नया अपडेट : हथिनी “माधुरी (महादेवी)” पर PETA इंडिया का बयान
PETA इंडिया को हथिनी माधुरी के भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं की जानकारी है और हम उसकी भलाई के लिए सबसे अच्छे परिणाम की आशा करते हैं।
हम बॉम्बे हाईकोर्ट के 16 जुलाई 2025 के उस आदेश से सहमत हैं, जिसमें माधुरी की बिगड़ती हालत को देखते हुए उसकी सेहत को सबसे बड़ी प्राथमिकता देने की बात कही गई है। जैसे मनुष्यों को कभी-कभी अस्पताल, विशेष देखभाल और सेवानिवृत्ति की ज़रूरत होती है, वैसे ही हाथियों को भी होती है। और जैसे इंसानों को मानसिक और सामाजिक भलाई के लिए अन्य लोगों की आवश्यकता होती है, वैसे ही हाथियों को भी क्योंकि वे झुंड में रहने वाले सामाजिक जीव होते हैं, जो अपने संबंधों को बहुत महत्व देते हैं। यहाँ देखिए माधुरी वनतारा के राधे कृष्णा टेम्पल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट में पहली बार किसी हाथी मित्र से मिली।
माधुरी को लंबे समय से विशेष पशु चिकित्सा देखभाल और अन्य हाथियों की संगति की आवश्यकता थी। इसलिए हम बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय का पूरा समर्थन करते हैं, जिसमें मधुरी को उच्च स्तरीय पशु चिकित्सा उपचार, जंजीरों से मुक्ति और पुनर्वास के अवसर देने का आदेश दिया गया है। मधुरी को ग्रेड-4 आर्थराइटिस (गंभीर गठिया), पैरों में सड़न (फुट रॉट), और मानसिक तनाव के लक्षण (जैसे सिर हिलाना) जैसी गंभीर समस्याएं हैं।
16 जुलाई 2025 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त उच्चाधिकार प्राप्त समिति के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पीड़ित हाथी महादेवी (मधुरी) को एक अभयारण्य में पुनर्वासित करने की बात कही गई थी।
Dear @moefcc @MahaForest @KOLHAPUR_POLICE, she now needs to be moved.#FreeElephantMahadevi pic.twitter.com/6bcifhYMZ3
— PETA India (@PetaIndia) July 27, 2025
माननीय न्यायालयों ने मधुरी को 33 वर्षों की एकांत और कठोर सीमेंट फर्श पर जीवन जीने के बाद नई जिंदगी देने का निर्णय लिया। मानसिक रूप से परेशान हाथी अक्सर आक्रामक हो जाते हैं, माधुरी ने पहले ही एक प्रमुख स्वामीजी की हत्या कर दी थी, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि उसका दर्द कितना गहरा है।
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माधुरी को एक शांत जगह चाहिए जहाँ वह आज़ादी से घूम सके, एक जल स्रोत जिससे उसके दर्द को आराम मिले और बीमार पैरों की हल्की कसरत हो सके, साथ ही उन्नत पशु चिकित्सा उपकरण और विशेषज्ञ डॉक्टर हों जो उसकी कई स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दे सकें। वंतारा में ये सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं और फिलहाल महाराष्ट्र में ऐसा कोई अन्य केंद्र नहीं है। अगर भविष्य में कोई पुनर्वास केंद्र वंतारा जैसी सुविधाएँ, देखभाल और हाथियों के प्रति सम्मान देने वाला बनता है, तो PETA इंडिया वहां माधुरी के इलाज का विरोध नहीं करेगा ठीक वैसे ही जैसे हम उत्तर प्रदेश के वाइल्डलाइफ SOS और कर्नाटक के वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में अन्य बचाए गए हाथियों के भेजे जाने का समर्थन करते हैं, बशर्ते वे केंद्र वनतारा जैसी शर्तों को पूरा करें जहाँ हाथियों का शोषण न हो, उन्हें जंजीरों में न रखा जाए और न ही उन्हें हथियारों से नियंत्रित किया जाए। यह भी जरूरी है कि वह केंद्र खास तौर पर माधुरी और कुछ अन्य बचाए गए हाथियों के स्थायी देखभाल के लिए बना हो, जो शांत स्थान पर स्थित हो, भीड़-भाड़ और ट्रैफिक से दूर हो, और किसी चिड़ियाघर जैसी दर्शकों पर केंद्रित जगह न हो। माधुरी के लिए सबसे जरूरी है कि वह एक शांत, जंजीर-मुक्त माहौल में रहे, जहाँ उसका शारीरिक और मानसिक उपचार सम्मानपूर्वक हो सके।
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PETA इंडिया की एकमात्र चिंता यह है कि मधुरी को वह देखभाल, शांति और सम्मानजनक सेवानिवृत्ति मिले जिसकी वह हकदार है। सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया था, और अगर यह मामला फिर से सामने आता है तो हमें विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय इस दिशा में आवश्यक कदम उठाएगा।
