PETA इंडिया की शिकायत पर फरीदाबाद वन प्रभाग और पुलिस ने प्रदर्शन के लिए प्रताड़ित भारतीय प्रजाति के बंदरों को बचाया

Posted on by Surjeet Singh

एक जागरूक नागरिक द्वारा भारतीय प्रजाति के दो छोटे बंदर (रीसस मकाक) को अवैध रूप से कैद में रखे जाने, क्रूरता से जंजीरों में बांधने और फरीदाबाद में उनसे जबरन प्रदर्शन करवाने संबंधी शिकायत के बाद, जो कई पशु संरक्षण कानूनों का उल्लंघन था, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) ने फरीदाबाद पुलिस और फरीदाबाद वन प्रभाग के साथ मिलकर इन बंदरों का बचाव कराया। इन बंदरों को रस्सी से बांधकर सड़क पर प्रदर्शन और भीख मंगवाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे वे स्पष्ट रूप से तनावग्रस्त दिखाई दे रहे थे। चिकित्सा जांच में स्वस्थ घोषित किए जाने के बाद, उन्हें वापस उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।

PETA इंडिया फरीदाबाद वन प्रभाग और फरीदाबाद पुलिस, विशेष रूप से डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर श्री राम कुमार जांगड़ा और धौज पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर श्री दर्पण कुमार की आभारी है, जिन्होंने अवैध रूप से कैद में रखे गए बंदरों को बचाने और मुक्त करने के लिए तत्काल कार्रवाई की। हम सभी नागरिकों से आग्रह करते हैं कि वे सतर्क रहें और वन्यजीवों या अन्य पशुओं के प्रति क्रूरता की किसी भी घटना की सूचना वन विभाग या पुलिस को दें।

भारत में बंदरों का प्रदर्शन के लिए उपयोग करना अवैध है। वर्ष 1998 में, केंद्र सरकार ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 22 के तहत जारी अधिसूचना के माध्यम से बंदरों के प्रदर्शन हेतु उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था।

भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) ने अपने पत्र संख्या F. No. WL-8/91/2024-WL, दिनांक 09 सितंबर 2024 में स्पष्ट किया कि रीसस मकाक (भारतीय प्रजाति के बंदर) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (WPA), 1972 की अनुसूची IV के परिशिष्ट II के अंतर्गत संरक्षित हैं। साथ ही, इस अधिनियम की धारा 49M के अनुसार, अनुसूची IV में सूचीबद्ध किसी भी प्रजाति के जीवित पशु को अपने पास रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए ऐसे पशु का विवरण मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (CWLW) को देना अनिवार्य है।

धारा 49M के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए, MOEFCC ने 28 फरवरी 2024 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से लिविंग एनिमल स्पीशीज़ (रिपोर्टिंग एंड रजिस्ट्रेशन) रूल्स, 2024 अधिसूचित किए। इन नियमों के अनुसार, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (WPA), 1972 की अनुसूची IV में सूचीबद्ध किसी भी प्रजाति के जीवित पशु को अपने पास रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए ऐसे पशु का विवरण मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (CWLW) को PARIVESH 2.0 पोर्टल के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से पंजीकरण हेतु आवेदन प्रस्तुत करे। यह कार्य राजपत्र अधिसूचना जारी होने की तिथि से छह माह के भीतर अथवा ऐसे पशु प्रजाति को अपने पास रखने के तीस दिनों के भीतर करना अनिवार्य है।

इस प्रकार, ‘परिवेश’ पोर्टल पर पंजीकरण के बिना भारतीय प्रजाति के बंदरों (रीसस मकाकों) को कैद में रखना एक दंडनीय अपराध है, जिसके लिए तीन वर्ष तक का कारावास, एक लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।

हिंदू धर्म में पूजनीय होने के अतिरिक्त, बंदर फलों को खाने के दौरान उनके बीज फैलाते हैं जो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनकी अनुपस्थिति जंगलों के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है।

पशुओं पर क्रूरता या उनसे संबंधित आपात स्थितियों की रिपोर्ट करने के लिए कृपया PETA इंडिया को 9820122602 पर कॉल करें।

यदि आप पशुओं के साथ क्रूरता होते हुए देखें तो क्या करें