100 से अधिक पशु चिकित्सकों ने केंद्र सरकार की एजेंसी से तेलंगाना की पालमुर बायोसाइंसेज से 1200 से अधिक बीगल्स और अन्य पशुओं को बचाने की माँग की

Posted on by Shreya Manocha

आज भेजे गए एक पत्र के ज़रिए, 100 से अधिक पशु चिकित्सकों ने केंद्र सरकार की एजेंसी Committee for the Purpose of Control and Supervision of Experiments on Animals (CCSEA) से तुरंत कार्रवाई की माँग की है। यह कार्रवाई CCSEA द्वारा नियुक्त निरीक्षकों की रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर होनी चाहिए, जिन्होंने 11-12 जून 2025 को तेलंगाना में स्थित पालमुर बायोसाइंसेज नामक एक कॉन्ट्रैक्ट पशु परीक्षण प्रयोगशाला का दौरा किया था। निरीक्षण समिति ने सिफारिश की थी कि तत्काल नियमात्मक कार्रवाई की जाए जिसमें पशुओं को वहाँ से हटाना और उनका पुनर्वास शामिल हो, ताकि उन्हें और दर्द व पीड़ा से बचाया जा सके। इसके अलावा, पालमुर बायोसाइंसेज की रजिस्ट्रेशन और ब्रीडिंग लाइसेंस की स्थिति की समीक्षा की माँग भी की गई थी। फिर भी, एक महीने बीत जाने के बावजूद CCSEA द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। निरीक्षकों ने वहाँ 1,200 से अधिक बीगल्स और अन्य पशुओं की उपस्थिति दर्ज की थी। यह प्रयोगशाला PETA इंडिया को अंदरूनी जानकारों से मिली रिपोर्टों के आधार पर किए गए खुलासे से चर्चा में आई जिनमें वहाँ की गतिविधियों का भयावह और विस्तृत विवरण था।

पशु चिकित्सकों के पत्र में कहा गया है, ‘11-12 जून 2025 के दौरान CCSEA द्वारा नियुक्त निरीक्षकों ने पाया कि पालमुर में 1,200 से अधिक पशु – जिनमें बीगल्स, बंदर, गायें, सूअर, खरगोश, चूहे और अन्य शामिल हैं – गंभीर उपेक्षा का शिकार थे। वहाँ अधिक भीड़, दर्दनाक प्रयोगों में बार-बार उपयोग, पशु चिकित्सा देखभाल और दर्द निवारण की कमी, पर्याप्त आवास और रिकॉर्ड की अनुपस्थिति, और कठोर व्यवहार जैसी समस्याएँ पाई गईं।’ निरीक्षकों ने यह निष्कर्ष निकाला कि ये केवल अलग-अलग विफलताएँ नहीं हैं, बल्कि गहरे स्तर की संरचनात्मक, प्रक्रियात्मक और नैतिक विफलताओं की ओर संकेत करती हैं।

निरीक्षण समिति की सिफारिशों की तात्कालिकता के बावजूद कार्रवाई न होने पर पशु चिकित्सकों ने लिखा, ‘एक पशु चिकित्सक के रूप में, हम मानते हैं कि यह खतरनाक देरी पशुओं की अत्यधिक पीड़ा को जारी रहने देती है और CCSEA की स्थापना के सिद्धांतों के साथ धोखा है। जितनी देर तक इन पशुओं को इन भयानक परिस्थितियों में छोड़ा जाएगा, उतनी ही ज़्यादा वे पीड़ित होते रहेंगे।’

 

11-12 जून 2025 को की गई विजिट के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया:
‘PBPL (पालमुर बायोसाइंसेज) में देखी गई संचालन संबंधी कमियाँ कोई अलग-अलग घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि ये गहरी संरचनात्मक, प्रक्रियात्मक और नैतिक विफलताओं को दर्शाती हैं। निरीक्षण के दौरान पाए गए व्यापक और गंभीर उल्लंघनों से यह सवाल उठता है कि यह संस्था पशु कल्याण और नियामक ज़िम्मेदारी के स्थापित मानकों का पालन किस हद तक कर रही है। स्थिति को तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है विशेष रूप से पशुओं को वहाँ से हटाकर उनके पुनर्वास के लिए ताकि उन्हें आगे और दर्द, तनाव या पीड़ा से बचाया जा सके। इसके अलावा, इन गम्भीर और बार-बार नियमों के उल्लंघन को देखते हुए, संस्थान के पंजीकरण और प्रजनन लाइसेंस की समीक्षा भी ज़रूरी है।’ पशु कल्याण और अधिकारों से जुड़े समूह इन पशुओं को पुनर्वास और नया घर दिलाने में मदद के लिए तैयार हैं।

PETA इंडिया ने इस रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों को लागू करवाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की है।

 

अभी मदद करें – पालमुर बायोसाइंसेज में पीड़ित पशुओं को बचाएँ!