उडुपी के भयावह पशु-संग्राहक के यहाँ की गई सातवीं तलाशी में मिला मृत बछड़ा; 17 और पशुओं को बचाया गया: PETA इंडिया ने किसी भी पशु को रखने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।

Posted on by Surjeet Singh

सालिग्रामा पट्टण पंचायत, पशुपालन विभाग (AHD) और उपायुक्त एवं जिला दंडाधिकारी (DC & DM) द्वारा जारी किए गए कई बंद करने के आदेशों को लागू करवाने के लिए PETA इंडिया के लगातार प्रयासों के बाद, सालिग्रामा पट्टण पंचायत ने PETA इंडिया की सहायता से 7 जुलाई को उडुपी के सालिग्रामा स्थित श्री बी. सुधींद्र ऐथल के कथित “एनिमल रेस्क्यू सेंटर” पर सातवीं छापेमारी की। इस नवीनतम कार्रवाई के साथ, PETA इंडिया की भागीदारी वाली सात छापेमारियों में इस केंद्र से बचाए गए पशुओं की कुल संख्या 350 से अधिक हो गई है।

इस कार्रवाई के दौरान, अधिकारियों को एक बछड़े का सड़ता हुआ शव मिला, जिसकी मृत्यु कथित रूप से उपेक्षा के कारण हुई थी। शव को तीन की चादर के नीचे छिपाकर रखा गया था और परिसर में पशुओं की हड्डियों के ढेर के पास फेंक दिया गया था, जो एक अस्थायी कब्रगाह जैसा प्रतीत हो रहा था। यह वहाँ रखे गए पशुओं की भयावह स्थिति को दर्शाता है, जहाँ कई पशुओं ने कथित दुर्व्यवहार और उपेक्षा के कारण दम तोड़ दिया। इसी कार्रवाई के दौरान 17 जीवित लेकिन बीमार और रोगग्रस्त पशुओं को भी बचाया गया, जिनमें चार वयस्क कुत्ते, कुत्ते के छ बच्चे, छह बिल्ली के बच्चे और एक गिनी पिग शामिल हैं।

बचाए गए पशु गंदगी से भरी, अत्यधिक भीड़भाड़ वाली और अमानवीय परिस्थितियों में बंद पाए गए, जहाँ उन्हें पर्याप्त भोजन, पानी या पशु चिकित्सा देखभाल उपलब्ध नहीं थी। वे भारी मात्रा में किलनी (टिक) के संक्रमण, बिना उपचार के घावों से पीड़ित पाए गए और उनमें अत्यधिक संक्रामक तथा जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाली बीमारियों, जैसे कैनाइन डिस्टेंपर (CD) और पार्वोवायरस (पार्वो), के लक्षण दिखाई दे रहे थे। यह स्थिति इस केंद्र में पशुओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार और उचित देखभाल के पूरी तरह अभाव को उजागर करती है।

PETA इंडिया ने कोटा पुलिस स्टेशन में एक नई शिकायत भी दर्ज कराई है, जिसमें श्री ऐथल के खिलाफ कर्नाटक पशु वध निषेध और मवेशी संरक्षण अधिनियम, 2020, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और पशु क्रूरता निवारण (PCA) अधिनियम, 1960 के तहत एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया गया है।

कई प्राधिकरणों द्वारा बार-बार जारी किए गए बंद करने के आदेशों और पिछले वर्ष उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बावजूद, श्री ऐथल ने अत्यधिक भीड़भाड़ वाली, अस्वच्छ और असुरक्षित परिस्थितियों में अवैध रूप से पशुओं को रखना जारी रखा है, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अत्यधिक पीड़ा सहनी पड़ी, कई पशुओं की मृत्यु हुई और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा उत्पन्न हुआ। कानून और पशुओं के कल्याण की लगातार अनदेखी करना यह दर्शाता है कि वे जानबूझकर और लगातार नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, जिसके लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।

इस पशु-संग्राहक से बचाए गए कुल 350 से अधिक पशु गंभीर रूप से निर्जलित और कमजोर पाए गए। वे वायरल संक्रमण, आंखों की समस्याओं, चोटों, परजीवी संक्रमणों से पीड़ित थे और अपने ही मल-मूत्र से ढके हुए थे। कई पशु इतने कमजोर थे कि उनकी हड्डियाँ दिखाई दे रही थीं और वे कैनाइन डिस्टेंपर, पार्वोवायरस और फेलाइन हर्पीसवायरस जैसी घातक संक्रामक बीमारियों से पीड़ित थे। बचाए गए पशुओं में कुत्ते, बिल्लियाँ, हैम्स्टर, लव बर्ड्स और वन्यजीव जैसे कोबरा, सिवेट कैट, ब्लैक काइट, इंडियन पैराकीट, बोनट मकाक तथा लुप्तप्राय प्रजातियाँ शामिल थीं।

इस केंद्र का संचालन करने वाले श्री ऐथल का वन्यजीवों और अन्य पशुओं को बार-बार एकत्र करने और बेहद अस्वच्छ तथा अपर्याप्त परिस्थितियों में रखने का एक लंबा रिकॉर्ड रहा है, जबकि उन्हें कई बार चेतावनियाँ, आधिकारिक नोटिस और आदेश जारी किए जा चुके हैं। ऐसा भी प्रतीत होता है कि वे वन्यजीव व्यापार में शामिल थे तथा आम लोगों को बेचने के लिए पशुओं का प्रजनन भी कराते थे।

8 जनवरी 2025 को कुंदापुर वन प्रभाग द्वारा एक छापेमारी की गई थी, जिसके बाद कर्नाटक के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) और मुख्य वन्यजीव वार्डन के निर्देशों के आधार पर प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट (POR) दर्ज की गई। यह कार्रवाई PETA इंडिया की उस शिकायत के बाद की गई थी, जिसमें श्री ऐथल द्वारा संरक्षित देशी वन्यजीवों को अवैध रूप से रखने और बेचने का आरोप लगाया गया था। 8 जनवरी की छापेमारी के दौरान उपरोक्त प्रजातियाँ, जो वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I और II के तहत संरक्षित हैं, उनके अवैध कब्जे में पाई गईं और उन्हें अत्यंत दयनीय परिस्थितियों में रखा गया था। जनवरी में POR दर्ज होने के बावजूद, श्री ऐथल 01 मार्च 2025 को एक कोबरा और 03 मई 2025 को एक एशियन कोयल तथा उसके दो बच्चों को अवैध रूप से रखते हुए पाए गए। वन्यजीवों को अवैध रूप से रखने से संबंधित दोनों मामलों में संबंधित समय पर कुंदापुर वन प्रभाग को शिकायतें दी गई थीं। इन शिकायतों पर अभी तक कार्रवाई नहीं की गई है और POR दर्ज होना लंबित है।

उडुपी के पुलिस अधीक्षक (SP) श्री हरिराम शंकर, IPS के निर्देशों के आधार पर, कोटा पुलिस स्टेशन में 7 अक्टूबर 2025 को श्री ऐथल के खिलाफ एफआईआर (संख्या 0177/2025) दर्ज की गई थी। यह एफआईआर पशुओं को बार-बार इकट्ठा कर रखने और उनके साथ क्रूरता करने के संबंध में पशु क्रूरता निवारण (PCA) अधिनियम, 1960 के उल्लंघन के तहत दर्ज की गई थी। इस दौरान सभी चलायमान पिंजरे जब्त कर लिए गए थे।

‘पालतू’ पशुओं की देखभाल, प्रजनन या बिक्री से जुड़ी सभी सुविधाओं का राज्य पशु कल्याण बोर्ड में पंजीकृत होना आवश्यक है। यह अनिवार्यता पशु क्रूरता निवारण (PCA) अधिनियम, 1960 के तहत बनाए गए पशु क्रूरता निवारण (कुत्ता प्रजनन और विपणन) नियम, 2017 तथा पशु क्रूरता निवारण (पेट शॉप) नियम, 2018 के नियम 3 के तहत निर्धारित है।

26 मई 2020 को कर्नाटक सरकार के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के आयुक्त द्वारा जारी आदेश में राज्य में अपंजीकृत कुत्ता प्रजनन केंद्रों और पेट शॉप के संचालन पर प्रतिबंध लगाया गया था। यह आदेश सभी जिला कलेक्टरों और जिला SPCAs के अध्यक्षों को संबोधित था, जिसमें निर्देश दिया गया था कि कर्नाटक पशु कल्याण बोर्ड (KAWB) में पंजीकृत नहीं सभी अपंजीकृत पेट शॉप और कुत्ता प्रजनन प्रतिष्ठानों को पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण (कुत्ता प्रजनन और विपणन) नियम, 2017 तथा पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण (पेट शॉप) नियम, 2018 के अनुसार संचालित होने से रोका जाए।

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