विश्व टोफू दिवस से पहले अमृतसर में PETA इंडिया का शुभंकर ‘तेजस टोफू’ ने मुफ्त टोफू टिक्का वितरित किया

Posted on by Surjeet Singh

विश्व टोफू दिवस (26 जुलाई) से पहले, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) का “तेजस टोफू” शुभंकर, जिस पर “पनीर की जगह टोफू अपनाइए! कृपया वीगन बनिए” और “मुफ्त टोफू टिक्का” लिखा था, वीआर अंबरसर मॉल के बाहर वह और PETA इंडिया के अन्य समर्थको ने मिलकर स्वादिष्ट और प्रोटीन से भरपूर टोफू टिक्का वितरित किया। यह कार्यक्रम भारत में बढ़ती वीगन आबादी के समर्थन में आयोजित किया गया, जो पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों के उत्पादन के लिए बछड़ों को उनकी माताओं से अलग करने वाली पश्चिमी शैली की फैक्ट्री जैसी डेयरी फार्म व्यवस्था का समर्थन नहीं करता।

गाय और भैंस अपने बछड़ों से गहरा लगाव रखने वाली स्नेही माताएं होती हैं। लेकिन आधुनिक पश्चिमी शैली के डेयरी उद्योग में कर्मचारियों द्वारा उन्हें जबरन गर्भवती किया जाता है। इसके लिए वे अपने हाथ पशु के मलाशय में डालते हैं और धातु की रॉड के माध्यम से सांड का वीर्य उनकी योनि में पहुंचाते हैं। इस उद्योग में गायों और भैंसों का इस्तेमाल केवल दूध देने वाली मशीन की तरह किया जाता है। जब उनका शरीर कमजोर हो जाता है, तो उन्हें अक्सर सड़कों पर छोड़ दिया जाता है या वध के लिए भेज दिया जाता है। भारत में डेयरी उद्योग ही गोवंश को बीफ और चमड़ा उद्योग तक पहुंचाने का सबसे बड़ा स्रोत है।

टोफू आमतौर पर पनीर की तुलना में सस्ता होता है। इसमें पनीर की अपेक्षा कम कैलोरी और कम वसा होती है, इसमें कोलेस्ट्रॉल नहीं होता और यह प्रोटीन, आयरन तथा कैल्शियम (विशेष रूप से कैल्शियम से तैयार किया गया टोफू) का अच्छा स्रोत है। यह पूरी तरह वीगन है और लैक्टोज इंटोलरेंस (दूध पचाने में दिक्कत) से पीड़ित लोगों के लिए भी सुरक्षित है। भारत के अधिकांश लोग लैक्टोज इंटोलरेंट हैं।

भारत अपने खान-पान की परंपराओं के लिए दुनिया भर में सम्मानित है। स्टैटिस्टा कंज्यूमर इनसाइट्स के एक सर्वेक्षण के अनुसार, मांस-मुक्त भोजन अपनाने के मामले में भारत दुनिया में सबसे आगे है। देश के 9% लोग अब स्वयं को वीगन (पूरी तरह पौधों पर आधारित आहार अपनाने वाला) बताते हैं। माना जाता है कि सबसे पहले वीगन जीवनशैली अपनाने वाले लोग भारत के ही एक क्षेत्र से थे। बताया जाता है कि हिमालय के एक समुदाय ने लगभग 5,000 वर्ष पहले ही वीगन जीवनशैली अपना ली थी।

हर वीगन व्यक्ति हर वर्ष लगभग 200 पशुओं की जान बचाने में मदद करता है। इसके अलावा, वीगन भोजन अपनाने से हृदय रोग, मधुमेह और कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा भी कम होता है। भोजन के लिए पशुपालन जल प्रदूषण और भूमि के अत्यधिक उपयोग का एक प्रमुख कारण है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु संकट के सबसे गंभीर प्रभावों से निपटने के लिए दुनिया को पौधों पर आधारित वीगन भोजन की ओर बढ़ना होगा। जो लोग वीगन जीवनशैली अपनाना चाहते हैं, उनके लिए PETA इंडिया मुफ्त वीगन स्टार्टर किट उपलब्ध कराता है।

और अधिक सुझावों के लिए PETA इंडिया की वीगन गाइड देखें।