बेंगलुरु में नौ कुत्तों का बचाव: मालिक द्वारा तार और पाईप से कुत्तों की पिटाई का वीडिओ सामने आने के बाद PETA इंडिया के हस्तक्षेप से एफआईआर दर्ज

Posted on by Surjeet Singh

कुत्तों को उनके तथाकथित “मालिक” द्वारा पीटे जाने की एक चिंताजनक घटना की जानकारी मिलने के बाद, PETA इंडिया ने स्थानीय स्वयंसेवकों स्वाति बिंदु आरवी, प्रिया चंद्रशेखर, संजीव मंजुनाथ और मनोज प्रकाश के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि इस मामले में तुरंत प्राथमिकी सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की जाए।

एक जागरूक नागरिक द्वारा साझा किए गए वीडियो में दो गोल्डन रिट्रीवर्स को बांधकर रखा गया था, जिन्हें इनके मालिक द्वारा पाइप और मोटी वायर से मारा-पीटा जा रहा था। जानकारी देने वाले लोगों ने PETA इंडिया को बताया कि कुत्तों के रोने की आवाज़ अक्सर दूर से सुनी जा सकती थी। एक पड़ोसी ने तो कुत्तों के साथ यौन उत्पीड़न होने का मौखिक आरोप भी लगाया।

वीडियो सबूत के आधार पर मालिक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 62 सहपठित धारा 325 और पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1) के तहत  एफआईआर दर्ज की गई है। मालिक द्वारा समर्पण करने पर उसके परिसर से सभी नौ कुत्तों को बचा लिया गया। एफआईआर दर्ज होने के बाद, PETA इंडिया ने सफलतापूर्वक आरोपी मालिक को सभी नौ कुत्तों को स्थायी पुनर्वास के लिए सौंपने के लिए राजी किया।

फिलहाल सभी कुत्ते तीन स्थानीय संस्थाओं की देखरेख में हैं: Compassion Unlimited Plus Action (CUPA) तीन गोल्डन रिट्रीवर्स की देखभाल कर रहा है, Charlie’s Animal Rescue Centre (CARE) ने तीन शिह त्ज़ू को अपने पास लिया है, और Safe Escape ने तीन गोल्डन रिट्रीवर्स को आश्रय दिया है। सभी कुत्तों को आवश्यक उपचार और देखभाल मिल चुकी है और अब वे गोद लिए जाने के लिए उपलब्ध हैं। Safe Escape के तीन गोल्डन रिट्रीवर्स को पहले ही प्यार भरे घर मिल चुके हैं।

BNS, 2023 की धारा 325 के तहत किसी भी पशु को अपंग बनाना या मारना एक संज्ञेय अपराध माना गया है, जिसके लिए पांच साल तक की सजा, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। किसी संज्ञेय अपराध का प्रयास करना भी धारा 62 के तहत दंडनीय है। इस प्रकार, किसी पशु को अपंग बनाने या मारने का प्रयास भी धारा 62 सहपठित धारा 325 के तहत दंडनीय है।

PETA इंडिया बेंगलुरु सिटी पुलिस, विशेष रूप से श्री कासिम राजा, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम 2), और इंस्पेक्टर अनिल कुमार, स्टेशन हाउस ऑफिसर, पीन्या पुलिस स्टेशन, की सराहना करता है, जिन्होंने तुरंत एफआईआर दर्ज कर यह स्पष्ट संदेश दिया कि पशुओं के प्रति क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

PETA इंडिया यह भी सिफारिश करता है कि पशु उत्पीड़न करने वालों का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाए और उन्हें काउंसलिंग दी जाए, क्योंकि पशुओं के साथ दुर्व्यवहार गहरी मानसिक समस्या का संकेत होता है। शोध से पता चलता है कि जो लोग पशुओं के साथ क्रूरता करते हैं, वे अक्सर बार-बार ऐसा करते हैं और आगे चलकर अन्य पशुओं तथा मनुष्यों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। Forensic Research & Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, “जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता करते हैं, उनके द्वारा अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है, जिनमें हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशे से जुड़े अपराध शामिल हैं।”

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