पुणे में सूअरों के साथ क्रूरता के मामले में FIR दर्ज, PETA इंडिया की शिकायत के बाद FIR के कार्यवाई
दो इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर पोस्ट किए गए ऐसे परेशान करने वाले वीडियो सामने आने के बाद, जिनमें सूअरों के साथ गंभीर क्रूरता और उनकी गैरकानूनी तरीके से हत्या करते हुए दिखाया गया था, PETA इंडिया ने पुणे की कार्यकर्ता श्वेता बोरगांवकर और लक्ष्मीनगर पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्री रवींद्र कदम के साथ मिलकर संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज करवाने के लिए कार्रवाई की।
इन वीडियो में सूअरों के साथ की गई अत्यंत क्रूरता की कई घटनाएँ दिखाई गई हैं। एक वीडियो में एक सूअर के बच्चे के पैर बाँधकर उसे पत्थर की एक पटिया पर काबू में रखा गया है, जबकि एक व्यक्ति उसके सिर पर वार कर रहा है। सूअर का बच्चा दर्द और घबराहट में छटपटाता हुआ दिखाई देता है, जबकि उसके आसपास इकट्ठा हुए कई लोग हँसते, तालियाँ बजाते और उसका हौसला बढ़ाते दिखाई देते हैं। अन्य वीडियो में आरोपी और उसके परिवार के सदस्य ऐसे अनुष्ठानों में शामिल दिखाई देते हैं, जिनमें सूअरों की हत्या की जाती प्रतीत होती है। इनमें से एक वीडियो में एक सूअर के होश में रहते हुए उसे चाकू से मारे जाने का दृश्य दिखाई देता है, जबकि बाद के फुटेज में उस पशु का जला हुआ शव दिखाई देता है।
शिकायत पर कार्रवाई करते हुए लक्ष्मीनगर पुलिस थाने ने इस मामले में आरोपी चार लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 3(5) और 325 तथा पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम (PCA), 1960 की धाराओं 3, 11(1)(a), 11(1)(i) और 38 के तहत FIR दर्ज की। BNS, 2023 की धारा 325 के तहत किसी पशु को मारने, ज़हर देने, अपंग करने या उसे बेकार कर देने के कृत्य को संज्ञेय अपराध माना गया है। इसके लिए पाँच वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। BNS की धारा 3(5) के अनुसार, जब कई लोग सभी की साझा मंशा को आगे बढ़ाने के लिए कोई आपराधिक कृत्य करते हैं, तो उस कृत्य के लिए उनमें से प्रत्येक व्यक्ति उसी तरह जिम्मेदार होगा, जैसे वह कृत्य उसने अकेले किया हो। PCA अधिनियम, 1960 की धारा 11 “क्रूरता” को परिभाषित करती है और किसी पशु को अनावश्यक दर्द या पीड़ा पहुँचाने को दंडनीय अपराध बनाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि पशुओं की हत्या केवल लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों में ही की जा सकती है और स्थानीय निकायों को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस आदेश का पालन हो। पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण (बूचड़खाना) नियम, 2001 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य व्यवसायों के लाइसेंस और पंजीकरण) विनियम, 2011 के अनुसार, भोजन के लिए पशुओं की हत्या केवल ऐसे लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों में की जा सकती है, जहाँ संबंधित प्रजाति के अनुसार पशुओं को बेहोश करने के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध हों।
PETA इंडिया की सिफारिश है कि पशुओं के साथ क्रूरता करने वाले लोगों का मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन कराया जाए और उन्हें परामर्श दिया जाए, क्योंकि पशुओं के साथ क्रूरता करना गहरे मनोवैज्ञानिक असंतुलन का संकेत हो सकता है। शोध से पता चलता है कि पशुओं के साथ क्रूरता करने वाले लोग अक्सर दोबारा ऐसा अपराध करते हैं और आगे चलकर अन्य पशुओं, यहाँ तक कि इंसानों को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं। Forensic Research & Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है, “जो लोग पशुओं के साथ क्रूरता करते हैं, उनके अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है। इनमें हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीली दवाओं या अन्य पदार्थों का दुरुपयोग जैसे अपराध शामिल हैं।”
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