PETA इंडिया पूछता है – “क्या गलगोटियास विश्वविद्यालय सर्कसों में पशुओं की जगह लेने में मदद के लिए रोबो कुत्ता ‘ओरियन’ दान करेगा?”
PETA इंडिया ने गलगोटियास विश्वविद्यालय से अनुरोध किया है कि वह हाल ही में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रदर्शित विवादास्पद रोबोट-कुत्ते ‘ओरियन’ को दान करे, ताकि सर्कसों में उपयोग किए जा रहे वास्तविक कुत्तों को बदलकर उनका पुनर्वास किया जा सके।
गलगोटियास विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सुनील गलगोटिया को लिखे पत्र में PETA इंडिया की वाइस प्रेसीडेंट ऑफ पॉलिसी खुशबू गुप्ता ने लिखा है,
“PETA इंडिया अनुरोध करता है कि गलगोटियास विश्वविद्यालय ‘ओरियन’ को PETA इंडिया के माध्यम से किसी सर्कस को दान करने पर विचार करे, ताकि इसे उन सर्कस प्रदर्शनों में उपयोग किया जा सके जहाँ वास्तविक कुत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद हम उन कुत्तों को प्यार करने वाले परिवारों के पास या किसी अभयारण्य में पुनर्वासित कर सकते हैं। इस दान के माध्यम से विश्वविद्यालय यह भी दिखा सकता है कि पशुओं की पीड़ा को समाप्त करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग कैसे किया जा सकता है… ‘ओरियन’ का दान यह दर्शाएगा कि गलगोटियास विश्वविद्यालय पशु कल्याण और प्रौद्योगिकी के सकारात्मक उपयोग के प्रति प्रतिबद्ध है। आपके छात्र भी इसमें सीधे भूमिका निभा सकते हैं, जैसे सर्कस कलाकारों को इस तकनीक का उपयोग करने का प्रशिक्षण देना और उन्हें मानवीय तथा तकनीक-आधारित विकल्पों की ओर सहज रूप से स्थानांतरित होने में सहयोग देना।”
कुत्तों, घोड़ों, ऊँटों, बकरियों और पक्षियों जैसी अनेक प्रजातियों को आज भी सर्कसों में कष्ट सहना पड़ता है। उनसे भ्रमित करने वाले करतब करवाए जाते हैं और उन्हें हिंसा, लगातार यात्रा, तथा उपयोग में न होने पर पिंजरों में बंद रखने या जंजीरों से बाँधने जैसी क्रूर परिस्थितियों में तनावपूर्ण जीवन जीने के लिए मजबूर किया जाता है। कई दशकों से दस्तावेज़ किए गए साक्ष्य बताते हैं कि सर्कसों में उपयोग किए जाने वाले पशुओं को हथियारों से चुभोया जाता है, कोड़ों से मारा जाता है और उन्हें छोटे, गंदे पिंजरों में रखा जाता है या लंबे समय तक बाँधकर रखा जाता है। वहीं पक्षियों के पंखों को काट-छांट दिया जाता है ताकि वे उड़कर भाग न सकें। सर्कसों में पशु इन क्रूर परिस्थितियों के कारण लगातार तनाव, थकान, चोटों और मानसिक आघात का सामना करते हैं।
जनता की भावना स्पष्ट रूप से सर्कसों में पशुओं के उपयोग को समाप्त करने के पक्ष में है। 1,93,930 से अधिक लोगों, जिनमें स्कूली बच्चे, प्रसिद्ध हस्तियाँ और 100 से अधिक पशु चिकित्सक शामिल हैं, ने सर्कसों में पशुओं के उपयोग को बंद करने की अपील की है। ग्रीस, बोस्निया-हर्जेगोविना, साइप्रस, माल्टा, स्लोवेनिया, ग्वाटेमाला और होंडुरास जैसे देश पहले ही सर्कसों में पशुओं के उपयोग पर प्रतिबंध लगा चुके हैं, और इटली भी ऐसी ही नीति लागू करने की दिशा में काम कर रहा है।
दो नियामक संस्थाओं—भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने भी यह स्वीकार किया है कि पशु सर्कस स्वभाव से ही क्रूर होते हैं और भारत में सर्कसों में पशुओं के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। PETA इंडिया ने सर्कसों में पशुओं के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसमें केंद्र सरकार से प्रदर्शन करने वाले पशु (पंजीकरण) (संशोधन) नियम, 2018 की अधिसूचना जारी करने का अनुरोध किया गया है।
PETA इंडिया का कहना है कि जैसे-जैसे भारत वैश्विक प्रौद्योगिकी नेता बनने की अपनी दृष्टि की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे प्रौद्योगिकी का उपयोग करके पशुओं के जीवन को बेहतर बनाने और साथ ही आजीविका को सुरक्षित रखने का अवसर भी मौजूद है। संगठन ने रैम्बो और जेमिनी जैसे सर्कसों को यांत्रिक पशुओं को अपनाने के उनके प्रगतिशील निर्णय के लिए सम्मानित भी किया है, जिससे दर्शकों का मनोरंजन करते हुए पशुओं की पीड़ा को नवाचार से बदला जा सके।
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