PFCI, PETA इंडिया और अन्य संगठनों की संयुक्त कार्रवाई के बाद चेन्नई में पी.सी. सरकार और धाया के इंटरनेशनल मैजिक शो से 15 पक्षियों को मुक्त कराया गया

Posted on by Surjeet Singh

चेन्नई के म्यूज़ियम थिएटर में आयोजित पी.सी. सरकार और धाया के इंटरनेशनल मैजिक शो से जुड़े जादूगरों द्वारा मंचीय प्रदर्शनों में पक्षियों का अवैध रूप से इस्तेमाल किए जाने के वीडियो साक्ष्य मिलने के बाद, पीपल फॉर कैटल इन इंडिया (PFCI), PETA इंडिया और अन्य संगठनों ने चेन्नई पुलिस के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न प्रजातियों के 15 पक्षियों को बचाया गया। जादूगर इन पक्षियों का इस्तेमाल मंचीय प्रदर्शनों में कर रहे थे, जो पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 और 9 फरवरी 2022 को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा पारित उस आदेश का उल्लंघन है, जिसमें बिना पंजीकरण वाले सर्कसों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।

इन पक्षियों—कबूतरों, फाख्ताओं और बत्तखों—को स्वेच्छा से अधिकारियों को सौंप दिया गया। इसके बाद उन्हें चिकित्सकीय जांच और अस्थायी देखभाल के लिए चेन्नई स्थित ब्लू क्रॉस ऑफ इंडिया आश्रय में भेजा गया। बाद में स्थायी पुनर्वास के लिए उन्हें रायगढ़ स्थित कालोटे एनिमल ट्रस्ट भेज दिया गया। इस बीच, अधिकारी उन लापता मकाव तोतों का पता लगाने के लिए जांच जारी रखे हुए हैं, जिनका भी शो में इस्तेमाल किया जा रहा था।

जादूगर आवश्यक परफॉर्मिंग एनिमल्स रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (PARC) के बिना ही पक्षियों का उपयोग कर रहे थे, जबकि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत बनाए गए परफॉर्मिंग एनिमल्स (रजिस्ट्रेशन) नियम, 2001 के अनुसार यह प्रमाणपत्र अनिवार्य है। PFCI की जांच में यह दर्ज किया गया कि पक्षियों का कई खतरनाक करतबों में इस्तेमाल किया जा रहा था, जिनमें आग के बेहद करीब प्रदर्शन करवाना भी शामिल था। ऐसी परिस्थितियां पक्षियों को अत्यधिक तनाव और संभावित चोट के खतरे में डालती हैं।

PFCI के संस्थापक अरुण प्रसन्ना ने कहा, “हम चेन्नई पुलिस, विशेष रूप से पुलिस उपायुक्त (त्रिप्लिकेन) श्री वी. जयचंद्रन, पुलिस सहायक आयुक्त (एग्मोर) श्री के. जगदीशन, एफ2 पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक श्री राजेंद्रन और उप-निरीक्षक श्री रघुराम द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हैं। बचाए गए ये 15 पक्षी अब वह सम्मानजनक और प्राकृतिक जीवन जी सकेंगे, जिसके वे हकदार हैं। वहीं, हम मैजिक शो के संचालकों से आग्रह करते हैं कि वे उन मकाव तोतों को भी अधिकारियों को सौंप दें, जिन्हें अब तक नहीं सौंपा गया है।”

भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) द्वारा किए गए अनेक निरीक्षणों और PETA इंडिया की जांचों से यह साबित हुआ है कि पशुओं का इस्तेमाल करने वाले सभी सर्कस क्रूर होते हैं। यहां तक कि वैध PARC रखने वाले सर्कसों में भी पशुओं को प्रदर्शन के समय छोड़कर बाकी समय जंजीरों से बांधकर या छोटे, खाली पिंजरों में कैद रखा जाता है। सर्कसों में पशुओं को अक्सर पर्याप्त पशु-चिकित्सकीय देखभाल, भोजन, पानी और आश्रय से वंचित रखा जाता है तथा उन्हें सजा और भय के माध्यम से करतब करने के लिए मजबूर किया जाता है। ऐसे कई पशुओं में अत्यधिक तनाव के संकेत देने वाले असामान्य और बार-बार दोहराए जाने वाले व्यवहार देखे जाते हैं।

इस अभियान का नेतृत्व PFCI के संस्थापक अरुण प्रसन्ना ने किया। उनके साथ PETA इंडिया की श्रीकुट्टी बेनेट तथा PFCI के स्वयंसेवक शिवा कुमार, संजय, विग्नेश मूर्ति, मनोज कुमार और कार्तिक वी. शामिल थे। बचाव अभियान में तमिलनाडु पशु कल्याण बोर्ड (TNAWB) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चोक्कालिंगम, TNAWB की मानद सदस्य श्रुति विनोदराज, ब्लू क्रॉस ऑफ इंडिया की मानद निदेशक शांति शंकर, ब्लू क्रॉस ऑफ इंडिया के प्रबंधक वेलु मुरुगन तथा स्वयंसेवक शेरोन, पॉल एबेनेज़र, नंदा कुमार और अरविंद ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। PETA इंडिया की पशु-चिकित्सा सेवाओं की प्रबंधक डॉ. पूजा आचार्य, वरिष्ठ पशु-चिकित्सा सहायक परमानंद पंत और पशु-चिकित्सा सहायक प्रेमचंद वर्मा ने पक्षियों को ब्लू क्रॉस ऑफ इंडिया आश्रय से कालोटे एनिमल ट्रस्ट अभयारण्य तक सुरक्षित पहुंचाने में सहायता की।

PETA इंडिया सर्कसों में यांत्रिक हाथियों और अन्य गैर-पशु विकल्पों के उपयोग को प्रोत्साहित करता है। जेमिनी सर्कस और रैम्बो सर्कस अपने कुछ प्रदर्शनों में यांत्रिक पशुओं का उपयोग करते हैं। जादू के करतबों और अन्य सर्कस प्रदर्शनों में इस्तेमाल किए जाने वाले पशुओं को अप्राकृतिक और तनावपूर्ण प्रशिक्षण, खतरनाक वातावरण तथा लगातार यात्रा झेलनी पड़ती है। उपयोग न होने पर उन्हें पिंजरों में बंद या जंजीरों से बांधकर रखा जाता है। ऐसे किसी भी शो में जाने से इनकार करें, जिसमें पशुओं का इस्तेमाल किया जाता हो।

हमेशा पशुओं के प्रति क्रूरता की रिपोर्ट करें।