दिल्ली उच्च न्यायालय ने पालामूर बायोसाइंसेज़ से पुनर्वास के लिए पात्र 73 बीगल और अन्य पशुओं को मुक्त किए जाने संबंधी PETA इंडिया की याचिका पर CCSEA से जवाब मांगा

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27 July 2026

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नई दिल्ली/हैदराबाद – आज, माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार की कमेटी फॉर कंट्रोल एंड सुपरविज़न ऑफ एक्सपेरिमेंट्स ऑन एनिमल्स (CCSEA) को नोटिस जारी कर, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) द्वारा दायर याचिका पर उनका जवाब मांगा है। इस याचिका में पालामूर बायोसाइंसेज़ प्राइवेट लिमिटेड- एक अनुबंधित प्रयोगशाला, जो अक्सर विदेशी ग्राहकों के लिए पशुओं पर दवाओं, कीटनाशकों और चिकित्सा उपकरणों का परीक्षण करती है, में मौजूद पुनर्वास के लिए पात्र पशुओं को उपयुक्त अभयारण्यों और उपयुक्त अभयारण्यों और ऐसे घर जहां उन्हें स्नेह और अपनापन मिले में भेजने का अनुरोध किया गया है। PETA इंडिया की यह याचिका CCSEA द्वारा एक वर्ष तक पर्याप्त कार्रवाई न किए जाने तथा पालामूर बायोसाइंसेज़ प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 73 बीगल और अन्य ऐसे पशुओं का, जो कानून के अनुसार प्रजनन या प्रयोगों के लिए इस्तेमाल नहीं किये जा सकते हैं, उपयुक्त तरीके से पुनर्वास करने में लगातार विफल रहने के बाद दायर की गई है। याचिका में CCSEA के दिशा-निर्देशों के प्रलेखित उल्लंघनों के आधार पर तेलंगाना स्थित इस केंद्र का पशुओं का प्रजनन करने और उन पर प्रयोग करने का पंजीकरण रद्द करने की भी मांग की गई है।

PETA इंडिया की याचिका में ऐसे पशुओं की पहचान करने का अनुरोध किया गया है जिन्होंने प्रजनन या प्रयोगों के लिए निर्धारित अधिकतम अनुमत चक्र पूरे कर लिए हैं, जो प्रयोगशाला की अभिरक्षा में अनुमत तीन वर्ष की अवधि से अधिक समय से रह रहे हैं, या जो आयु, अशक्तता अथवा अन्य कारणों से प्रजनन या प्रयोगों के लिए उपयुक्त नहीं हैं। इनमें 73 बीगल कुत्ते भी शामिल हैं, जिन्हें स्वयं पालामूर ने एक वर्ष से अधिक समय पहले पुनर्वास के लिए पात्र के रूप में चिह्नित किया था, लेकिन वे अब भी प्रयोगशाला में लगभग उन्हीं परिस्थितियों में रह रहे हैं, जिनमें प्रजनन और प्रयोगों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुत्तों को रखा जाता है। PETA इंडिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राजशेखर राव ने प्रस्तुत किया कि, प्रयोगशालाओं से सेवानिवृत्त बीगल कुत्तों के पुनर्वास में विशेषज्ञता रखने वाली संस्था फ्रीगल्स द्वारा इन कुत्तों को स्नेहपूर्ण घरों में रखने या अपने अभयारण्य में उनकी देखभाल करने की पेशकश किए जाने के बावजूद, पालामूर ने बिना किसी स्पष्ट कारण के इन कुत्तों को वीरान पिंजरों से बेहतर जीवन का अवसर देने से साफ इनकार कर दिया है।

 PETA इंडिया की याचिका में CCSEA को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि वह प्रयोगशालाओं से संबंधित आंकड़े एकत्रित कर उन्हें सार्वजनिक करे। इनमें पशुओं की प्रजाति-वार जनगणना; किए जा रहे प्रयोगों के प्रकार; पशुओं के पुनः उपयोग, पुनर्वास या मुक्ति (यूथेनेशिया) के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOPs) और उनसे संबंधित अभिलेख; तथा सार्वजनिक पारदर्शिता के उद्देश्य से किसी विशेष प्रजाति के पशुओं के उपयोग का औचित्य/तर्क शामिल हैं। ऐसे आंकड़ों के प्रकाशन से जवाबदेही सुनिश्चित होगी और यह स्वतंत्र रूप से जांच करना संभव होगा कि क्या प्रयोगशालाएँ प्रयोगों में पशुओं के उपयोग को कम कर रही हैं और उनके स्थान पर गैर-पशु प्रौद्योगिकियों को अपना रही हैं। उदाहरण के लिए, यूनाइटेड किंगडम पशुओं से संबंधित वैज्ञानिक प्रक्रियाओं की संख्या के बारे में विस्तृत वार्षिक आंकड़े प्रकाशित करता है।

अक्टूबर 2024 में, PETA इंडिया ने पालामूर बायोसाइंसेज़ में रीसस मकाक (भारतीय प्रजाति के बंदर) बंदरों पर कथित रूप से बिना अनुमति किए जा रहे परीक्षणों के संबंध में अधिकारियों के समक्ष आधिकारिक शिकायतें दर्ज कराई थीं। इसके तुरंत बाद, व्हिसलब्लोअर्स (सूचना देने वाले लोग) सामने आए और उन्होंने वर्षों से इस सुविधा में मौजूद चौंकाने वाली परिस्थितियों को उजागर करने वाले सबूत, तस्वीरें और वीडियो फुटेज उपलब्ध कराए। उनकी रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी की बीगल प्रजनन सुविधा में लगभग 1,500 कुत्तों को अत्यधिक भीड़भाड़ वाले पिंजरों में ठूंसकर रखा गया था, जहाँ कई कुत्तों को केवल दो कुत्तों के लिए निर्धारित स्थान में बंद किया गया था। तनावग्रस्त कुत्ते अक्सर एक-दूसरे को काटते थे, जिससे उनके कान लहूलुहान हो जाते थे और शरीर जख्मी हो जाता था। उन्होंने बताया कि जिन कुत्तों को मामूली और उपचार योग्य स्वास्थ्य समस्याएँ थीं, उनका इलाज करने के बजाय उन्हें मार दिया गया, और एक ही घटना में 100 से अधिक कुत्तों को इसलिए मार दिया गया क्योंकि उन्हें अब “उपयोगी” नहीं माना जाता था। इस सुविधा में मौजूद गॉटिंगेन मिनीपिग्स को कथित रूप से वीरान पिंजरों में रखा गया था, और जब एक मिनीपिग ने अप्रत्याशित रूप से बच्चों को जन्म दिया, तो कथित रूप से उसके नवजात शिशुओं को मार दिया गया क्योंकि कंपनी के पास मिनीपिग्स का प्रजनन करने का लाइसेंस नहीं है। खबरों के मुताबिक, कुत्तों की त्वचा में केमिकल के इंजेक्शन दिए गए, जिससे उन्हें इतना गंभीर इन्फेक्शन हुआ कि कुछ कुत्ते तो हिल भी नहीं पा रहे थे। व्हिसलब्लोअर्स ने बताया कि कुत्तों को ज़बरदस्ती दवाएँ खिलाने से उन्हें दर्द, खून की उल्टी और दूसरी तकलीफ़ें हुईं, और उनकी मौत भी हो गई। साथ ही बतायाकि स्टाफ़ ने कुत्तों के साथ इतनी बेरहमी से बर्ताव किया कि उनको लात मारी, लापरवाही से पिंजरे के दरवाज़े ऐसे बंद किये कि कुत्तों के अंग उसमे दब गए और उनकी हड्डियाँ तक टूट गईं।

इस कंपनी की लैब पर यह भी आरोप है कि उसने राजस्थान से जंगली रीसस मकाक बंदर प्राप्त किए थे। बताया गया कि इनमें से कुछ बंदरों में मंकीपॉक्स बीमारी होने की आशंका थी, जो मनुष्यों में भी फैल सकता है। व्हिसलब्लोअर्स के अनुसार, सरकारी अधिकारियों को इसकी सूचना देने के बजाय, प्रयोगशाला ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के इस जोखिम को छिपाने के लिए उन बंदरों को मार दिया।

17 जून 2025 को CCSEA को सौंपी गई सरकार द्वारा नियुक्त निरीक्षण समिति की रिपोर्ट में इस केंद्र में लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक, प्रक्रियात्मक और नैतिक विफलताओं का दस्तावेजीकरण किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि निष्कर्ष “नियामक अनुपालन, नैतिक जिम्मेदारी और पशु कल्याण के प्रति प्रणालीगत और निरंतर उपेक्षा” को दर्शाते हैं तथा “आगे होने वाली पीड़ा और कष्ट को रोकने के लिए पशुओं को हटाने और उनके पुनर्वास सहित तत्काल नियामक कार्रवाई आवश्यक है।” निरीक्षण समिति की रिपोर्ट में पालामूर के पशुओं का प्रजनन करने और उन पर प्रयोग करने के पंजीकरण की तत्काल समीक्षा करने तथा वहां रखे गए सभी 1,200 से अधिक पशुओं के पुनर्वास की सिफारिश की गई। रिपोर्ट में पशुओं की अपर्याप्त देखभाल और प्रबंधन, आवास व्यवस्था, मुक्ति (यूथेनेशिया) संबंधी प्रक्रियाओं और पशु चिकित्सा देखभाल में कमियों का उल्लेख किया गया। पशु क्रूरता के लिए इस सुविधा के विरुद्ध एक ऐतिहासिक प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई – भारत में किसी पशु प्रयोग प्रयोगशाला के विरुद्ध FIR दर्ज किए जाने का यह पहला मामला है।

10 जुलाई 2025 को, दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने CCSEA को पालामूर बायोसाइंसेज़ के विरुद्ध अंतरिम सुधारात्मक कदम उठाने का आदेश दिया और मामले की सुनवाई के दौरान इस सुविधा को किसी भी नए पशु को प्राप्त करने या रखने से प्रतिबंधित कर दिया। 16 सितंबर 2025 को, उच्च न्यायालय ने पालामूर को न्यायालय द्वारा आदेशित एक नई निरीक्षण प्रक्रिया के आधार पर “तत्काल सुधारात्मक कदम” उठाने का आदेश दिया। 25 सितंबर 2025 को, उच्च न्यायालय ने आगे निर्देश दिया कि पालामूर 73 बीगल कुत्तों का “नियामक व्यवस्था का पूर्ण रूप से सावधानीपूर्वक पालन करते हुए” उचित पुनर्वास सुनिश्चित करे।

दिसंबर 2025 में, संयुक्त राज्य अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने पालामूर को एक सार्वजनिक चेतावनी पत्र जारी किया, जिसमें अच्छी प्रयोगशाला कार्यप्रणाली (Good Laboratory Practice) नियमों के “गंभीर उल्लंघनों” और निगरानी में “प्रणालीगत विफलताओं” का उल्लेख किया गया। इन कमियों के कारण इस सुविधा में तैयार किए गए सुरक्षा संबंधी आंकड़ों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। FDA ने पशु कल्याण से संबंधित गंभीर चिंताओं का भी उल्लेख किया, जो PETA इंडिया द्वारा व्हिसलब्लोअर्स के माध्यम से उठाई गई शिकायतों से मेल खाती हैं।

PETA इंडिया की साइंटिस्ट एंड रिसर्च पॉलिसी एडवाइज़र डॉ. अंजना अग्रवाल कहती हैं।  “सरकार द्वारा नियुक्त निरीक्षण समिति की कठोर रिपोर्ट में भयावह दुर्व्यवहार का दस्तावेजीकरण किए जाने और न्यायालय द्वारा कार्रवाई के आदेश दिए जाने के बावजूद, पालामूर बायोसाइंसेज़ में पशु अब भी दयनीय पिंजरों में पीड़ा सह रहे हैं, जिनमें बीगल और अन्य ऐसे पशु भी शामिल हैं जो पुनर्वास के लिए पात्र हैं. PETA इंडिया को उम्मीद है कि न्यायालय इन पशुओं के पुनर्वास के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश देगा, ताकि उन्हें अब स्नेहपूर्ण घरों और अभयारण्य जैसी सुरक्षित जगहों पर रखा जा सके। इससे सरकार द्वारा नियुक्त निरीक्षकों की उस सिफारिश को भी लागू किया जा सकेगा कि इस सुविधा में रखे गए सभी पशुओं को वहां से हटाया जाए और पशुओं के साथ क्रूरता के लिए इस सुविधा को कानून के अनुसार पूरी तरह जवाबदेह ठहराया जाए।”

PETA इंडिया जो इस सिद्धांत के तहत काम करता है कि “पशु हमारे प्रयोग करने या किसी अन्य तरीके से उनके साथ दुर्व्यवहार करने के लिए नहीं हैं”, प्रजातिवाद (speciesism) का विरोध करता है, जो मनुष्यों को अन्य प्रजातियों से श्रेष्ठ मानने वाली एक भेदभावपूर्ण विचारधारा है। PETA इंडिया की जांच समाचार एकत्रीकरण और रिपोर्टिंग के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया PETAIndia.com पर जाएँ या X, Facebook या Instagram पर PETA इंडिया को फॉलो करें।

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