सामने के पैरों से लटकाकर घोड़े की बेरहमी से पिटाई- PETA इंडिया की शिकायत पर बलिया में FIR दर्ज
इंस्टाग्राम पर वायरल हुए एक वीडियो में दिखाया गया कि एक घोड़े को भारी बोझ न उठा पाने पर गाड़ी से उसके सामने के पैरों से लटकाकर डंडे से बेरहमी से पीटा जा रहा था। इसके बाद PETA इंडिया ने बलिया पुलिस विशेष रूप से पुलिस अधीक्षक श्री ओमवीर सिंह, IPS, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री दिनेश कुमार शुक्ला, उप निरीक्षक एवं सेहतवार थाना प्रभारी श्री अनिल कुमार सिंह और पशु अधिकार कार्यकर्ता ऋषिका रॉय के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि संबंधित कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की जाए।
यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA), 1960 की धारा 11 के तहत दर्ज की गई है। BNS, 2023 की धारा 325 के अनुसार किसी भी पशु को मारना, जहर देना, घायल करना या उसे बेकार कर देना संज्ञेय अपराध है, जिसके लिए पांच साल तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
सूचना के अनुसार, आरोपी ने बाद में घोड़े को बेच दिया और वह देवरिया चला गया है। PETA इंडिया ने बलिया पुलिस से घोड़े का पता लगाने, पीड़ित घोड़े को जब्त करने और जांच के लिए आरोपी को बलिया बुलाने का आग्रह किया है।
PETA इंडिया यह भी सिफारिश करता है कि पशुओं के साथ क्रूरता करने वालों का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन और काउंसलिंग कराई जाए, क्योंकि ऐसा व्यवहार गहरी मानसिक समस्या का संकेत हो सकता है। शोध बताते हैं कि पशु क्रूरता करने वाले लोग अक्सर दोबारा अपराध करते हैं और आगे चलकर अन्य जानवरों तथा इंसानों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। Forensic Research & Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, “जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता करते हैं, उनके अन्य अपराध जैसे हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशे से जुड़े अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है।”
PETA इंडिया लंबे समय से PCA अधिनियम, 1960 को मजबूत करने के लिए अभियान चला रहा है, क्योंकि इसमें दंड बहुत कम और पुराने हैं, जैसे पहली बार दोषी पाए जाने पर अधिकतम ₹50 का जुर्माना (हालांकि BNS, 2023 में कड़े प्रावधान हैं)। केंद्र सरकार को भेजे गए संशोधन प्रस्ताव में PETA इंडिया ने पशु क्रूरता के लिए दंड को काफी बढ़ाने की सिफारिश की है।
जो लोग पशुओं के साथ अत्याचार करते हैं, वे अक्सर इंसानों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। सभी की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि आम लोग हमेशा पशु क्रूरता की रिपोर्ट करें।
