‘विश्व मांस मुक्त दिवस’ पर चंडीगढ़ में PETA इंडिया समर्थक बने ‘फ्रोजन मांस’, वीगन जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया

Posted on by Surjeet Singh

विश्व मांस मुक्त दिवस (15 जून 2025) से पहले शुक्रवार को PETA इंडिया के समर्थकों ने एक अनोखे प्रदर्शन के ज़रिए लोगों से मांस छोड़ने और करुणामय जीवनशैली अपनाने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान कुछ समर्थकों ने अपने शरीर पर नकली “खून” लगाकर सेलोफेन में लिपटी बड़ी ट्रे में ऐसे लेटकर भाग लिया जैसे वे फ्रीज़र में माँस के पीस रखकर बेचे जाते हैं। वहीं अन्य समर्थक “मांस मतलब हत्या” जैसे संदेश वाले पोस्टर हाथ में लेकर खड़े रहे। इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन के माध्यम से PETA इंडिया ने यह संदेश दिया कि इंसानों की ही तरह सभी पशु भी मांस, खून और हड्डियों से बने होते हैं। पशु भी हमारी ही तरह दर्द महसूस करते हैं और उनमें भी भावनाएं होती हैं। मांस खाना वास्तव में एक ऐसे पशु की लाश खाना है जिसे जीते-जी पीड़ा दी गई होती है।

हम लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर रहे हैं कि मांस वास्तव में क्या होता है। मांस खाना मतलब एक ऐसे पशु की लाश खाना है जिसे प्रताड़ित किया गया था और जो मरना नहीं चाहता था। पशुओं को दुखभरी ज़िंदगी और दर्दनाक मौत से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है, स्वादिष्ट और सेहतमंद वीगन भोजन को चुनना।

PETA इंडिया जो इस धारणा में विश्वास रखता है कि “पशु मनुष्यों का भोजन बनने के लिए नहीं है”, यह बात उजागर करता है कि भोजन के लिए मारे जाने वाले पशु भयंकर पीड़ा झेलते हैं। यह सच्चाई PETA इंडिया  की व्यापक रूप से प्रचारित और झकझोर देने वाली वीडियो डॉक्यूमेंट्री “ग्लास वॉल्स” में साफ़ दिखाई देती है। माँस के लिए होने वाले पशुपालन में मुर्गों को हज़ारों की संख्या में तंग और बदबूदार शेड्स में ठूंस दिया जाता है, जहाँ उन्हें जमा हुई गंदगी और मलमूत्र से आने वाली अमोनिया की तीव्र बदबू में खड़ा रहना पड़ता है, और वे अपनी हर प्राकृतिक ज़रूरत से वंचित रहते हैं। इन मुर्गों और अन्य पशुओं को ट्रकों में इस कदर ठूंस-ठूंसकर भर दिया जाता है कि कई बार रास्ते में ही उनकी हड्डियाँ टूट जाती हैं, दम घुट जाता है या उनकी मौत हो जाती है। बूचड़खानों में बकरियों, भेड़ों और अन्य पशुओं का गला अक्सर कम धार वाले चाकुओं से बेरहमी से रेत दिया जाता है, और जीवित मछलियाँ उस नौका पर ही मर जाती हैं जहां उन्हें पानी से निकाल कर रखा जाता है या फिर उनके शरीर को चीर दिया जाता है।

वीगन जीवनशैली अपनाने वाला हर व्यक्ति हर साल लगभग 200 पशुओं को भयानक पीड़ा और दर्दनाक मौत से बचाता है। इसके अलावा, भोजन के लिए पशुओं को पालना जल प्रदूषण और जल व भूमि के अत्यधिक उपयोग के प्रमुख कारणों में से एक है। संयुक्त राष्ट्र  की एक रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु संकट के सबसे गंभीर प्रभावों से बचने के लिए विश्व स्तर पर वीगन भोजन की ओर बदलाव आवश्यक है।

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