पानीपत पुलिस ने होली के दौरान भैंसे को जबरन शराब पिलाए जाने के वायरल वीडियो पर, PETA इंडिया की शिकायत के बाद FIR दर्ज की।

Posted on by Surjeet Singh

पानीपत के नौलथा गांव में होली के जश्न मनाने का एक वीडिओ वायरल हुआ था जिसमे लोगों से भरी गाड़ी खींचने के लिए मजबूर एक भैंसे के गले में कुछ लोग जबरन शराब डालते दिखाए दिए। इस घटना के बाद, PETA इंडिया ने हरियाणा और पानीपत पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग से इसराना पुलिस स्टेशन में तत्काल  प्राथमिकी सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई है। बताया जा रहा है कि यह घटना 25 मार्च 2024 की है, लेकिन इस होली पर इसका वीडियो वायरल हुआ।

वीडियो में होली मना रही एक बड़ी भीड़ दिखाई देती है, जिसमें कई लोग अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर जुलूस निकाल रहे हैं, जिनमें एक बैलगाड़ी (भैंसे द्वारा खींची जा रही) भी शामिल है। वीडियो की शुरुआत में दो लोग एक भैंसे का मुंह पकड़कर उसे जबरन खुला रखते हुए दिखाई देते हैं, जबकि एक व्यक्ति पशु के मुंह में बड़ी मात्रा में जबरदस्ती शराब डालता है। वीडियो में एक नाक की रस्सी और डंडा भी दिखाई देता है, जिनका इस्तेमाल भैंसे को दर्द देकर नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। भैंसे को शराब पिलाने से उसे गंभीर नुकसान हो सकता है, जैसे चक्कर आना, उल्टी होना, बेहोशी आना या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं। होली के जश्न के शोर-शराबे और अफरा-तफरी से भैंसे की परेशानी और भी बढ़ गई होगी।

एफआईआर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की धारा 429, 336, 34 और 290 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए), 1960 की धारा 11(1)(a) और 11(1)(c) के तहत दर्ज की गई है। आईपीसी की धारा 429 (जो अब भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 325 है) किसी भी पशु को अपंग बनाने या मारने को संज्ञेय अपराध मानती है और इसके लिए पांच साल तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है। आईपीसी की धारा 290 सार्वजनिक उपद्रव के लिए सजा का प्रावधान करती है, जबकि धारा 336 ऐसे लापरवाह कृत्यों को दंडित करती है जो मानव जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालते हैं। पीसीए अधिनियम की धारा 11(1)(c) किसी पशु को कोई हानिकारक पदार्थ देना अपराध बनाती है, जबकि धारा 11(1)(a) किसी भी पशु को अनावश्यक दर्द या पीड़ा देने को अपराध मानती है।

PETA इंडिया पानीपत पुलिस, खासकर आईपीएस श्री भूपिंदर सिंह, पुलिस अधीक्षक, पानीपत, और इसराना पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर सब-इंस्पेक्टर श्री महिपाल की सराहना करता है जिन्होंने शिकायत मिलते ही तुरंत एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए और यह स्पष्ट संदेश दिया कि पशुओं के साथ क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

PETA इंडिया की सिफारिश है कि पशुओं के साथ दुर्व्यवहार करने वालों का मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन किया जाए और उन्हें काउंसलिंग दी जाए, क्योंकि पशुओं के साथ क्रूरता करना गहरी मनोवैज्ञानिक समस्या का संकेत होता है। शोध से पता चलता है कि जो लोग पशुओं के साथ क्रूरता करते हैं, वे अक्सर बार-बार ऐसे अपराध करते हैं और आगे चलकर अन्य पशुओं और यहां तक कि इंसानों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। फॉरेंसिक रिसर्च एंड क्रिमिनोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, “जो लोग पशुओं के साथ क्रूरता करते हैं, उनके द्वारा हत्या, बलात्कार, लूट, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशे से जुड़े अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है।”