उडुपी: पशुओं के साथ लगातार दुर्व्यवहार करने वाले केंद्र पर पाँचवीं कार्रवाई — PETA इंडिया के प्रयास के बाद दर्ज हुई FIR, पिंजरों को हटाया गया और 16 और पशुओं को बचाया गया।
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10 October 2025
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उडुपी में श्री सुधीन्द्र ऐथल द्वारा संचालित तथाकथित “एनिमल रेस्क्यू सेंटर” में सैकड़ों पशु लंबे समय से अमानवीय परिस्थितियों में पीड़ित थे। सलिग्राम पट्टण पंचायत, पशुपालन विभाग और उपायुक्त एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी कई बार के बंदी आदेशों का पालन न करने के बाद गुरुवार को पाँचवीं छापेमारी की गई, जिसमें पिंजरों को हटाया गया और 16 और पशुओं को बचाया गया। ऐसे पशु संकलक अक्सर स्वयं को पशु शेल्टर के रूप में प्रस्तुत करते हैं, लेकिन वास्तव में वे मानसिक रूप से बड़ी संख्या में पशुओं को इकट्ठा कर रखने की बाध्यता से ग्रसित होते हैं, जिनकी वे सही देखभाल नहीं कर पाते। इसका परिणाम गंदगी, सार्वजनिक असुविधा, भूख, प्यास, बीमारियाँ और भारी पशु पीड़ा के रूप में सामने आता है। अब तक पाँच छापेमारियों में इस स्थान से 300 से अधिक पशुओं को बचाया जा चुका है।
कोटा पुलिस थाने ने जिला उपायुक्त, जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पशुपालन विभाग द्वारा दर्ज की गई शिकायत के आधार पर, श्री ऐथल को सभी पिंजरे हटाने के लिए जारी नोटिस का पालन न करने पर, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 3 और 11 के तहत एफआईआर दर्ज की। यह कार्रवाई फिर से उपायुक्त और जिला मजिस्ट्रेट के निर्देश पर की गई थी ताकि उन्हें और अधिक पशु जमा करने से रोका जा सके। PETA इंडिया ने उदुपी सोसाइटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स, उदुपी पुलिस, सलिग्राम पट्टण पंचायत और पशुपालन विभाग के साथ मिलकर सभी पिंजरों को हटाने में सहायता की, सिवाय उन तीन के जो स्थायी रूप से सीमेंट से बने हुए थे। इस अभियान में 16 और पशुओं को बचाया गया, जिनमें कुत्ते के 13 बच्चे, दो बिल्ली के बच्चे और एक अर्ध-वयस्क कुत्ता शामिल थे। सभी जब्त पिंजरों को हटाने के बाद कोटा पुलिस थाने के परिसर में स्थानांतरित किया गया। यह कार्रवाई 27 सितंबर को की गई छापेमारी के कुछ ही समय बाद हुई, जिसमें 100 पशुओं को बचाया गया था, जो श्री ऐथल की लगातार पशु संकलन की मानसिक प्रवृत्ति को दर्शाता है।
इस संकलक के पास से अब तक बचाए गए 300 से अधिक पशु अत्यधिक निर्जलित और कमजोर पाए गए। उनमें वायरल संक्रमण, आंखों की समस्याएं, चोटें, परजीवी संक्रमण थे और वे गंदगी से सने हुए थे। कई पशु बेहद दुबले-पतले थे और कई खतरनाक संक्रामक बीमारियों जैसे कैनाइन डिस्टेंपर, पार्वोवायरस और फेलाइन हर्पीसवायरस से पीड़ित थे। बचाए गए प्राणियों में कुत्ते, बिल्लियाँ, पिल्ले, बिल्ली के बच्चे, विदेशी विलुप्तप्राय प्रजातियाँ, हैम्स्टर, लव बर्ड्स और वन्यजीव जैसे कोबरा, सिवेट कैट, ब्लैक काइट, इंडियन पैराकीट और बोनट मकाक शामिल थे।
श्री ऐथल, जो इस सुविधा का संचालन करते हैं, का बार-बार वन्यजीव और अन्य पशुओं को बेहद अस्वच्छ और अपर्याप्त परिस्थितियों में रखने का लंबा और दर्ज इतिहास रहा है, बावजूद इसके कि उन्हें कई बार चेतावनी, आधिकारिक नोटिस और आदेश जारी किए गए। यह भी पाया गया कि वे वन्यजीव व्यापार में संलिप्त थे और पशुओं को जनता को बेचते थे। 8 जनवरी को कुंदापुरा वन प्रभाग द्वारा एक छापेमारी की गई, जिसके बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, कर्नाटक के निर्देश पर एक प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट (POR) दर्ज की गई। यह कार्रवाई PETA इंडिया की उस शिकायत के बाद की गई थी जिसमें विलुप्तप्राय स्थानीय वन्यजीवों के अवैध कब्जे और बिक्री का आरोप लगाया गया था।
PETA इंडिया इस क्रूर और अवैध केंद्र के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए सभी अधिकारियों की सराहना करता है, विशेष रूप से एफआईआर दर्ज करने और सभी पिंजरों को हटाने के निर्देश जारी करने के लिए। हम विशेष रूप से पुलिस अधीक्षक (एसपी) श्री हरिराम शंकर, आईपीएस; उपायुक्त और जिला मजिस्ट्रेट, श्रीमती स्वरूपा टी. के., आईएएस; और सलिग्राम पट्टण पंचायत के मुख्य अधिकारी, श्री अजय भंडारकर का धन्यवाद करते हैं। PETA इंडिया जनता से दृढ़ता से अपील करता है कि वे ब्रीडरों और पेट शॉप्स का समर्थन न करें, जिनमें से अधिकांश अवैध रूप से संचालित हैं, और उन संकलकों (hoarders) की शिकायत करें जो स्वयं को पशु रेस्क्यूकर्ता बताते हैं, लेकिन वास्तव में मजबूरीवश पशुओं को इकट्ठा कर उन्हें सड़ने-गलने के लिए छोड़ देते हैं।
PETA इंडिया संबंधित अधिकारियों से यह भी आग्रह करता है कि वे तत्काल और निर्णायक कदम उठाएँ — केंद्र में मौजूद शेष स्थायी पिंजरों को पूरी तरह से तोड़कर नष्ट किया जाए, और उन पशुओं की भलाई सुनिश्चित की जाए जिन्हें श्री ऐथल अपनी “लाइवस्टॉक” कहते हैं लेकिन जो भीषण परिस्थितियों में रखे गए हैं। यह कदम आगे किसी भी तरह की क्रूरता को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि ये ढाँचे दोबारा असहाय पशुओं से न भर दिए जाएँ, जिन्हें भीड़भाड़, उपेक्षा और अत्याचार का सामना करना पड़ता है।
वे केंद्र जो “पेट” पशुओं के बोर्डिंग, ब्रीडिंग या बिक्री से जुड़े हैं, उन्हें पशु क्रूरता निवारण (कुत्ता प्रजनन और विपणन) नियम, 2017 और पशु क्रूरता निवारण (पेट शॉप) नियम, 2018, जो पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत बनाए गए हैं, के अनुसार राज्य पशु कल्याण बोर्ड में पंजीकृत होना अनिवार्य है।
26 मई 2020 को कर्नाटक सरकार के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के आयुक्त द्वारा जारी एक आदेश में राज्य में बिना पंजीकरण वाले कुत्ता प्रजनन केंद्रों और पेट शॉप्स के संचालन पर प्रतिबंध लगाया गया था। यह आदेश सभी जिला कलेक्टरों और जिला एसपीसीए अध्यक्षों को संबोधित था, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि जो भी पेट शॉप या कुत्ता प्रजनन केंद्र कर्नाटक एनिमल वेलफेयर बोर्ड (KAWB) में पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें उपरोक्त नियमों के अनुसार संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
PETA इंडिया जो इस धारणा में विश्वास रखता है कि “पशु हमारा दुर्व्यवहार सहने के लिए नहीं है”, प्रजातिवाद का विरोध करता है क्योंकि यह एक ऐसी विचारधारा है जिसमें मनुष्य इस संसार में स्वयं को सर्वोपरि मानकर अपनी अलग अलग जरूरतों के अनुसार अन्य प्रजातियों का शोषण करना अपना अधिकार समझता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाईट PETAIndia.com पर जाएँ और X, Facebook, व Instagram पर हमें फॉलो करें।
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