पंजाब पशुपालन विभाग ने, PETA इंडिया के सहयोग से, पंजाब भर में शादियों और ईंट-भट्टों में घोड़ों को नियंत्रित करने के लिए उनके मुँह में पहनाई जाने वाली सैकड़ों काँटेदार लगामें जब्त की
पंजाब पशुपालन विभाग ने ,पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) के साथ संयुक्त जागरूकता एवं प्रवर्तन अभियान के तहत शहर भर में हाल ही में की गई छापेमारी में शादियों, सवारी और ईंट-भट्टों में उपयोग किए जाने वाले घोड़ों को नियंत्रित करने के लिए उनकें मुँह में पहनाई जाने वाले 200 से अधिक कांटेदार लगामें (या spiked bit) जब्त की हैं। इन यातनादायक लगामों को सरकारी पशुचिकित्सा पॉलीक्लिनिक, वेरका, अमृतसर में प्रदर्शित किया गया। PETA इंडिया को आशा है कि लगामों की यह प्रदर्शनी परिवारों को यह प्रेरित करने में मददगार होगी कि वह अपने घर परिवार की शादियों में पशुओं का इस्तेमाल ना करें। कांटेदार लगामें जिन्हें जानबूझकर पशुओं के मुंह को छलनी और घायल करने के लिए बनाया जाता है, पशु क्रूरता निवारण ड्राट एवं पैक नियम 1965 के नियम 8 का उल्लंघन है।
कांटेदार लगाम का उपयोग घोड़ों को दर्द देकर नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, जिससे उनके होंठ और जीभ लहूलुहान हो जाते हैं तथा उन्हें मानसिक आघात और जीवनभर की क्षति झेलनी पड़ती है। PETA इंडिया, विवाह सूत्र में बंधने वाले जोड़ों से आग्रह करता है कि वे घोड़ों का इस्तेमाल ना करें और अपने जीवन के इस शुभ दिन को ऐसा अवसर बनाएं जो सभी के लिए आनंदमय हो
PETA इंडिया ने घोड़ों पर कांटेदार लगामों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लागू कराने में पुलिस की सहायता के उद्देश्य से एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। यह अभियान विभिन्न राज्यों में प्रतिबंध लागू करने के सरकारी प्रयासों के सर्वेक्षण के परिणामों पर आधारित है। PETA इंडिया द्वारा संपर्क किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश, असम, बिहार, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और नागालैंड सहित कई अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भी इस प्रतिबंध को लागू करने के आदेश जारी किए। PETA इंडिया न केवल पुलिस और प्रशासन के साथ अवैध रूप से उपयोग किए जा रहे उपकरणों की खोज और जब्ती के लिए अभियान चला रहा है, बल्कि ऐसे कानून लाने की भी मांग कर रहा है जो इस खामी को बंद करें, जिसके कारण अब भी इन उपकरणों का निर्माण और बिक्री संभव है।
कांटेदार लगाम का लगातार उपयोग इस गलत धारणा से उत्पन्न होता है कि घोड़ों को नियंत्रण में रखने के लिए दर्दनाक उपकरणों की आवश्यकता होती है, जबकि वास्तव में ये उपकरण केवल गंभीर चोट और पीड़ा पहुँचाते हैं। PETA इंडिया अधिकारियों से आग्रह करता है कि वे पशुओं पर निर्भरता के बजाय मानवीय एवं मशीनीकृत विकल्पों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें।
