘प्रतिदिन चमड़े के लिए जान गवाने वाले जानवरों की रक्षा करना कितना जरूरी है।‘

अहमदाबाद में, नया बिलबोर्ड 132 फिट रिंग रोड, आयोजन नगर में लगाया गया है। इस विज्ञापन को यहाँ भी देखा व डाउनलोड किया जा सकता है। चमड़े के लिए मौत के घाट उतारी जाने वाली गायों एवं अन्य जानवरों की वीडियो फुटेज यहाँ देखी व डाउनलोड की जा सकती है।  

चमड़े के विरोध में लगाए गए PETA इंडिया के विज्ञापन के बाद “चमड़े के लिए जानवरों पर की जाने वाली क्रूरता” का पर्दाफाश करने वाले हमारे वीडियो को सामान्य की अपेक्षा 530% अधिक लोगों ने देखा है तथा माँस अंडे एवं डेयरी उद्योग की क्रूर सच्चाई पर बने वीडियो को 1000% अधिक दर्शकों द्वारा देखा गया है। अनेकों लोगों ने हमसे संपर्क कर चमड़ा मुक्त ख़रीदारी के विकल्पों की जानकारी मांगी हैं। माँस खाने वाले लोगों ने सोशल मीडिया पर जानबूझकर हमारे खिलाफ गलतफ़हमी पैदा की व हमारे अभियान को संप्रदायिक रंग देने की भी कोशिश की।

जानवरों की रक्षा हेतु अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहते हुए भारत में “चमड़े के लिए क्रूरता का शिकार होने वाली गाय, भैंसे एवं अन्य जानवरों” को हमारी मदद की जरूरत है। कत्लखानों में ले जाने हेतु इन जानवरों को गाड़ियों में ठूस-ठूस कर भरा जाता है कि परिवहन के दौरान उनकी हड्डियाँ टूट जाती हैं या दम घुटने से उनकी मौत तक हो जाती है। वीगन जीवनशैली को बढ़ावा देने हेतु PETA इंडिया नए बिलबोर्ड स्थापित कर अपने अभियान को निरंतर जारी रखेगा। PETA इंडिया ने अपनी वेबसाईट www.petaindia.org पर भी यह लिखा है की जानेवा परिवहन से बच कर कत्लखानों में पहुंचे जानवरों को अन्य जानवरों के सामने खुले में मौत के घाट उतार दिया जाता है, होश में रहने के दौरान उनके शरीर से खाल उतार ली जाती है व उनके शरीर के अंगो को काट कर अलग कर दिया जाता है। चमड़े का उपयोग इन्सानों एवं पर्यावरण के लिए खतरनाक है। चमड़े के कारखानों से निकलने वाला जहरीला पानी नदियों एवं नालों में जाकर मिल जाता है जो उन लोगों के स्वास्थ को खतरे में डालता है जो इस पानी के संपर्क में आते हैं। इस जहरीले पानी से कैंसर, श्वसन रोग या अन्य तरह की बीमारियाँ होने का खतरा होता है।

PETA इंडिया के कैम्पेन कोर्डिनेटर राधिका सूर्यवंशी कहती हैं- “चमड़े के लिए इस्तेमाल होने वाली गाय भैंसे भी हमारी ही तरह खून, हड्डी एवं मांस से बनी होती हैं, वह भी अपने बच्चों से प्रेम करती हैं, अपने जीवन को महत्व देती हैं व जीना चाहती हैं। गाय जीवित प्राणी के साथ साथ हमारी माँ समान हैं और उनकी रक्षा करना हमारा काम है। वह जूते, पर्स, बेल्ट या बैग बनने के लिए नहीं हैं वह आपकी हमारी तरह जीवित प्राणी हैं। PETA इंडिया चाहता है कि सभी लोग वीगन जीवनशैली का अनुसरण करें इसलिए हम समय समय पर अलग अलग जगहों पर वीगन अभियान के बिलबोर्ड लगाकर लोगों को वीगन जीवनशैली के प्रति प्रेरित करते रहते हैं। दुख के बात यह है कि बहुत से लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उन्होने किस जानवर की खाल से बने चमड़े के कपड़े, बेल्ट जूते पहने हैं।

PETA यह बताना चाहता है कि अब देश के हर बाज़ार में सिंथेटिक लैदर या नकली चमड़े के बने बेहतरीन प्रोडक्ट्स आसानी से उपलब्ध हैं। आप PETA इंडिया की वेबसाईट पर PETA Approved Vegan logo सूची के तहत उन कंपनियों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं जो वीगन उत्पादों की बिक्री करती हैं।

इसी माह PETA इंडिया ने दिल्ली एवं मुंबई में बकरे के चित्र के वाले बिलबोर्ड स्थापित किए हैं जिन पर संदेश लिखा है  “मैं एक जीव हूँ मांस नहीं, हमारे प्रति नजरिया बदले कृपया वीगन बनें”। यह बिलबोर्ड लखनऊ में भी लगाया गया था लेकिन इसे बिना हमारी इजाजत के लखनऊ से हटवा दिया गया

PETA इंडिया के एक प्रवक्ता आमिर नबी कहते हैं- “मैं वीगन हूँ, हमारी तरह जानवर भी दर्द एवं पीड़ा का अनुभव करते हैं, उनमे भी बहुत सी खूबियाँ होती हैं और हमारी तरह वह भी अपने जीवन को महत्व देते हैं। मैंने ईद-ऊल-अज़हा मनाने का रास्ता चुन लिया है, मैं गरीबों में फल-फ्रूट बांटकर ईद मनाऊँगा। मैं कुर्बानी दिये जाने की भावना का सम्मान करता हूँ इसलिए किसी जीवित प्राणी की जान लेने की बजाय हर रोज दान धर्म के काम करता हूँ और ऐसा करके मुझे बेहद खुशी मिलती है।“

PETA समूह जो इस सिद्धांत के तहत काम करता है की जानवर हमारे वस्त्र बनने के लिए नहीं हैं”, प्रजातिवाद का विरोध करता है क्यूंकि यह मनुष्य की ऐसी सोच है जिसमे वह स्वयं को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ समझकर बाकी प्रजातियों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने को सही मानता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया PETAIndia.com पर जाएँ।

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