PETA इंडिया ने मेरठ के परिवार को अपने घायल पशु को काम से मुक्त कर सैंक्चुरी भेजने के बदले ई-रिक्शा सौंपा गया।
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08 October 2025
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मेरठ – बुधवार को People for the Ethical Treatment of Animals India (PETA इंडिया) ने राजपुरा ब्लॉक के मसूरी गांव निवासी प्रदीप (पुत्र श्री ममचंद) को पूर्व ग्राम प्रधान श्री योगेश प्रधान जी के मौजूदगी में एक कार्यक्रम में बैट्री से चलने वाला ई-रिक्शा सौंपा। यह ई-रिक्शा उस पशु (खच्चर) के बदले दिया गया है, जिसका उपयोग प्रदीप ईंटें और अन्य सामान ढोने के लिए करते थे। PETA इंडिया द्वारा दिया गया यह बैट्री रिक्शा प्रदीप और उनके परिवार को एक स्थायी आजीविका कमाने में मदद करेगा और इस क्षेत्र में मशीनीकरण को बढ़ावा देगा जो पाशुओं से करवाए जाने वाले श्रम की तुलना में एक अधिक दयालु, कुशल, लाभदायक और आधुनिक विकल्प है।
PETA इंडिया की एक वालंटियर ने जब एक ईंट भट्ठे पर खच्चर की खराब हालत देखी, तो उन्होंने प्रदीप जी को समझाया और इस बात पर सहमत कर लिया कि वह इस खच्चर काम से मुक्त कर एक सेंक्चुरी में भेज दे जहां उसका इलाज और देखभाल हो सके। इस खच्चर का नाम छबीली है। यहाँ से ले जाने के बाद छबीली का इलाज कराया गया और अब वह अन्य घोड़ों और पशुओं के साथ सैंक्चुरी में आराम की जिंदगी गुजार रही है। इसके बदले में, PETA इंडिया ने प्रदीप जी के लिए एक ई-रिक्शा की व्यवस्था की, ताकि वह अपनी आजीविका जारी रख सकें।
समारोह के रिक्शा प्रदान करने की तस्वीरें और वीडियो मांगे जाने पर उपलब्ध करआए जाएंगे।
“PETA इंडिया में मशीनीकरण परियोजनाओं के वरिष्ठ प्रबंधक महेश त्यागी ने कहा – “ई-रिक्शा मिलने से थके हुए और पीड़ित घोड़ों, खच्चरों, बैलों और अन्य पाशुओं को भारी बोझ खींचने से राहत मिलती हैं, और ये पाशुओं की तुलना में कहीं अधिक भरोसेमंद और कारगर भी हैं। PETA इंडिया को प्रदीप और उनके परिवार की मदद करके बहुत खुशी महसूस हो रही है। अब ई-रिक्शा के ज़रिए प्रदीप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकेंगे।“
PETA इंडिया बैल, गधे, टट्टू और घोड़े जैसे पशुओं की रक्षा के लिए काम करता है, जिन्हें अक्सर अत्याचार सहना पड़ता है और जबरन भारी सामान खींचवाया जाता है। साथ ही, PETA इंडिया समुदाय के समग्र कल्याण को बेहतर बनाने के लिए परिवारों को मशीनीकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। अक्सर घोड़े और बैल जैसे पशुओं से तब भी काम लिया जाता है जब वे बीमार या घायल होते हैं। कई बार, पैसों की मजबूरी में मालिक उन्हें जबरन चलाने के लिए चाबुक, नाक में चुभने वाली रस्सी और कांटेदार लगाम जैसे दर्दनाक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।
इन पशुओं को ठीक पोषण, पर्याप्त पानी और मौसम से बचाव की सुविधा भी नहीं दी जाती। आमतौर पर उन्हें तब तक काम में झोंक दिया जाता है जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए। साथ ही, ज़ख्म, फोड़े, मांसपेशियों और जोड़ों की बीमारी, कैंसर, अंधापन और जुए के घाव जैसी तकलीफ़देह समस्याओं के लिए किसी तरह का इलाज नहीं कराया जाता।
PETA इंडिया ने 2018 में दिल्ली में अपना मैकेनाइज़ेशन प्रोजेक्ट शुरू किया था, जिसे Giving Economy Changemakers Award से सम्मानित किया जा चुका है। तब से अब तक, दिल्ली क्षेत्र में 150 से अधिक घोड़े, खच्चर और बैलों को भारी बोझ खींचने से बचाया है और उनकी जगह बैट्री से चलने वाले ई-रिक्शा उपलब्ध कराए हैं। PETA इंडिया यह सुनिश्चित करता है कि बचाए गए पाशुओं को सुरक्षित सेंक्चुरी में पुनर्वास मिले, और साथ ही इस प्रोजेक्ट से लाभ पाने वाले परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो। मेरठ में, PETA इंडिया एक स्वास्थ्य शिविर लगाने की योजना बना रहा है, ताकि पाशुओं को कुछ राहत मिल सके, पशु मालिकों को बेहतर देखभाल के तरीके बताए जा सकें, और उनकी ज़रूरतों का आकलन किया जा सके।
हमारा शोषण सहने के लिए नहीं हैं”, प्रजातिवाद (speciesism) का विरोध करता है, जो कि इंसानों के स्वयं को सर्वोपरि मानकर अन्य प्रजातियों का शोषण करने वाली सोच है। अधिक जानकारी के लिए कृपया PETAIndia.com पर जाएं या PETA इंडिया को X, Facebook, और Instagram. पर फॉलो करें।
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