‘क्या आपका बैग किसी के खून से सना है?’ चमड़े की क्रूरता के खिलाफ PETA इंडिया के ‘खूनी’ अभियान में नज़र आएंगी अभिनेत्री करिश्मा तन्ना
हिट नेटफ्लिक्स सीरीज़ स्कूप की स्टार अभिनेत्री करिश्मा तन्ना “खून” टपकते हुए एक बैग को थामे लोगों से अपील कर रही हैं कि वे हर साल लेदर के लिए मारे जाने वाले 1.4 अरब से अधिक गायों, भेड़ों और बकरियों तथा लाखों अन्य पशुओं की जान बचाने के लिए फैशनेबल, वीगन विकल्प अपनाएँ। यह संदेश वह PETA इंडिया के नए अभियान के ज़रिये दे रही हैं।
इस अभियान की शूटिंग प्रमुख फैशन फ़ोटोग्राफ़र साशा जयराम ने की है, जबकि करिश्मा तन्ना की पोशाक को नमिता अलेक्ज़ेंडर ने स्टाइल किया और उनके बालों को शेफाली कोले ने संवारा। उनका मेक-अप रिशिना आचार्य ने किया।
“दो साल पहले तक मैं लेदर जैकेट और बैग इस्तेमाल करती थी, लेकिन PETA इंडिया के साथ काम करने के बाद मैंने यह समझा कि हर लेदर हैंडबैग गायों और खाल के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य जीते जागते और महसूस करने वाले पशुओं के जीवन भर के कष्ट और दर्दनाक मौत का प्रतीक होता है। मुझे यहसाझा करते हुए खुशी हो रही है कि मैंने लेदर खरीदना बंद कर दिया है और जो लेदर के बने प्रोडक्टस मेरे पास है, उसे अच्छे उद्देश्य के लिए दान कर रही हूँ। मैं अपने प्रशंसकों से भी अपील करती हूँ कि वह भी चमड़े का त्याग करें। PETA इंडिया लेदर के सामान को दान के रूप में स्वीकार करता है, ताकि उन्हें लेदर के खिलाफ प्रदर्शनों में इस्तेमाल किया जा सके।” – करिश्मा तन्ना
भारत में लेदर के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पशुओं को परिवहन करने के लिए अक्सर वाहनों में इतनी बड़ी संख्या में ठूंस-ठूस कर भर दिया जाता है कि कई पशु रास्ते में ही गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं या मर जाते हैं। परिवहन के बाद कतलखानों में पहुँचने पर उन्हें घसीटा जाता है, और खून, आँतों और मल-मूत्र से सने फर्श पर अन्य पशुओं के सामने उनके गले काट दिए जाते हैं।
लेदर का उत्पादन पर्यावरण के लिए भी विनाशकारी होता है। पशुओं की खाल को लेदर में बदलने के लिए बड़ी मात्रा में ज़हरीले रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है, और चमड़ा कारखानों से निकलने वाला अपशिष्ट स्थानीय जलस्रोतों में घुलकर उन्हें ज़हरीला बना देता है। चमड़ा उत्पादन करने वाले कारखानों के पास रहने वाले और वहाँ काम करने वाले लोगों के लिए भी बेहद नुकसानदेह है। बांग्लादेश केचमड़ा कारखानों में 90% मज़दूर 50 वर्ष की आयु से पहले ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं।
आजकल बाजारों में एक से बड़कर एक शानदार सिंथेटिक वीगन के विकल्प उपलब्ध हैं, और अब वीगन लेदर अनानास की पत्तियों, कॉर्क, फलों के कचरे, रिसाइकल्ड प्लास्टिक, मशरूम, शहतूत की पत्तियों, सागौन की पत्तियों, फेंके गए मंदिरों के फूलों, नारियल के कचरे, टमाटर कंपोज़िट आदि से भी बनाया जा रहा है। पशुओं की बजाय वीगन लेदर भारतीय किसानों के लिए भी फायदेमंद हैं, जैसा कि मेघालय राज्य द्वारा अनानास लेदर उत्पादन पर विचार करने से स्पष्ट होता है।
