PETA इंडिया के समर्थक “हम सभी पशु हैं” अभियान के अंतर्गत बकरी और सूअर के शवों के रूप में लटके

Posted on by Surjeet Singh

PETA इंडिया और आश्रय फाउंडेशन की समर्थक बुधवार को परिवर्तन चौक पर एक प्रभावशाली अभियान के अंतर्गत, खून से रंगे हुए बॉडीसूट में, एक “सूअर” और “बकरी” के शवों के साथ हुक से लटकी। यह अभियान याद दिलाता है कि कोई भी जीव महज किसी के पल भर के मुँह के स्वाद के लिए मारा अथवा चाकू से काटे जाने का हकदार नही है।

हमारे प्रिय कुत्तों और बिल्लियों के समान ही, सूअर और बकरियाँ अत्यधिक सामाजिक, बुद्धिमान तथा भावनात्मक संबंध बनाने वाले अनूठे व्यक्तित्व वाले पशु हैं। सूअर सपने देखने, अपने नाम पहचानने तथा अन्य सूअरों के सुखी या दुखी होने पर उनके प्रति सहानुभूति दिखाने के लिए जाने जाते हैं। बकरियाँ चंचल होती हैं, पहेलियाँ सुलझाने और दरवाज़े खोलने में निपुण होती हैं, तथा उनकी यादाश्त भी बहुत अच्छी होती है।

आज के मांस, अंडे और डेयरी उद्योग में, भारी संख्या में पशुओं को विशाल गोदामों में विशेष कैद में पाला जाता है, बकरियों के गले धारदार चाकू से काटे जाते हैं जबकि वे होश में होती हैं, सूअरों को चीखने पर भी उनके हृदय में चाकू मारा जाता है, मुर्गियों को उनके साथियों के सामने ही मार दिया जाता है, मछलियों को दम घुट के मरने वाली मौत दी जाती है और जीवित अवस्था में होने के दौरान ही उन्हें चीर दिया जाता है। अंडे देने वाली मुर्गियाँ एक ऐसे छोटे पिंजरे में कैद रहती हैं जहाँ एक भी पंख फैलाना संभव नहीं। गायों और भैंसों को इतनी अधिक संख्या में वाहनों में ठूंस दिया जाता है कि बूचड़खानों पहुँचने से पहले ही उनकी हड्डियाँ टूट जाती हैं, फिर उन्हें कसाईखाने में घसीटा जाता है। नर चूजे, जो अंडे नहीं दे सकते, उन्हें आमतौर पर अंडा उद्योग में बेकार मानकर जिंदा जला दिए जाता है, डुबो दिया जाता है, कुचल कर मार दिया जाता है, मछलियों को जिंदा खिला दिया जाता है या अन्य क्रूर तरीकों से मार दिया जाता है। उसी तरह, गाय के नर बछड़ों को, जो दूध नहीं दे सकते, जन्म के तुरंत बाद उनकी माताओं से अलग कर दिया जाता है और उन्हें भूखा रखा जाता है, सड़कों पर छोड़ दिया जाता है अथवा गोमांस व चमड़े के लिए मार दिया जाता है।

प्रत्येक व्यक्ति जो वीगन जीवनशैली अपनाता है वह सालाना लगभग 200 पशुओं की जान बचा लेता है। इसके अतिरिक्त, वीगन भोजन करने वाले लोगों में हृदय रोग, मधुमेह तथा कैंसर जैसी बीमारियों का जोखिम कम रहता हैं। भोजन के लिए पशुओं का पालन जल प्रदूषण, जल तथा भूमि उपयोग का प्रमुख कारण है, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु आपदा के सबसे बुरे प्रभावों से लड़ने के लिए वैश्विक स्तर पर वीगन आहार अपनाना आवश्यक है। PETA इंडिया उन लोगों के लिए मुफ्त वीगन स्टार्टर किट प्रदान करता है जो परिवर्तन के लिए तैयार हैं।

वीगन जीवनशैली अपनाने का संकल्प