PETA इंडिया ने मुम्बई में अनोखी कार्यशाला आयोजित कर 150 से अधिक प्रतिभागियों को पशुओं पर होने वाले अपराधों के विरुद्ध जागरूक किया। पूर्व सांसद पूनम महाजन मुख्य अतिथि के रूप में हुईं शामिल
मुंबई में पशुओं पर हो रहे अपराधों की बढ़ती घटनाओं के मद्देनज़र और पशुओं व इंसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, पीपल फॉर द एथीकाल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स, इंडिया (PETA इंडिया) ने मुम्बई के तुंगा इंटरनेशनल होटल में पहली बार एक शैक्षणिक और क्षमता-विकास कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला में मुंबईभर से आए बचावकर्ताओं (rescuers) और अन्य पशु-संरक्षण कार्यकर्ताओं सहित आम नागरिकों ने भाग लिया। पूर्व सांसद श्रीमती पूनम महाजन, जो देश में कई पशु कल्याण संगठनों की मार्गदर्शक रही हैं, इस कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
PETA इंडिया के लीगल एडवाइज़र और डायरेक्टर ऑफ क्रुएल्टी रिस्पॉन्स मीत अशर द्वारा संचालित इस दिनभर की कार्यशाला में 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। उन्होंने सीखा कि FIR (प्रथम सूचना रिपोर्ट) और POR (प्राथमिक अपराध रिपोर्ट) कैसे दर्ज करवाई जाए, और पशुओं के खिलाफ अपराध को कैसे दस्तावेजीकृत किया जाए। इसके साथ ही प्रतिभागियों को पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (2022 में संशोधित), भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और अन्य संबंधित कानूनों की जानकारी भी दी गई।
“पशुओं पर होने वाली क्रूरता से लड़ना एक सुरक्षित समाज सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि जो लोग पशुओं को नुकसान पहुँचाते हैं, वे अक्सर यहीं नहीं रुकते। मैं इस बात से प्रसन्न हूँ कि मैंने PETA इंडिया की इस कार्यशाला में भाग लिया, जो नागरिकों को पशु-अपराध जैसी सामाजिक बुराई पर लगाम लगाने के लिए सशक्त बना रहा है।”- श्रीमती पूनम महाजन
PETA इंडिया ने यह भी बताया कि कई हिंसक अपराधियों का इतिहास पशुओं पर क्रूरता करने से जुड़ा रहा है। Forensic Research and Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है: “जो लोग पशुओं पर क्रूरता करते हैं, उनके अन्य अपराधों जैसे हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी, और नशीले पदार्थों के सेवन में शामिल होने की संभावना तीन गुना अधिक होती है।”
PETA इंडिया लंबे समय से पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 को सशक्त बनाने की माँग कर रहा है, क्योंकि इसमें पहली बार दोषी पाए जाने वाले अपराधियों के लिए अधिकतम ₹50 का जुर्माना जैसी अत्यंत पुरानी और अपर्याप्त सजा निर्धारित है (हालांकि BNS, 2023 में अब अधिक कठोर सज़ाएँ निर्धारित की गई हैं)। केंद्र सरकार को भेजे गए एक संशोधन प्रस्ताव में PETA इंडिया ने पशु क्रूरता के लिए दंड को काफी बढ़ाने की सिफारिश की है।



