होसकोटे के कालिका देवी मंदिर में सैकड़ों मुर्गों और बकरों को बलि से बचाया गया, PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई

Posted on by Surjeet Singh

अप्रैल के अंतिम सप्ताह में तीन दिनों तक होसकोटे के कालिका देवी मंदिर में सैकड़ों बकरों और मुर्गों की सामूहिक बलि की अमानवीय प्रथा की जानकारी मिलते ही PETA इंडिया ने तुरंत हस्तक्षेप किया। PETA इंडिया की शिकायत के बाद, पशुपालन विभाग (AHD), बेंगलुरु ग्रामीण पुलिस और जिला प्रशासन ने 21, 22 और 26 अप्रैल को भक्तरहल्ली गांव में प्रस्तावित 108 बकरों और 1008 मुर्गों की बलि को रोक दिया। PETA इंडिया बेंगलुरु ग्रामीण पुलिस, जिला प्रशासन और पशुपालन विभागक विशेष रूप से उप निदेशक डॉ. जगदीश कुमार जी की सराहना करता है, जिनकी त्वरित कार्रवाई से सैकड़ों पशुओं की जान बचाई गई।

पशुपालन विभाग ने मंदिर प्रबंधन, मुख्य पुजारी, पंचायत अधिकारियों और टीसी हल्लि पुलिस के साथ बैठक कर आयोजकों को राज्य में पशु बलि की अवैधता के बारे में जागरूक किया।

अपनी शिकायत में PETA इंडिया ने बताया कि कर्नाटक पशु बलि निषेध अधिनियम, 1959 की धारा 3 के तहत किसी भी सार्वजनिक धार्मिक स्थल या उसके परिसर में पशु बलि पूरी तरह प्रतिबंधित है। धारा 4 किसी भी व्यक्ति को पशु बलि करने, करवाने या उसमें भाग लेने से रोकती है। धारा 5 किसी भी धार्मिक स्थल या उसके परिसर का उपयोग पशु बलि के लिए प्रतिबंधित करती है। धारा 6 इन प्रावधानों के उल्लंघन को दंडनीय अपराध बनाती है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि कई लोगों द्वारा साझा मंशा से अवैध रूप से पशुओं की हत्या करना भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 3(5) के तहत दंडनीय अपराध है। वहीं, धारा 325 के तहत किसी पशु को मारना, घायल करना या उसे नुकसान पहुंचाना पांच साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों के साथ दंडनीय है।

गुजरात, केरल, पुडुचेरी और राजस्थान में पहले से ही मंदिरों या उनके परिसरों में पशु बलि पर रोक है। कर्नाटक के अलावा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी सार्वजनिक धार्मिक स्थलों, उनके परिसरों या धार्मिक जुलूसों में पशु बलि प्रतिबंधित है।

जिस तरह मानव बलि को अब हत्या के रूप में मान्यता देकर समाप्त किया जा चुका है, उसी तरह धर्म के नाम पर पशुओं के साथ होने वाली इस क्रूर प्रथा को भी खत्म किया जाना चाहिए।

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