PETA इंडिया की अपील के बाद दिल्ली के मशहूर किडज़िला फ्यूज़न ने बच्चों द्वारा ज़िंदा मछलियों को पकड़ने वाली गतिविधि हटा दी।

Posted on by Surjeet Singh

राजौरी गार्डन स्थित आरक्यूब मोनाड मॉल के इनडोर किड्स प्ले ज़ोन, “किडज़िला  फ्यूज़न” में बच्चों को खेल गतिविधि के रूप में जाल की मदद से कंटेनरों से जीवित मछलियाँ पकड़ने वाले खेल की जानकारी मिलने के बाद PETA इंडिया की अपील पर Kidzzilla Fuzion ने इस गतिविधि पर तुरंत रोक लगा दी और भविष्य में इसे दोबारा शुरू ना करने की पुष्टि की। इस तरह के आयोजन पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 का उल्लंघन है, जो मछलियों को कष्ट पहुँचाने पर रोक लगाता है।

मछलियों को जाल में पकड़ने से वे तनावग्रस्त हो जाती हैं और घायल भी हो सकती हैं। इसके अलावा, मछलियों और अन्य समुद्री जीवों को तंग और गंदे कंटेनरों में बंद रखने से उन्हें पर्याप्त ऑक्सीजन जैसी आवश्यक चीज़ों से वंचित होना पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप वे आघात का शिकार हो जाते हैं एवं अत्यधिक पीड़ा सहने के कारण समय से पहले ही मर जाते हैं। यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए भी जोखिमपूर्ण है, क्योंकि यदि पानी स्थिर या बिना फ़िल्टर का हो तो उसमें बैक्टीरिया और बीमारियाँ फैल सकती हैं।

मछलियाँ, एक बुद्धिमान, सामाजिक प्राणी हैं जिनका व्यक्तित्व अनूठा होता हैं, और वे स्तनधारियों की भांति ही तीव्र दर्द महसूस कर सकती हैं। एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि पानी से बाहर निकाली गई मछलियाँ, उनके मस्तिष्क बंद होने अथवा बेहोश होने से पहले, कम से कम 10 मिनट तक शरीर को विकलांग बना देने वाले अत्यंत असहनीय दर्द का अनुभव करती हैं। मछलियों में संज्ञान के विकास का अध्ययन कर रहे मक्वेरी विश्वविद्यालय के जीवविज्ञानी डॉ. कूलम ब्राउन कहते हैं, “मछलियाँ जितनी दिखती हैं, उससे कहीं अधिक बुद्धिमान होती हैं। यादाश्त के मामले में उनकी संज्ञानात्मक शक्तियाँ ‘उच्च’ स्तनधारियों, सहित गैर-मानव प्राइमेट्स के बराबर या उनसे अधिक होती हैं।”

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