वाराणसी में मादा कुत्ते के साथ यौन शोषण- सभी मादाओं की सुरक्षा के लिए PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद FIR दर्ज

Posted on by Surjeet Singh

वाराणसी के रानीपुर महमूरगंज में एक स्तनपान करा रही सामुदायिक मादा कुत्ते के साथ यौन शोषण किए जाने की सूचना मिलने पर, सामुदायिक पशु देखभालकर्ता ने मदद के लिए तुरंत संपर्क किया। इसके बाद, PETA इंडिया ने भेलूपुर पुलिस स्टेशन के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि जल्द से जल्द प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की जाए। वीडियो में मौजूद सबूतों में आरोपी भगन दास को अपने हाथों से मादा कुत्ते का यौन शोषण करते हुए देखा जा सकता है। इसके आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA Act), 1960 की धारा 11(1)(a) के तहत FIR दर्ज की गई।

2021 में, फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइज़ेशन्स ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें बताया गया कि उससे पहले के दस वर्षों में गायों और कुत्तों सहित लगभग 5 लाख पशु अपराधों के शिकार हुए थे और उनमें से कई के साथ यौन हिंसा की गई थी। इससे पहले, वॉइस ऑफ स्ट्रे डॉग्स की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि पशुओं के साथ यौन शोषण की घटनाओं की जानकारी अक्सर सामने नहीं आती, लेकिन संभवतः ये घटनाएँ इंसानों के साथ बलात्कार के मामलों के समान दर से होती हैं।

कई हिंसक अपराधियों का पशुओं के प्रति क्रूरता का पुराना रिकॉर्ड रहा है। Journal of Emotional Abuse में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, घरेलू हिंसा से बचने के लिए सुरक्षित आश्रय लेने वाली और साथी पशुओं के साथ रहने वाली 71% महिलाओं ने बताया कि उनके साथी ने पशुओं को धमकाया, उन्हें चोट पहुँचाई या उनकी हत्या कर दी। Forensic Research and Criminology International Journal में प्रकाशित एक शोधपत्र में चेतावनी दी गई है, “पशुओं के प्रति क्रूरता करने वाले लोगों के अन्य अपराधों में शामिल होने की आशंका तीन गुना अधिक थी। इन अपराधों में हत्या, बलात्कार, लूटपाट, हमला, उत्पीड़न, धमकियाँ देना और नशीले पदार्थों का दुरुपयोग शामिल हैं। पशुओं के प्रति क्रूरता करने के प्रमुख कारणों में गुस्सा, मज़ा लेना, नियंत्रण की भावना, डर, नापसंदगी, बदला लेना, दूसरों की नकल करना और यौन सुख प्राप्त करना शामिल हैं।” भारत में, केरल की कानून की छात्रा जीशा के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए अमीरुल इस्लाम का भी कुत्तों और बकरियों के साथ बलात्कार करने और उनकी हत्या करने का पुराना इतिहास था।

PETA इंडिया ने केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी से BNS में संशोधन करने का अनुरोध किया है, ताकि पशुओं के यौन शोषण के लिए विशेष रूप से सज़ा का प्रावधान किया जा सके। भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धारा 377 के तहत पशुओं के साथ यौन हिंसा करने पर सज़ा का प्रावधान था, लेकिन BNS में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो पशुओं को वैसी ही सुरक्षा देता हो। IPC की धारा 377 के तहत किसी पशु के साथ बलात्कार करना एक गैर-जमानती अपराध माना जाता था, जिसके लिए “आजीवन कारावास या किसी भी प्रकार के कारावास की सज़ा, जिसकी अवधि दस वर्ष तक हो सकती है, और जुर्माना” लगाया जा सकता था।

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