सोलापुर की जय हिंद शुगर प्राईवेट लिमिटेड बनी PETA इंडिया का ‘बुल-फ्री’ प्रमाणन प्राप्त करने वाली पहली चीनी मिल

Posted on by Surjeet Singh

सोलापुर स्थित जय हिंद शुगर प्राइवेट लिमिटेड, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) की ओर से “100% बुल-फ्री” प्रमाणन प्राप्त करने वाली पहली चीनी मिल बन गई है। इस पहल के तहत उन चीनी मिलों को मान्यता दी जाती है, जिन्होंने अपने संचालन से बैलों का इस्तेमाल पूरी तरह समाप्त कर दिया है। यह उपलब्धि पशु और मानव कल्याण संबंधी चिंताओं के चलते पशु-मुक्त और पूरी तरह मशीनीकृत परिवहन से होने वाली चीनी सप्लाई की बढ़ती मांग को दर्शाता है।, जिसे भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खरीदारों का समर्थन मिल रहा है। यह प्रमाणन एनिमल राहत की शुगरकेन इंडस्ट्री मैकेनाइजेशन परियोजना का समर्थन करता है, जो चीनी मिलों को ट्रैक्टर जैसे मशीनी विकल्प अपनाने में मदद कर रहा है, जिससे बैलों को भारी-भरकम गन्ना गाड़ियों को खींचने के कठिन श्रम से मुक्ति मिल रही है।

100-Percent Bull-Free Logo

Credit: PETA India

“हमें PETA इंडिया का 100% बुल-फ्री प्रमाणन प्राप्त करने वाली पहली मिल बनने पर गर्व है। बैलगाड़ियों के स्थान पर पूर्णतः मशीनीकृत परिवहन प्रणाली अपनाने से हमारे संचालन अधिक कुशल और पशु-अनुकूल बने हैं। हमें यह भी विश्वास है कि इससे हमारे कर्मचारियों के स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार होगा।”

– श्री गणेश माने देशमुख, जय हिंद शुगर प्रा. लि. के चेयरमैन

बैलों का स्वभाव अत्यंत सामाजिक एवं संवेदनशील होता है। वे अन्य बैलों और गायों के साथ गहरे संबंध बनाते हैं और उनसे अलग किए जाने पर तनाव महसूस कर सकते हैं। इसके बावजूद, चीनी उद्योग में बैलों को अत्यंत कष्टदायक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। उन्हें भीषण गर्मी में भारी-भरकम गाड़ियाँ खींचने के लिए मजबूर किया जाता है, जबकि उन्हें पर्याप्त आराम, भोजन या पानी नहीं मिलता। कई मामलों में बैलों से कानूनी सीमा से दोगुना तक भार ढुलवाया जाता है। उन्हें नियंत्रित करने के लिए नाक में डाली जाने वाली रस्सियों तथा नुकीले बेलनाकार औजारों, कीलों वाले डंडों और कांटेदार तारों जैसे हिंसक साधनों का उपयोग किया जाता है, जिससे उन्हें अक्सर गंभीर चोटें आती हैं।

Tell Unilever to Choose Tractors Instead of Bulls for Sugar Supply पेप्सी से कहें कि चीनी की आपूर्ति के लिए बैलों की जगह ट्रैक्टरों का इस्तेमाल करे।