PETA इंडिया का ‘100% बैल-मुक्त’ प्रमाणन क्या है?
PETA इंडिया का ‘100% बैल-मुक्त’ प्रमाणन उन भारतीय चीनी मिलों (प्रसंस्करण एवं रिफाइनिंग इकाइयों) को प्रदान किया जाता है जिन्होंने गन्ने और चीनी उत्पादों के परिवहन तथा हैंडलिंग के लिए केवल मशीनीकृत साधनों का उपयोग करने की संवेदनशील और दूरदर्शी प्रतिबद्धता अपनाई है। इससे बैलों या अन्य पशुओं को कठिन एवं भारी श्रम कार्यों से मुक्ति मिलती है, साथ ही मानव श्रमिकों के कार्य-परिस्थितियों में भी सुधार होता है।
यह प्रमाणन चीनी खरीदने वाली कंपनियों को ऐसे खरीद निर्णय लेने में सहायता करता है जो उनके ग्राहकों के मूल्यों और पशु कल्याण संबंधी अपेक्षाओं के अनुरूप हों।
बैलों पर होने वाले अत्याचार को समाप्त करें: गन्ना परिवहन व्यवस्था में सुधार लाएँ
हजारों बैलों को गन्ने से लदी भारी गाड़ियाँ खींचने के लिए मजबूर किया जाता है, जिनका भार अक्सर कानूनी सीमा से कहीं अधिक होता है। उन्हें कठोर और अत्यंत कष्टदायक परिस्थितियों में काम करना पड़ता है।
अत्यधिक थकान, भूख, प्यास, मारपीट, नुकीले या दर्द पहुँचाने वाले उपकरणों के उपयोग तथा अन्य हिंसक व्यवहार के कारण बैलों को भारी पीड़ा सहनी पड़ती है। तेज़ धूप में घंटों तक लगातार काम करने के दौरान वे गंभीर शारीरिक कष्ट झेलते हैं और अंततः उनके पैरों एवं जोड़ों में स्थायी और असाध्य समस्याएँ विकसित हो जाती हैं।
शोषण का अंत: बैलों और श्रमिकों के लिए एक नए युग की शुरुआत
यह पुरानी व्यवस्था पशुओं के साथ क्रूरता, गरीबी और कई मानवाधिकार समस्याओं को बढ़ाती है। बैलों से गन्ना ढोने का काम धीमा और कम प्रभावी होता है क्योंकि वे थक जाते हैं और अधिक वजन नहीं उठा सकते, फिर भी उन पर बहुत ज्यादा बोझ डाला जाता है।
इस वजह से उन परिवारों को बहुत लंबे समय तक काम करना पड़ता है और घर के लगभग सभी लोगों को काम में लगना पड़ता है। इससे कई बार बच्चों को भी काम करना पड़ता है और काम की परिस्थितियाँ असुरक्षित हो जाती हैं।
जब बैल घायल हो जाते हैं या काम करने लायक नहीं रहते, तो उन पर निर्भर परिवारों की आय भी रुक जाती है। अगर मशीनों और आधुनिक साधनों का उपयोग किया जाए, तो पशुओं को तकलीफ से बचाया जा सकता है और श्रमिकों को सुरक्षित, बेहतर और स्थिर काम मिल सकता है।
मशीनीकरण बैलों और मनुष्यों दोनों के लिए कैसे लाभदायक है?
मिनी ट्रैक्टर 8.5 टन से ज्यादा गन्ना ले जा सकते हैं और बड़े ट्रैक्टर 18 टन से भी ज्यादा। यह एक बैल की तुलना में चार गुना से अधिक है। इससे काम करीब 20% जल्दी पूरा हो जाता है, जिससे मजदूरों की कमाई बढ़ती है और उनका काम ज्यादा सुरक्षित और बेहतर होता है।
इसके अलावा, लोग ट्रैक्टर का इस्तेमाल सालभर दूसरे कामों में भी करके अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
सबसे जरूरी बात यह है कि ट्रैक्टर के इस्तेमाल से बैलों पर भारी बोझ, मारपीट और गलत व्यवहार खत्म होता है। इससे पशुओं को तकलीफ नहीं होती और उनका जीवन बेहतर होता है।
उन श्रमिकों की जुबानी सुनिए जिन्होंने बैलों के स्थान पर ट्रैक्टरों का उपयोग अपनाया है:


