SAFI की शिकायत और PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद सिद्धिपेट में बकरे की बर्बर बलि के मामले में FIR दर्ज

Posted on by Surjeet Singh

सिद्धिपेट जिले के खाज़ीपुर गांव में पेड्डम्मा बोनालु उत्सव के दौरान एक बकरे की अवैध और बर्बर हत्या का वीडियो प्राप्त होने के बाद, PETA इंडिया ने स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन इंडिया (SAFI) के अदुलापुरम गौतम, सिद्धिपेट की पुलिस आयुक्त श्रीमती रश्मि पेरुमल (IPS) तथा भूमपल्ली पुलिस स्टेशन के साथ मिलकर मामले में प्राथमिकी रिपोर्ट (FIR) दर्ज करवाने के लिए कार्रवाई की।

यह वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया था, जिसमें सार्वजनिक रूप से की जा रही पशु बलि दिखाई गई। वीडियो में कुछ लोग एक बकरे के पैर पकड़कर उसे काबू में रखते दिखाई देते हैं, जबकि एक अन्य व्यक्ति उसकी गर्दन को बार-बार दांतों से काटकर उसकी हत्या करता है।

SAFI की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए भूमपल्ली पुलिस स्टेशन ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA), 1960 की धारा 11(1) के तहत FIR दर्ज की है। PETA इंडिया ने पुलिस से आग्रह किया है कि FIR में तेलंगाना पशु एवं पक्षी बलि निषेध अधिनियम, 1950 की प्रासंगिक धाराएं भी जोड़ी जाएं।

शिकायत में बताया गया कि तेलंगाना पशु एवं पक्षी बलि निषेध अधिनियम, 1950 की धारा 3 किसी भी सार्वजनिक धार्मिक पूजा या आराधना स्थल, उसके परिसर, अथवा सार्वजनिक सड़क पर धार्मिक आयोजन से जुड़े किसी भी समारोह या जुलूस में पशु बलि को सख्ती से प्रतिबंधित करती है। धारा 4 किसी भी व्यक्ति को ऐसे धार्मिक स्थलों, परिसरों, समारोहों या जुलूसों में पशु बलि देने, करवाने, उसमें भाग लेने या सहायता करने से रोकती है। वहीं, धारा 5 किसी मंदिर या सार्वजनिक धार्मिक स्थल के प्रबंधन या कब्जे में रहने वाले व्यक्ति को ऐसे स्थानों का उपयोग पशु बलि के लिए करने से प्रतिबंधित करती है।

PETA इंडिया ने यह भी रेखांकित किया कि कई व्यक्तियों द्वारा साझा मंशा के तहत किसी पशु की अवैध हत्या करना भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 3(5) के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। BNS की धारा 325 के अनुसार, दुर्भावनापूर्ण तरीके से किसी पशु की हत्या करने पर पांच वर्ष तक के कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

गुजरात, कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी और राजस्थान में पहले से ही मंदिरों और उनके परिसरों में किसी भी पशु की धार्मिक बलि पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून मौजूद हैं। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सार्वजनिक धार्मिक पूजा या आराधना स्थलों, उनके परिसरों तथा सार्वजनिक सड़कों पर धार्मिक आयोजनों से जुड़े समारोहों और जुलूसों में भी पशु बलि प्रतिबंधित है।

पशु बलि न केवल पशुओं के प्रति क्रूरता का कृत्य है, बल्कि समाज के लिए भी एक व्यापक खतरा है। यह लोगों को धीरे-धीरे हिंसा के प्रति असंवेदनशील बनाती है और ऐसी पुरानी मान्यताओं को बढ़ावा देती है जो सामाजिक प्रगति में बाधा डालती हैं। जिस प्रकार आज मानव बलि को हत्या माना जाता है, उसी प्रकार ऐसे समय में जब भारत अंतरिक्ष अभियानों का संचालन कर रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े वैश्विक सम्मेलनों की मेजबानी कर रहा है, पशु बलि जैसी पुरातन प्रथा का अंत होना चाहिए। यह हमारे समाज के विकास के लिए आवश्यक है।

पशु बलि को समाप्त करना केवल पशु संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि यह समाज के विकास के लिए भी जरूरी है। ऐसी प्रथाओं से दूर जाना करुणा, प्रगति और अधिक जागरूक भविष्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पशुओं पर क्रूरता की हमेशा रिपोर्ट करें।