बड़ी जीत: PETA इंडिया की कार्रवाई से लुधियाना में अवैध बैलगाड़ी दौड़ रद्द
22 मार्च को पंजाब के लुधियाना स्थित आलमगीर साहिब गांव में एक प्रस्तावित अवैध बैलगाड़ी दौड़ को रोकने के लिए PETA इंडिया ने सफल कार्रवाई की। संगठन को इस अवैध आयोजन की सूचना मिलने के बाद, उसने तुरंत लुधियाना के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सतर्क किया। पुलिस के हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप यह दौड़ रद्द कर दी गई, जिससे पशु क्रूरता की एक और घटना रोकी जा सकी।
नवंबर 2024 से, PETA इंडिया पंजाब के विभिन्न जिलों में होने वाली अवैध पशु दौड़ों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त कर रहा है और अब तक पंजाब पुलिस और जिला प्रशासन के सहयोग से 50 से अधिक ग्रेहाउंड दौड़ों को सफलतापूर्वक रुकवाने में कामयाब रहा है। पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने भी एक समर्थन भरे ट्वीट में PETA इंडिया के प्रयासों की सराहना की, यह बताते हुए कि पशु भी एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन के हकदार हैं और उनके साथ दयालुता, करुणा और सम्मान से पेश आना चाहिए।
Animals give us unconditional love and ask for so little in return. As protectors of all living beings, we are committed to ensuring their safety and dignity.
Let’s treat our pets and stray animals with kindness and compassion—they, too, deserve a life free from harm. Together,… https://t.co/pMrYqhbLgb
— DGP Punjab Police (@DGPPunjabPolice) December 27, 2024
PETA इंडिया ने अपनी शिकायत में बताया कि दिसंबर 2020 में पंजाब के मुख्य सचिव को भेजे गए एक पत्र में, जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड (AWBI) ने स्पष्ट किया था कि लगभग सभी प्रकार की पशु दौड़ें क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA Act), 1960 के तहत प्रतिबंधित हैं और इस तरह के आयोजनों को अवैध घोषित किया गया है। पत्र में यह चेतावनी दी गई थी कि ऐसी दौड़ें आयोजित करना अदालत की अवमानना के समान है और कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए किसी भी प्रकार की अनुमति या निर्देश को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। इसके अलावा, ये दौड़ भारतीय न्याय संहिता, 2023, और PCA अधिनियम, 1960 की कई धाराओं का उल्लंघन करती हैं, जो पशुओं पर अनावश्यक पीड़ा पहुंचाने को प्रतिबंधित करती हैं।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA Act), 1960 विशेष रूप से पशुओं को एक-दूसरे से लड़ाने के लिए उकसाने को अपराध मानता है। 7 मई 2014 को दिए गए ऐतिहासिक फैसले Animal Welfare Board of India बनाम A. Nagaraja & Ors (Civil Appeal No. 5387/2014) में, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पशु दौड़ जैसी गतिविधियाँ भी पशु लड़ाई के दायरे में आती हैं, क्योंकि इनमें पशुओं को जबरन प्रतिस्पर्धा और हानिकारक परिस्थितियों में धकेला जाता है, जो लड़ाई के लिए उकसाने के समान है।
