एलियंस, पशु-अधिकार और दयालु विकल्प: वीगन इंडिया कॉन्फ़्रेंस 2025 में PETA इंडिया की खास मौजूदगी

Posted on by Shreya Manocha

वीगन इंडिया कॉन्फ़्रेंस 2025 में PETA इंडिया की मौजूदगी ने करुणा, नवाचार और पशु-अनुकूल जीवनशैली को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया। देश के सबसे बड़े वीगन-आधारित सम्मेलन में, PETA इंडिया ने एलियंस जैसे अनोखे तरीकों से हल्के-फुल्के लेकिन असरदार अंदाज़ में पशुओं के अधिकार का संदेश लोगों तक पहुँचाया। यह सम्मेलन उन सभी लोगों का मिलन स्थल बना जो एक दयालु और हिंसामुक्त दुनिया के लिए कार्य कर रहे हैं—जैसे वीगन उद्यमी, जागरूक युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और नैतिक ब्रांड्स। सभी का उद्देश्य स्पष्ट था: एक ऐसा भविष्य बनाना जिसमें किसी भी पशु का उपयोग खाने, पहनने या मनोरंजन के लिए न किया जाए। यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण रहा कि दया और प्रगति साथ-साथ चल सकती हैं, और PETA इंडिया का यही संदेश था—करुणा के साथ जीना आज के दौर में न केवल संभव है, बल्कि अत्यावश्यक भी।

वीगन इंडिया कॉन्फ़्रेंस 2025 में PETA यूथ के स्टॉल पर आने वाले लोगों को एक बेहद झकझोर देने वाली वैकल्पिक हकीकत का अनुभव हुआ—हमारे अनोखे वर्चुअल रियलिटी अनुभव ‘When They Came for Us’ के ज़रिए। इस अनुभव में दर्शकों को ऐसी ताक़तवर एलियन प्रजातियों द्वारा अगवा कर लिया जाता है, जो इंसानों को हीन मानते हैं और उन पर प्रयोग करना अपना अधिकार समझते हैं। महज़ सात मिनट के भीतर दर्शक खुद को अपनी आज़ादी के लिए गिड़गिड़ाते हुए पाते हैं। कई लोगों ने इस अनुभव को तीव्र, भावनात्मक और गहराई से सोचने पर मजबूर करने वाला बताया, क्योंकि यह पशुओं के साथ होने वाले उस रोज़मर्रा के व्यवहार को दर्शाता है जिसमें उन्हें खाने, पहनने, मनोरंजन और प्रयोगों के लिए क्रूरता से इस्तेमाल किया जाता है। यह अनुभव हर दर्शक को यह सोचने पर मजबूर करता है कि कहीं वे भी तो अनजाने में पशुओं के इस दुःख का हिस्सा तो नहीं बन रहे।

 

PETA इंडिया के लीगल एडवाइज़र और क्रूअल्टी रिस्पॉन्स निदेशक, मीत आशार ने हर पशु कार्यकर्ता के लिए जरूरी पशु कानून’  विषय पर एक प्रभावशाली कार्यशाला आयोजित की। इस दौरान उन्होंने समझाया कि पशुओं के प्रति क्रूरता कैसे अन्य प्रकार की हिंसा से जुड़ी होती है और यह मानव स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती है। उन्होंने भारत के पशु संरक्षण से जुड़े कानूनों की जानकारी दी और बताया कि संकट में फंसे पशुओं की मदद कैसे की जा सकती है। इसके बाद सवाल-जवाब के दौर में बूचड़खानों की कानूनी स्थिति समेत कई अहम सवालों के जवाब दिए गए, जिससे सभी प्रतिभागी बेहतर समझ के साथ पशुओं के लिए सकारात्मक कदम उठाने के लिए प्रेरित हुए।

PETA इंडिया की कॉरपोरेट अफेयर्स डायरेक्टर, आशिमा कुकरेजा ने अपनी पैनल चर्चा ‘Achieving Scale With Biomaterials: Building the Future With Ethical Fashion’ में PETA इंडिया की उन पहलों के बारे में बताया जो चमड़ा, फर और अन्य पशु-आधारित सामग्रियों के लिए मारे जाने वाले पशुओं के बारे में जागरूकता फैलाती हैं। इन जांचों और वीडियोज़ के ज़रिए उपभोक्ताओं को वीगन चमड़े की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में पेड़-पौधों की विशाल विविधता है, जो इसे पेड़-पौधों पर आधारित चमड़े के नवाचार के लिए एक आदर्श स्थान बनाती है, और यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। इस पैनल में PETA-स्वीकृत वीगन ब्रांड Eori और House of Serein के संस्थापक मनीष पारेख और मुस्कान मुंधरा, मैटेरियल साइंस की प्रोफेसर और शोधकर्ता डॉ. के.सी. मोहिते भी शामिल थे, जबकि इस चर्चा का संचालन पर्यावरण संरक्षण और पशु अधिकारों के लिए सक्रिय कार्यकर्ता श्रेया घोडावत ने किया। यह चर्चा युवा उद्यमियों और उपभोक्ताओं को वीगन फैशन की बढ़ती दुनिया में संभावनाओं और अवसरों के बारे में जागरूक और प्रेरित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।

 

भारत में वीगन आंदोलन तेजी से बढ़ रहा है, जहाँ जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ बदलाव के लिए रोमांचक अवसर भी सामने आ रहे हैं। जैसे-जैसे यह जागरूकता फैलती है और समुदाय मजबूत होता जा रहा है, वैसे-वैसे नवाचार, करुणा और प्रगति के लिए माहौल भी तैयार हो रहा है। क्या आप भी इससे प्रेरित महसूस कर रहे हैं?

आज ही हमारी फ्री वीगन स्टार्टर किट ऑर्डर करें!

वीगन फैशन का चुनाव करें

पशु क्रूरता को रिपोर्ट करें