नागपुर सिटी पुलिस और पीपल फॉर एनिमल्स ने पशुओं के प्रति क्रूरता रोकने हेतु 100 से अधिक अधिकारियों के लिए कार्यशाला आयोजित करने हेतु PETA इंडिया को आमंत्रित किया

Posted on by Erika Goyal

20 मई को, नागपुर सिटी पुलिस के सभी थानों से पुलिस अधिकारी सदर स्थित पुलिस आयुक्तालय में एकत्रित हुए और पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया द्वारा आयोजित एक कार्यशाला में भाग लिया। यह कार्यशाला PETA इंडिया के विधिक सलाहकार और क्रूरता प्रतिक्रिया निदेशक मीत अशर द्वारा, पुलिस आयुक्त डॉ. रविंदर कुमार सिंगल, IPS के सशक्त नेतृत्व में आयोजित की गई, जिन्होंने स्वयं उपस्थित रहकर प्रशिक्षण का समर्थन किया। कार्यशाला में सहायक पुलिस आयुक्त श्रीमती शालिनी शर्मा ने भी भाग लिया। इस पहल को नागपुर की पशु-अधिकार कार्यकर्ता और पीपल फॉर एनिमल्स (PFA), नागपुर इकाई की प्रमुख, श्रीमती करिश्मा गलानी का भी समर्थन प्राप्त हुआ।

सभी थानों के लगभग 100 पुलिस अधिकारियों – जिनमें हेड कॉन्स्टेबल, पुलिस उप-निरीक्षक, सहायक पुलिस निरीक्षक और पुलिस निरीक्षक शामिल थे – ने चार घंटे तक चली इस कार्यशाला में भाग लिया। कार्यशाला में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960; वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (2022 में संशोधित); भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 तथा पशुओं से संबंधित अन्य केंद्रीय और राज्य कानूनों को विस्तारपूर्वक समझाया गया।

इससे एक दिन पूर्व, 19 मई को, चिटनविस सेंटर में नागपुर के पशु-अधिकार कार्यकर्ताओं के लिए भी इसी प्रकार की एक कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें उन्हें शहर की कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय हेतु कानूनों और विधिक प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षित किया गया।

नागपुर सिटी पुलिस पशुओं पर होने वाली क्रूरता पर सख्त कार्यवाही करने के लिए प्रतिबद्ध है, और इस प्रयास में PETA इंडिया को सहयोग देने पर गर्व है। PETA इंडिया पशुओं और समाज के हित में नागपुर सिटी पुलिस, विशेषकर आयुक्त डॉ. रविंदर कुमार सिंगल, IPS का इस विषय को गंभीरता से लेने हेतु आभार व्यक्त करता है।

यह पहल PETA इंडिया के उन सतत प्रयासों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य पूरे भारत में कानून प्रवर्तन कर्मियों को संवेदनशील बनाना और पशु-अधिकार कार्यकर्ताओं को सशक्त करना है, ताकि पशुओं के विरुद्ध अपराधों को उचित गंभीरता के साथ संबोधित किया जा सके। पूर्व में ऐसी कार्यशालाएँ ग्वालियर में सीमा सुरक्षा बल (अक्टूबर 2024), छत्तीसगढ़ पुलिस (नवंबर 2024), गोवा राज्य पुलिस एवं पशुपालन विभाग (अप्रैल 2025), उत्तर व दक्षिण SPCA के निरीक्षकों और फील्ड अधिकारियों, तथा पुणे सिटी पुलिस (अप्रैल 2025) के लिए आयोजित की जा चुकी हैं।

2021 में, फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गेनाइजेशन्स द्वारा जारी एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पूर्ववर्ती एक दशक में लगभग 5 लाख पशु क्रूरता के शिकार हुए।

कई हिंसक अपराधियों का इतिहास दर्शाता है कि उन्होंने पहले पशुओं पर अत्याचार किए थे। Forensic Research and Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है: “जो व्यक्ति पशु क्रूरता में संलिप्त होते हैं, उनके द्वारा हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग जैसे अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है। पशु क्रूरता के प्रमुख कारणों में गुस्सा, मनोरंजन, नियंत्रण, डर, नफरत, प्रतिशोध, अनुकरण और यौन संतुष्टि शामिल हैं।”

PETA इंडिया लंबे समय से पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 में संशोधन की मांग कर रहा है, जिसमें वर्तमान में दंड अत्यंत कम हैं – जैसे कि पहली बार अपराध करने पर केवल ₹50 का अधिकतम जुर्माना। हालांकि भारतीय न्याय संहिता, 2023 में सख्त सज़ाएँ निर्धारित की गई हैं। PCA अधिनियम में संशोधन हेतु केंद्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में, PETA इंडिया ने पशु क्रूरता के लिए दंडों में भारी वृद्धि की सिफारिश की है।

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