PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद बहादुरगढ़ में सामुदायिक कुत्तों के अवैध स्थानांतरण और कुत्ते के एक बच्चे को लकवाग्रस्त करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज
यह जानकारी प्राप्त होने के बाद कि बहादुरगढ़ कई सामुदायिक कुत्तों को क्रूरता से पकड़ा गया और अवैध रूप से स्थानांतरित किया गया तथा कुत्ते के एक नन्हे बच्चे पर भारी धातु का पिंजरा फेंके जाने के कारण वह लकवाग्रस्त हो गया, PETA इंडिया ने सेक्टर 6 पुलिस स्टेशन और इन कुत्तों के स्थानीय देखभालकर्ता सचिन कुमार के साथ मिलकर संबंधित कठोर कानूनी धाराओं के तहत प्राथमिकी रिपोर्ट दर्ज करवाई।
BK मंकी कैचिंग कंपनी के स्वामी नरेश कुमार द्वारा 12 सामुदायिक कुत्तों जिनमें एक दुग्धपान कराने वाली कुतिया और उसके छोटे छोटे बच्चे भी शामिल थे, उन्हें अवैध रूप से पकड़ने और स्थानांतरित करने की घटना सामने आई है। यह घटना दिनांक 11 मार्च को बहादुरगढ़ के ओमैक्स सोसाइटी में, सोसाइटी की रेजिडेंस मैनेजमेंट कंपनी शानवी मैनेजमेंट के निर्देश पर उनके प्रबंधक विक्रम यादव के माध्यम से हुई।
कुत्तों के अवैध स्थानांतरण और उन्हें छोड़ दिए जाने की जानकारी मिलने पर, देखभालकर्ताओं और स्थानीय पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने मेहनत से उनकी तलाश की और 9 कुत्तों जिनमें कुत्ते के 2 माह की उम्र के छोटे बच्चे और एक लकवाग्रस्त बच्चा शामिल था, को उनके मूल स्थान से लगभग 35 किलोमीटर दूर मिले। स्थानीय लोगों ने कार्यकर्ताओं को बताया कि बच्चों को कथित रूप से पीटा गया था, और फिर उसके नाजुक शरीर पर कोई भारी धातु का पिंजरा फेंका गया, जिसके परिणामस्वरूप उसके पिछले पैरों में पूर्ण रूप से लकवा हो गया।
इस मामले में हाल ही में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 325 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए), 1960 की धारा 11 (1) (a) और धारा 38 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। बीएनएस, 2023 की धारा 325 के अनुसार किसी भी पशु को मारना, जहर देना, विकलांग बनाना या उसे अनुपयोगी बना देना एक संज्ञेय अपराध है और इसके लिए पाँच वर्ष तक के कारावास, या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023 के नियम 11(19) के अनुसार, सामुदायिक कुत्तों को केवल नसबंदी और टीकाकरण के उद्देश्य से ही पकड़ा जा सकता है और उन्हें स्थानांतरित करना अवैध है। इसमें कहा गया है, “कुत्तों को [नसबंदी के बाद] उसी स्थान या क्षेत्र में छोड़ा जाएगा, जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था।” माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 22 अगस्त 2025 के अपने आदेश में एबीसी नियमों को बरकरार रखते हुए पुनः कहा कि 2023 के एबीसी नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद कुत्तों को उनके क्षेत्र में वापस छोड़ा जाना चाहिए।
PETA इंडिया स्थानीय नगर निकायों से आग्रह करते हैं कि वे मानव और पशुओं के बीच संघर्ष को कम करने के लिए कानून के अनुसार आवश्यक ‘पशु जन्म नियंत्रण’ (एनिमल बर्थ कंट्रोल) यानि नसबंदी की प्रक्रिया को शीघ्र लागू करें, और हम जनता से भी ऐसे पशु क्रूरता के मामलों की रिपोर्ट करने का आग्रह करते हैं। हम सेक्टर 6 पुलिस स्टेशन के प्रभारी उप-निरीक्षक श्री जय भगवान की सराहना करते हैं, जिन्होंने प्राथमिकी दर्ज कर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पशुओं के प्रति क्रूरता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
PETA इंडिया यह अनुशंसा करता है कि पशु उत्पीड़न करने वालों का मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन किया जाए और उन्हें परामर्श दिया जाए, क्योंकि पशुओं के साथ दुर्व्यवहार गहरी मनोवैज्ञानिक समस्या का संकेत देता है। शोध से पता चलता है कि जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता करते हैं, वे अक्सर बार-बार अपराध करते हैं और आगे चलकर अन्य पशुओं, यहाँ तक कि मनुष्यों को भी नुकसान पहुँचाते हैं। फॉरेंसिक रिसर्च एंड क्रिमिनोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है, “जो लोग पशुओं के साथ क्रूरता भरे कृत्य करते हैं, उनमें अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है, जिनमें हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीले पदार्थों का दुरुपयोग शामिल है।”
सामुदायिक कुत्तों को अक्सर क्रूरता का सामना करना पड़ता है या वे वाहनों की चपेट में आ जाते हैं और आमतौर पर भूख, बीमारी या चोट से पीड़ित रहते हैं। हर साल, कई कुत्ते पशु आश्रयों में पहुँच जाते हैं, जहाँ पर्याप्त अच्छे घरों की कमी के कारण वे पिंजरों या केनेलों (पालनघर) में पड़े रहते हैं। इसका समाधान सरल है: नसबंदी और सड़कों या आश्रयों से गोद लेना। एक मादा कुत्ते की नसबंदी छह वर्षों में 67,000 कुत्तों को जन्म लेने से रोक सकती है, और एक मादा बिल्ली की नसबंदी सात वर्षों में 4,20,000 बिल्लियों को जन्म लेने से रोक सकती है।
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