पुणे में समुदायिक कुत्ते पर तेज़ाब फेंकने वाले आरोपी की गिरफ्तारी में मददगार सूचना देने पर PETA इंडिया देगा 50,000 रुपये तक का इनाम, एफआईआर दर्ज
पुणे में समुदायिक पशुओं पर बार-बार हो रहे तेज़ाब के हमलों और विशेष रूप से एक पशु पर हुए हमले की चिंताजनक जानकारी मिलने पर, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) ने सूचनादाता अजय फवाडे और पुणे ग्रामीण पुलिस के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि तुरंत प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की जाए। आरोपित व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान फिलहाल अज्ञात है, और पुलिस जानकारी जुटाने के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज की सक्रिय रूप से जांच कर रही है। सहायता के लिए, PETA इंडिया, इस तेज़ाब हमले के लिए ज़िम्मेदार व्यक्ति या व्यक्तियों की गिरफ़्तारी और दोषसिद्धि तक पहुँचाने वाली जानकारी देने वाले किसी भी व्यक्ति को 50,000 रुपये तक का इनाम दे रहा है।
तेज़ाब हमले की नवीनतम घटना 9 मई की रात को इको वैली सोसाइटी, फेज़ वन, कण्हे फाटा, मावल तालुका, पुणे – 412 106 के पास हुई। अजय फवाडे ने बताया कि इसी तरह का एक तेज़ाब हमला फरवरी में भी हुआ था, हालांकि उस समय किए गए प्रयासों के बावजूद अपराधियों की पहचान नहीं हो सकी। बताया गया है कि इस क्षेत्र में समुदायिक पशुओं के खिलाफ जानबूझकर क्रूरता का एक लगातार पैटर्न देखा जा रहा है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 325 और पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए), 1960 की धारा 11(1)(a) के तहत एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
बीएनएस, 2023 की धारा 325 किसी भी पशु को अपंग बनाने या मारने को संज्ञेय अपराध मानती है और इसके लिए पाँच वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान करती है। पीसीए अधिनियम, 1960 की धारा 11 “क्रूरता” को परिभाषित करती है और किसी भी पशु को अनावश्यक पीड़ा या कष्ट पहुँचाने को दंडनीय अपराध बनाती है।
तेज़ाबी हमले में घायल पशु की जलने की कई चोटें आई हैं, उसे पशु-चिकित्सीय सहायता प्रदान की गई है, और वर्तमान में वह स्थानीय देखभालकर्ताओं की निगरानी में है। इस अपराध के बारे में जानकारी रखने वाला कोई भी व्यक्ति PETA इंडिया से [email protected] पर संपर्क कर सकता है। अनुरोध करने पर सूचनादाताओं की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
PETA इंडिया की सिफारिश है कि पशुओं के साथ दुर्व्यवहार करने वालों का मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन कराया जाए और उन्हें परामर्श दिया जाए, क्योंकि पशुओं के साथ अत्याचार गहरी मानसिक विकृति का संकेत होता है। शोध से पता चलता है कि जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता करते हैं, वे अक्सर बार-बार अपराध करने वाले होते हैं और आगे चलकर अन्य पशुओं तथा मनुष्यों को भी नुकसान पहुँचाते हैं। फॉरेंसिक रिसर्च एंड क्रिमिनोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है, “जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता में शामिल होते हैं, उनके द्वारा हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग जैसे अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है।”
PETA इंडिया लंबे समय से पीसीए अधिनियम, 1960 को मज़बूत बनाने के लिए अभियान चला रहा है, क्योंकि इसमें पुराने और अपर्याप्त दंड प्रावधान हैं, जैसे पहली बार दोषी पाए गए अपराधियों के लिए अधिकतम केवल 50 रुपये का जुर्माना (हालाँकि बीएनएस, 2023 में अधिक कठोर दंड निर्धारित किए गए हैं)। पीसीए अधिनियम में संशोधन के संबंध में केंद्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में, PETA इंडिया ने पशुओं के प्रति क्रूरता के लिए कठोर दंड के प्रावधान बनाने की सिफारिश की है।
पशुओं पर क्रूरता की रिपोर्ट करें
पशुओं के साथ दुर्व्यवहार करने वालों हेतु कठोर दंड की मांग करें

