जीत: PETA इंडिया की शिकायत के बाद लुधियाना में तीन अवैध बैलगाड़ी दौड़ रद्द

Posted on by Shreya Manocha

लुधियाना जिले में बैलगाड़ी दौड़ की खबरें सामने आने के बाद, PETA इंडिया ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीन प्रस्तावित अवैध आयोजनों को सफलतापूर्वक रुकवाया। ये दौड़ लुधियाना के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित की जानी थीं — साहनेवाल में 24 मार्च, समराला में 25 मार्च, और जगराओं में 26 मार्च को। जैसे ही इन आयोजनों की सूचना मिली, PETA इंडिया ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सतर्क किया, और उनके त्वरित हस्तक्षेप से इन क्रूर आयोजनों को रोका जा सका — जिससे अनेक पशुओं को अनावश्यक पीड़ा से बचाया गया।

 

PETA इंडिया के अनुरोध पर, साहनेवाल पुलिस स्टेशन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 168 के अंतर्गत आरोपी उपिंदर सिंह उर्फ विक्की गुज्जराल को नोटिस जारी किया, जिन्होंने इन अवैध बैलगाड़ी दौड़ों का आयोजन किया था। यह कदम इन गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए उठाया गया।

बैलगाड़ी दौड़ पशुओं के लिए अत्यंत पीड़ादायक होती हैं। इन प्रतियोगिताओं में थके हुए बैलों को तब तक दौड़ाया जाता है जब तक वे गिर न जाएं, और उन्हें चलाने के लिए उन पर डंडों व अन्य हथियारों से वार किया जाता है, जिससे उन्हें गंभीर शारीरिक चोटें और मानसिक आघात होता है। पहले ही कठिन परिश्रम करने वाले इन पशुओं को फिर से इस तरह की मारपीट और हिंसात्मक दौड़ में झोंकना न केवल निंदनीय है, बल्कि कानून के विरुद्ध भी है। PETA इंडिया श्री एस. देव सिंह (अपर पुलिस उपायुक्त, लुधियाना सिटी), श्री अमृतपाल सिंह (पुलिस उपायुक्त, खन्ना), श्री वरिंदर सिंह खोसा (उप पुलिस अधीक्षक, डाखा), श्री जगदेव सिंह (स्टेशन हाउस ऑफिसर, साहनेवाल), श्री अमृतपाल सिंह (स्टेशन हाउस ऑफिसर, डाखा), और डॉ. रवनीत कौर (पशु चिकित्सा अधिकारी, तलवंडी कलां, लुधियाना ग्रामीण) को उनकी संवेदनशीलता और पशु-संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद देता है।

22 मार्च 2025 को, PETA इंडिया ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सहयोग से लुधियाना के अलमगीर साहिब गांव में प्रस्तावित एक और अवैध बैलगाड़ी दौड़ को भी रोका था।

 

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नवंबर 2024 से, PETA इंडिया पंजाब के विभिन्न ज़िलों में अवैध पशु दौड़ों को लेकर गंभीर चिंता जताता आ रहा है। पंजाब पुलिस और ज़िला प्रशासन के सहयोग से संगठन अब तक 50 से अधिक ग्रेहाउंड दौड़ों को रुकवा चुका है। पंजाब के पुलिस महानिदेशक ने भी PETA इंडिया के प्रयासों की सराहना करते हुए ट्वीट किया था कि “पशु पीड़ा से मुक्त जीवन के अधिकारी हैं और उनके साथ दया, करुणा और सम्मान से व्यवहार किया जाना चाहिए।”

PETA इंडिया ने अपनी शिकायत में बताया कि दिसंबर 2020 में पंजाब के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में भारतीय जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड (AWBI) ने यह राय दी थी कि लगभग सभी पशु दौड़ें पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत अवैध मानी जाती हैं और ऐसे आयोजनों को गैरकानूनी घोषित किया जाना चाहिए। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया था कि इस तरह की गतिविधियाँ अदालत की अवमानना के दायरे में आती हैं और राज्य सरकारों को ऐसी किसी भी अनुमति या निर्देश को वापस लेना चाहिए, ताकि कानून का पालन सुनिश्चित किया जा सके। इसके अतिरिक्त, इस तरह की दौड़ें भारतीय न्याय संहिता, 2023 और PCA अधिनियम, 1960 के कई प्रावधानों का उल्लंघन करती हैं, जो पशुओं को अनावश्यक पीड़ा पहुँचाने पर रोक लगाते हैं।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि PCA अधिनियम, 1960 विशेष रूप से किसी पशु को दूसरे पशु से लड़ाने या उकसाने को आपराधिक कृत्य मानता है। 7 मई 2014 को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय Animal Welfare Board of India बनाम ए. नागराजा एवं अन्य (सिविल अपील संख्या 5387/2014) में स्पष्ट किया गया था कि पशु दौड़ें भी पशु-लड़ाई जैसी हिंसक गतिविधियों की श्रेणी में आती हैं, क्योंकि इनसे पशुओं को जबरन प्रतिस्पर्धी और पीड़ादायक हालात में डाला जाता है।

पशु क्रूरता के खिलाफ़ दंड प्रावधान