PETA इंडिया की सूचना पर रुड़की में 34 तोते बचाए गए, दो आरोपी गिरफ्तार
For Immediate Release:
28 April 2025
Contact:
Meet Ashar; [email protected]
Hiraj Laljani; [email protected]
रुड़की –पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया से मिली सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए हरिद्वार वन विभाग ने महिग्राम मछी मोहल्ला, रामपुर रोड, पुरानी तहसील, रुड़की – 247667 में स्थित दुकानों से 34 संरक्षित प्रजाति के रोज़-रिंग्ड और एलेक्ज़ेंड्राइन तोतों को बचाया।
इस रेस्क्यू ऑपरेशन की वीडियो फुटेज मांगे जाने पर उपलब्ध कारवाई जाएंगी।
इलाके से गुजरते समय जब PETA इंडिया के एक सतर्क कर्मचारी की नज़र दो दुकानों में पिंजरों में बंद तोतों पर पड़ी, तो इस अवैध बिक्री के बारे में पता चला। छोटे-छोटे पिंजरों में कैद इन मासूम पक्षियों की दुर्दशा देखकर PETA इंडिया ने उत्तराखंड वन विभाग के हरिद्वार वन प्रभाग को शिकायत भेजी। संस्था ने न केवल इन तोतों को तत्काल छुड़ाने की मांग की, बल्कि जिम्मेदार दुकानदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का भी आग्रह किया।
हरिद्वार के प्रभागीय वन अधिकारी के निर्देश पर रुड़की वन रेंज की टीम ने 24 अप्रैल को छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान शोएब और सरिक नामक दो व्यक्तियों को पकड़ा गया है। आरोप है कि ये दोनों अपनी मांस की दुकानों में अवैध रूप से प्रतिबंधित प्रजाति के तोतों को पिंजरों में कैद कर बेचने का प्रयास कर रहे थे। बचाव अभियान के दौरान मौके से कई अन्य संरक्षित तोते भी बरामद किए गए, जिन्हें गैरकानूनी रूप से कैद में रखा गया था।
आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 2(16), 9, 39, 49, 50 और 51 के तहत प्राथमिक अपराध रिपोर्ट (POR) दर्ज की गई है। जानकारी के अनुसार, दोनों अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें जिला जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। गौरतलब है कि रोज़-रिंग्ड और एलेक्ज़ेंड्राइन तोते वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची II के तहत संरक्षित प्रजातियों में शामिल हैं। इन प्रजातियों की ख़रीद, बिक्री या कब्ज़े में रखना कानूनन अपराध है, जिसमें एक लाख रुपये तक का जुर्माना, तीन साल तक की जेल, या दोनों सज़ा का प्रावधान है।
PETA इंडिया के क्रूएल्टी रिस्पॉन्स कॉर्डिनेटर वीरेंद्र सिंह ने कहा, “PETA इंडिया हरिद्वार वन प्रभाग, विशेष रूप से श्री वैभव सिंह (IFS), प्रभागीय वन अधिकारी, हरिद्वार; श्रीमती पूनम कैंथोला, उप प्रभागीय वन अधिकारी, हरिद्वार; और श्री सुनील दत्त बलोनी, उप प्रभागीय वन अधिकारी, रुड़की, का आभार व्यक्त करता है, जिन्होंने तोतों को तुरंत बचाया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। पिंजरे में बंद पक्षियों के जीवन में कोई खुशी नहीं होती। उनका असली घर खुला आसमान है, न कि पिंजरा। PETA इंडिया सभी से अपील करता है कि अगर वे किसी पक्षी को पिंजरे में कैद देखें, तो उसे तुरंत स्थानीय वन विभाग या किसी पशु संरक्षण समूह को सौंपें, ताकि उसका पुनर्वास हो सके।“
यह अभियान भारत भर में संरक्षित प्रजातियों के पक्षियों के अवैध व्यापार और तस्करी के खिलाफ, वन विभागों और अन्य संबंधित अधिकारियों के सहयोग से चलाए जा रहे PETA इंडिया के सतत प्रयासों में से एक है।
दिसंबर 2024 में, PETA इंडिया की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए जामा मस्जिद पुलिस स्टेशन ने जामा मस्जिद के पास स्थित कबूतर मार्केट में दुकानों से लगभग 150 पक्षियों को बरामद किया था। इन पक्षियों में एलेक्ज़ेंड्राइन, रोज़-रिंग्ड और प्लम-हेडेड तोते के साथ-साथ कबूतर भी शामिल थे।
अगस्त 2024 में, PETA इंडिया की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश वन विभाग के कानपुर मंडल ने कानपुर के परेड बाज़ार में दुकानों से 700 से अधिक पक्षियों को बरामद किया था। इन पक्षियों में रोज़-रिंग्ड, प्लम-हेडेड और एलेक्ज़ेंड्राइन तोते, सैकड़ों मुनिया और इंडियन सिल्वरबिल्स, और एक कॉमन हिल म्यना शामिल थी।
जुलाई 2024 में, PETA इंडिया की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए दिल्ली वन विभाग के केंद्रीय मंडल ने जामा मस्जिद के पास कबूतर मार्केट में स्थित दुकानों से 1000 से अधिक पक्षियों को बरामद किया था। इन पक्षियों में एलेक्ज़ेंड्राइन तोते, फिंच और अन्य प्रजातियाँ शामिल थीं।
मार्च 2022 में, PETA इंडिया की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने कबूतर मार्केट में अवैध व्यापारियों के कब्जे से हजारों छोटे-बड़े पक्षियों को बरामद किया था। बरामद किए गए पक्षियों में पिंक-नेक्ड और प्लम-हेडेड तोते, सैकड़ों मुनिया, दो कॉमन हिल म्यना और एक कबूतर शामिल थे।
अवैध पक्षी व्यापार में अनगिनत पक्षियों को उनके परिवारों से जबरन अलग कर लिया जाता है और उन्हें उन सभी चीज़ों से वंचित कर दिया जाता है जो उनके लिए स्वाभाविक और जीवन के लिए आवश्यक हैं, ताकि उन्हें “पालतू जीव” के रूप में बेचा जा सके या फर्जी भाग्य बताने वाले पक्षी के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। नन्हे पक्षियों को अक्सर उनके घोंसलों से चुरा लिया जाता है, जबकि अन्य पक्षी जालों और फंदों में फंसकर भय और घबराहट में तड़पते हैं, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं या जान गंवा सकते हैं। पकड़े गए पक्षियों को छोटे-छोटे डिब्बों में ठूंस दिया जाता है, और अनुमान है कि लगभग 60% पक्षी यात्रा के दौरान ही टूटे पंखों या पैरों, प्यास या गहरी दहशत के चलते दम तोड़ देते हैं। जो कुछ दुर्भाग्य से जीवित बच पाते हैं, वे भी कैद में कुपोषण, अकेलापन, अवसाद और घोर तनाव से भरे अंधकारमय जीवन का सामना करते हैं।
PETA इंडिया जो इस धारणा में विश्वास रखता है कि “पशु मनुष्यों द्वारा शोषित होने के लिए नहीं है”, प्रजातिवाद का विरोध करता है क्योंकि यह एक ऐसी विचारधारा है जिसमें मनुष्य इस संसार में स्वयं को सर्वोपरि मानकर अपनी अलग अलग जरूरतों के अनुसार अन्य प्रजातियों का शोषण करना अपना अधिकार समझता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाईट PETAIndia.com पर जाएँ और X, Facebook, व Instagram पर हमें फॉलो करें।
#