सामुदायिक कुत्तों एवं गौवंश से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर PETA इंडिया की बिंदुवार समीक्षा

Posted on by Surjeet Singh

19 मई 2026 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सामुदायिक कुत्तों और बेघर गौवंश के संबंध में विभिन्न निर्देश जारी किए। नीचे PETA इंडिया सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के प्रासंगिक अंश को पुनः प्रस्तुत करता है और प्रत्येक बिंदु पर PETA इंडिया का संक्षिप्त दृष्टिकोण भी प्रदान करता है। यह दृष्टिकोण PETA इंडिया के दो विज्ञान-आधारित Roadmaps- “भारत में सामुदायिक कुत्तों के मानवीय प्रबंधन के लिए Roadmap” तथा “समुदायिक गौवंश के मानवीय प्रबंधन के लिए Roadmap” पर आधारित है, जो सामुदायिक कुत्तों और गौवंश की आबादी से निपटने के लिए कानूनी, प्रमाण-आधारित और मानवीय समाधान पर जोर देते हैं, तथा उन तरीकों का विरोध करते हैं जो आजीवन कैद या अंधाधुंध हत्या के समान हैं।

न्यायालय का 19 मई 2026 का आदेश नीचे पुनः प्रस्तुत किया गया है (महत्व के लिए कुछ हिस्सों पर जोर दिया गया है), और प्रत्येक बिंदु पर PETA इंडिया का दृष्टिकोण प्रत्येक बिंदु के नीचे बोल्ड में दिया गया है।

उपरोक्त को देखते हुए, यह न्यायालय उपयुक्त समझता है कि निम्नलिखित निर्देश जारी किए जाएँ:

A. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया जाता है कि वे तुरंत प्रभाव से ठोस, समन्वित और समयबद्ध कदम उठाएँ ताकि Animal Birth Control ढांचे के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ और विस्तारित किया जा सके, जिसमें नसबंदी और टीकाकरण क्षमता का विस्तार, मौजूदा सुविधाओं को मजबूत करना तथा समस्या के पैमाने और तात्कालिकता के अनुरूप अतिरिक्त संस्थागत तंत्र का निर्माण शामिल है।

अच्छा सुझाव है! सर्वोच्च न्यायालय यह स्वीकार करता है कि कुत्तों की वर्तमान आबादी इसलिए है क्योंकि स्थानीय प्राधिकरण 2001 से लागू Animal Birth Control (ABC) Rules को प्रभावी रूप से लागू करने में विफल रहे हैं।

B. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक पूर्ण रूप से कार्यशील Animal Birth Control Centre स्थापित किया जाए, जो आवश्यक पशुचिकित्सा ढांचे, प्रशिक्षित कर्मियों, शल्य चिकित्सा सुविधाओं और सहायक लॉजिस्टिक्स से युक्त हो, ताकि नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रमों का व्यवस्थित, निरंतर और बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन संभव हो सके। ऐसे केंद्र समयबद्ध तरीके से कार्यशील बनाए जाएँ और स्थानीय सामुदायिक कुत्तों की आबादी को संबोधित करने हेतु पर्याप्त क्षमता के साथ संचालित हों, तथा प्रभावी और सतत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए उचित रिकॉर्ड-कीपिंग, निगरानी और समय-समय पर रिपोर्टिंग की व्यवस्था हो। इसके अलावा, प्रत्येक जिले की जनसंख्या घनत्व और भौगोलिक विस्तार को ध्यान में रखते हुए संबंधित राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के विभाग यह निर्णय लें कि जहाँ आवश्यक हो वहाँ Animal Birth Control Centres की संख्या बढ़ाई जाए ताकि प्रभावी कवरेज और क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

अच्छा सुझाव है !  हालांकि छोटे शहरों में नसबंदी सुनिश्चित करने के अन्य तरीके भी हैं। PETA इंडिया ने कानून के तहत मौजूदा ढांचे के अतिरिक्त यह सुझाव दिया है कि ABC क्षमता को छोटे स्तर के प्रयासों से भी बढ़ाया जा सकता है, जिन्हें Animal Welfare Board of India (AWBI) द्वारा प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इनमें शामिल हो सकते हैं लेकिन केवल इन्हीं तक सीमित नहीं ABC करने के इच्छुक निजी पशुचिकित्सा अस्पताल, पशुचिकित्सा क्लीनिकों के नेटवर्क का उपयोग करने वाले स्वयंसेवक, दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचने के लिए NGOs द्वारा अस्थायी नसबंदी शिविर, मोबाइल ABC यूनिट्स, तथा छोटे स्तर पर अपने खर्च पर नसबंदी करने के इच्छुक NGOs। इस कमी को पूरा करने के लिए AWBI को छोटे स्तर के प्रयासों को प्रोत्साहित करने हेतु दिशानिर्देश जारी करने चाहिए।

C. संबंधित राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के विभाग/प्राधिकरण यह सुनिश्चित करें कि इस न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन किया जाए तथा उन्हें बिना किसी देरी या कमी के अक्षरशः और भावार्थ दोनों रूप से लागू किया जाए, और Animal Welfare Board of India द्वारा जारी Standard Operating Procedures का भी कड़ाई से पालन किया जाए।

यह खराब सुझाव है !(आंशिक रूप से)। PETA इंडिया ने न्यायालय से आग्रह किया है कि AWBI के SOP के कार्यान्वयन पर रोक लगाई जाए, जिसमें बड़े पैमाने पर shelters की सिफारिश की गई है, जहाँ प्रत्येक कुत्ते के लिए केवल 20 वर्ग फुट स्थान दिया जाता है जो लगभग एक पारंपरिक चिता के आकार के बराबर है। इस तरह कुत्तों को पिंजरे में रखना क्रूरता को संस्थागत रूप देगा, ज़ूनोटिक और अन्य रोगों का खतरा बढ़ाएगा, Animal Birth Control Rules 2023 के अनुसार आवश्यक संसाधनों (नसबंदी और रेबीज़ टीकाकरण) से सार्वजनिक धन को हटाएगा, और अंततः स्वयं अपने भार के कारण विफल हो जाएगा।

D. संबंधित राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के विभाग/प्राधिकरण तथा भारत सरकार (उन सार्वजनिक क्षेत्रों के संदर्भ में जो उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं) यह निर्णय लें कि क्या इस न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों को अन्य उच्च भीड़भाड़ और सार्वजनिक उपयोग वाले स्थानों पर भी लागू किया जाए, जिनमें सार्वजनिक एकत्रीकरण और परिवहन स्थल शामिल हैं, ताकि आम जनता के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। यह निर्णय जमीनी वास्तविकताओं, सार्वजनिक सुरक्षा के जोखिम तथा ऐसे स्थानों की कार्यात्मक प्रकृति के सावधानीपूर्वक आकलन के बाद समयबद्ध और समन्वित तरीके से लागू किया जाए।

यह खराब सुझाव है ! यह निर्देश सामुदायिक कुत्तों के और अधिक सार्वजनिक स्थानों से हटाने और कैद करने का मार्ग खोलता है। भारत में अनुमानित 62 मिलियन मुक्त-घूमने वाले कुत्ते हैं, और इतनी बड़ी आबादी को कैद करने के लिए न तो पर्याप्त ढांचा है, न धन, न प्रशासनिक क्षमता ऐसा करना बड़े पैमाने पर पीड़ा और सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम पैदा करेगा।

E. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को व्यापक क्षमता-विकास उपाय करने होंगे, जिनमें कर्मियों का प्रशिक्षण, पशुचिकित्सा सेवाओं का विस्तार, टीकाकरण अभियानों को मजबूत करना तथा पर्याप्त शेल्टर का निर्माण शामिल है, और यह सभी संबंधित विभागों एवं एजेंसियों के समन्वय से किया जाएगा।

यह अच्छा सुझाव है ! (एक महत्वपूर्ण चेतावनी के साथ)। PETA इंडिया मानवीय पकड़, सुरक्षित सर्जरी और रेबीज़ नियंत्रण के सभी प्रयासों का समर्थन करता है। हालांकि “shelter facilities” को स्थायी जेल नहीं बनाया जाना चाहिए। shelters केवल अस्थायी रिकवरी/हॉस्पिटल सुविधाओं के रूप में कार्य करें जो ABC का समर्थन करें, न कि आजीवन कैद के रूप में सिवाय उन मामलों के जहाँ पशु को उम्र, स्थायी विकलांगता या बीमारी के कारण वापस सड़क पर छोड़ा नहीं जा सकता।

F. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों में एंटी-रेबीज़ वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी तथा कुत्तों के काटने के मामलों से निपटने हेतु प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करना होगा।

यह अच्छा सुझाव है ! PETA इंडिया सार्वजनिक सुरक्षा उपायों को मजबूत करने का समर्थन करता है।

G. NHAI संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय में राष्ट्रीय राजमार्गों और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर सामुदायिक गौवंश तथा अन्य पशुओं की उपस्थिति से निपटने हेतु एक व्यापक और समयबद्ध तंत्र तैयार करेगा और उसे लागू करेगा। इसमें सामुदायिक  गौवंश तथा अन्य पशुओं के सुरक्षित प्रबंधन और स्थानांतरण के लिए विशेष परिवहन वाहनों की तैनाती, उपयुक्त holding और shelter सुविधाओं का निर्माण या चिन्हांकन, तथा उनके सुरक्षित प्रबंधन और स्थानांतरण के लिए पशु कल्याण संगठनों, गौशालाओं और अन्य सक्षम एजेंसियों के साथ उपयुक्त व्यवस्थाएँ स्थापित करना शामिल होगा। NHAI यह भी सुनिश्चित करेगा कि एक प्रभावी निगरानी और समन्वय ढांचा स्थापित किया जाए ताकि इन मामलों में निरंतर पर्यवेक्षण तथा त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

यह खराब सुझाव है ! (जैसा प्रस्तुत किया गया है)। यह एक अव्यावहारिक “छिपाने” वाला दृष्टिकोण है जो सामुदायिक गौवंश के मूल कारण डेयरी उद्योग द्वारा उनके परित्याग को अनदेखा करता है। भारत में अनुमानित 5 मिलियन सामुदायिक गौवंश हैं (और डेयरी उद्योग द्वारा परित्याग के कारण यह संख्या बढ़ रही है)। इतनी बड़ी आबादी को कैद करने के लिए कोई ढांचा या संसाधन नहीं है, और ऐसा करने से भारी पीड़ा तथा व्यापक रोग फैलने का खतरा होगा। सामुदायिक गौवंश के लिए PETA इंडिया मजबूत दंड, अवैध डेयरियों को बंद करने, परित्यक्त गौवंश को डेयरियों से जोड़ने की ट्रैकिंग व्यवस्था, गौशालाओं का नियमन ताकि प्रजनन रोका जाए, तथा पौध-आधारित दूध उत्पादन को बढ़ावा देने वाली नीतियों की सिफारिश करता है ताकि डेयरी पर निर्भरता कम हो और अंततः गौवंश की संख्या घटे।

H. जिन क्षेत्रों में सामुदायिक कुत्तों की संख्या अत्यधिक हो गई है और जहाँ कुत्तों के काटने या आक्रामक हमलों की घटनाएँ बढ़ गई हैं, वहाँ संबंधित प्राधिकरण योग्य पशुचिकित्सा विशेषज्ञों के मूल्यांकन के बाद तथा Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960, Animal Birth Control Rules, 2023 और अन्य नियमों के अनुसार, सार्वजनिक सुरक्षा के लिए आवश्यक कानूनी उपाय कर सकते हैं, जिनमें रेबीज़ से ग्रस्त, असाध्य रूप से बीमार या स्पष्ट रूप से खतरनाक/आक्रामक कुत्तों का इच्छा मृत्यु शामिल हो सकता है।

यह खराब सुझाव है !   PETA इंडिया स्वीकार करता है कि रेबीज़ या असाध्य मामलों में कानूनी पशुचिकित्सा कार्रवाई आवश्यक हो सकती है, लेकिन “dangerous/aggressive” जैसी व्यापक श्रेणी के दुरुपयोग की संभावना है, जिसे मनमाने ढंग से स्वस्थ कुत्तों को हटाने या सामूहिक हत्या के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। PETA इंडिया स्पष्ट रूप से ABC के विकल्प के रूप में बड़े पैमाने पर कुत्तों की हत्या का विरोध करता है।

I. यह स्पष्ट किया जाता है कि नगर प्राधिकरणों, पंचायती राज संस्थाओं, स्थानीय निकायों तथा राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी, साथ ही सभी अन्य संस्थानों जैसे स्कूल, कॉलेज, अस्पताल आदि के प्रभारी, जिन्हें इस न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों के क्रियान्वयन का दायित्व सौंपा गया है, उन्हें अपने आधिकारिक कर्तव्यों के सद्भावनापूर्ण और ईमानदार निर्वहन में किए गए कार्यों तथा इस आदेश एवं इस कार्यवाही में पूर्व में पारित आदेशों के अनुपालन में की गई कार्रवाई के लिए उचित संरक्षण प्राप्त होगा। तदनुसार, ऐसे अधिकारियों या कर्मचारियों के विरुद्ध सामान्यतः कोई First Information Report, आपराधिक शिकायत या कोई coercive कार्यवाही प्रारंभ नहीं की जाएगी, बशर्ते कि उनके द्वारा की गई कार्रवाई इस न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन हेतु सद्भावना में की गई हो। अपवाद केवल उन परिस्थितियों में होगा जहाँ प्रथम दृष्टया यह पाया जाए कि कार्य दुर्भावनापूर्ण हैं, अधिकारों का गंभीर दुरुपयोग हुआ है, या कार्य पूरी तरह से इस न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों से बाहर जाकर किए गए हैं।  यदि आवश्यक हो, तो इस आदेश के अंतर्गत चल रहे continuing mandamus के संबंध में High Court ऐसे अधिकारियों या कर्मचारियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की मनमानी, निराधार या दुर्भावनापूर्ण कार्यवाहियों को रोकने हेतु उपयुक्त आदेश पारित करने के लिए स्वतंत्र होगा।

यह खराब सुझाव है ! कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, और यह निर्देश यह गलत धारणा देता है कि मनमानी FIR दर्ज हो रही हैं, जबकि वास्तविकता में कई बार स्थानीय निकाय ABC के स्थान पर एक साथ सैकड़ों कुत्तों को मार देते हैं।

आप कैसे मदद कर सकते हैं: PETA इंडिया के Roadmaps पढ़ें और अपने राज्य के पशुपालन विभाग तथा स्थानीय नगर निकाय अधिकारियों को इन सिफारिशों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें। कुत्तों के लिए राज्य-स्तरीय Roadmap यहाँ और गौवंश के लिए यहाँ उपलब्ध है। और महत्वपूर्ण रूप से, हमेशा शेल्टर या सड़क से जरूरतमंद कुत्तों को अपनाएँ, breeders और pet shops को अस्वीकार करें, तथा सामुदायिक पशुओं के लिए साफ पानी उपलब्ध कराएँ।

सामुदायिक कुत्तों और गौवंश की मदद करें!