शाबाश! सैंपैरेल्स ग्रीनलैंड्स ने पेशेवर स्तर की लेदर-फ्री क्रिकेट बॉल के लिए PETA इंडिया अवॉर्ड जीता

Posted on by Surjeet Singh

क्रिकेट उपकरण बनाने वाले प्रमुख ब्रांड सैंपैरेल्स ग्रीनलैंड्स (SG) को उनके शानदार, पशु-चंद रहित पेशेवर स्तर की क्रिकेट बॉल बनाने के लिए PETA इंडिया की ओर से इनोवेशन इन बिज़नेस अवॉर्ड मिलने जा रहा है। SG के सीईओ पारस आनंद ने इस बॉल को पेश किया, जिसे सुपर 50 (Super 50) नाम दिया गया है। उन्होंने बताया कि यह पारंपरिक बॉल की तुलना में अधिक समय तक चलेगी और प्रदर्शन में अधिक स्थिरता प्रदान करेगी। यह बॉल SG की वेबसाइट पर खरीदने के लिए उपलब्ध है।

“सुपर 50 क्रिकेट में नई सोच का प्रतीक है जिसमे तकनीक, प्रदर्शन और सहानुभूति एक साथ दिखाई देती है। हम PETA इंडिया का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने इस प्रयास को पहचाना और खेल में जिम्मेदार नई तकनीक को प्रोत्साहित किया
– पारस आनंदCEO, सैंपैरेल्स ग्रीनलैंड्स

परंपरागत रूप से, क्रिकेट बॉल के लिए गाय के चमड़े का उपयोग किया जाता रहा है। एक गाय की खाल से से केवल तीन दर्जन बॉल ही बनाई जा सकती हैं। गायें बेहद संवेदनशील माताएँ होती हैं, जो मजबूत सामाजिक संबंध बनाती हैं और अपने झुंड के अन्य सदस्यों के प्रति सहानुभूति रखती हैं। इनकी यादाश्त बहुत अच्छी होती है और ये भारतीय शहरों के कठिन रास्तों की पहचान रखती हैं। चमड़े के लिए उपयोग किए जाने पर, इन पशुओं को अक्सर इतनी बड़ी संख्या में वाहनों में ठूंस दिया जाता है कि उनकी हड्डियाँ टूट जाती हैं। जो जीवित बच जाते हैं, उन्हें कत्लखानों में अन्य पशुओं के सामने गले काट दिए जाते हैं और उन्हें टुकड़ों में काटकर उनका चमड़ा उतारा जाता है और इस प्रक्रिया के दौरान वह अक्सर होश में होते हैं व दर्द महसूस करते हैं। इसी बीच, चमड़ा बनाने की फैक्ट्रियों से निकलने वाला अपशिष्ट नदियों और जल धाराओं को प्रदूषित करता है, जिससे वहाँ की समस्त जीवन धारा प्रभावित होती है। चमड़ा बनाने की फैक्ट्रियों में काम करने वाले मनुष्यों में कैंसर, श्वसन संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा भी जुड़ा हुआ पाया गया है।

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