PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद पूर्वी गोदावरी में गाय को कुचलने वाले ट्रक चालक के खिलाफ FIR दर्ज
हाईवे पार करने की कोशिश कर रही एक गाय को ट्रक द्वारा कुचलने की दर्दनाक घटना की जानकारी मिलने पर PETA इंडिया ने स्थानीय पशु अधिकार कार्यकर्ता श्री विजय किशोर पालिका के साथ मिलकर इस मामले में FIR दर्ज करवाने के लिए कदम उठाए। इस घटना में गाय की हड्डियाँ टूट गई थीं और ट्रक चालक उसे कुचलने के बाद रुके बिना और उसकी मदद किए बिना मौके से चला गया था। घटना के CCTV फुटेज के आधार पर, राजानगरम पुलिस स्टेशन की पूर्वी गोदावरी ज़िले की उप पुलिस अधीक्षक (DSP) श्रीमती C.H. जीवना ने ट्रक चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं 325, 281 और 291 तथा पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(a) के तहत FIR दर्ज की है।
CCTV फुटेज में गाय साफ़ दिखाई देती है, जो हाईवे पार करने की कोशिश कर रही है। एक कार चालक गाय को देखकर गाड़ी धीमी कर देता है, लेकिन ट्रक चालक न तो गाड़ी धीमी करता है और न ही रुकता है। वह गाय को कुचल देता है और फिर मौके से फरार हो जाता है। स्थानीय NGO, जीव आराध्या ऑर्गनाइज़ेशन ने गाय को बचाकर उसे प्राथमिक उपचार दिया। अब उसे विशेषज्ञ पशु चिकित्सा देखभाल के लिए एक केंद्र में भेजा जाएगा। BNS, 2023 की धारा 325 के तहत किसी भी पशु को अपंग बनाना या उसकी हत्या करना संज्ञेय अपराध है। इसके लिए 5 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सज़ा का प्रावधान है।
PETA इंडिया बताता है कि सड़कों पर घूमती गायें और बछड़े आमतौर पर डेयरी उद्योग द्वारा छोड़ दिए गए पशु होते हैं। नर बछड़ों को अक्सर जन्म के कुछ समय बाद ही छोड़ दिया जाता है, क्योंकि वे दूध नहीं दे सकते। वहीं, दूध देने की क्षमता कम होने पर गायों को भी छोड़ दिया जाता है, जबकि वे अपनी प्राकृतिक उम्र का केवल एक छोटा-सा हिस्सा ही जी पाती हैं। ये पशु अक्सर सड़कों के किनारे या भीड़भाड़ वाली और कम संसाधनों वाली गौशालाओं में पहुँच जाते हैं। वहाँ गंदगी, तंग जगहों में रखे जाने और पशु चिकित्सा देखभाल की कमी के कारण पशुओं और आसपास रहने वाले समुदायों में बीमारियाँ फैलने का खतरा रहता है। कई बार बछड़ों को भूखा भी छोड़ दिया जाता है। डेयरी उद्योग के पशुओं को अक्सर मांस और चमड़े के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। PETA इंडिया लोगों से अपील करता है कि इस हिंसा को रोकने के लिए वे नारियल, बादाम, सोया या अन्य पौधों से बने दूध के विकल्प चुनें।
PETA इंडिया लोगों से अपील करता है कि यदि उन्हें कोई घायल पशु दिखे, तो तुरंत किसी पशु चिकित्सक या पशु बचाव संगठन से संपर्क करें। यह भी ज़रूरी है कि मदद पहुँचने तक वे पशु के पास रहें और सुनिश्चित करें कि उसे उचित उपचार और देखभाल मिले। PETA इंडिया की 24/7 पशु आपातकालीन हेल्पलाइन 9820122602 पर कॉल करके स्थानीय मदद के संपर्क और सलाह प्राप्त की जा सकती है।
