कोलकाता: सफाई कर्मचारियों की मौत के बाद PETA इंडिया का चमड़ा उद्योग के खिलाफ खास ड्रेस में प्रदर्शन
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19 February 2025
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कोलकाता – कोलकाता के लेदर कॉम्प्लेक्स में चमड़ा उद्योग से निकलने वाले जहरीले कचरे की चपेट में आकर तीन सफाई कर्मचारियों की दुखद मौत के बाद, PETA इंडिया के समर्थक गुरुवार को बायोहैज़र्ड सूट पहनकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह प्रदर्शनकारी अपने हाथों में “जहरीला प्रदूषण रोके, मांस-मुक्त जीवन अपनाएं!” के नारे लिखे बोर्ड पकड़कर चमड़ा उद्योग से होने वाले खतरों पर जनता का ध्यान आकर्षित करेंगे और उन्हें वीगन फैशन अपनाने की अपील करेंगे।
इस प्रदर्शन का उद्देश्य चमड़ा उद्योग से निकलने वाले जानलेवा रसायन और के खिलाफ लोगों को सचेत करने के लिए किया गया है, जो न केवल मनुष्यों, बल्कि पशुओं और पर्यावरण पर भी गहरा असर डालता है। DT Next के अनुसार, मौत का शिकार हुए तीनों कर्मचारी एक बंद मेनहोल को साफ कर रहे थे, तभी एक कर्मचारी फिसलकर गंदे पानी में गिर गया। उसकी जान बचाने के लिए बाकी दोनों साथी भी विषैले पानी में कूद गए और फिर ज़हरीली गैसों के संपर्क में आने से दर्दनाक मौत का शिकार बन गए।
प्रदर्शन का समय और स्थान:
समय: गुरुवार, 20 फरवरी, दोपहर 12 बजे
स्थान: विक्टोरिया मेमोरियल के दक्षिणी गेट के बाहर, PG अस्पताल के सामने, 1,क्वींस वे, मैदान, कोलकाता, पश्चिम बंगाल 700071
PETA इंडिया के कैम्पैनस कॉर्डिनेटर उत्कर्ष गर्ग ने कहा, “चमड़ा सिर्फ़ पशुओं की जान नहीं लेता, यह इंसानों के लिए भी खतरनाक है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है। कोलकाता लेदर कॉम्प्लेक्स में तीन सफाई कर्मचारियों की दुखद मौत इस बात का उदाहरण है कि चमड़ा उद्योग के जहरीले कचरे से कितना बड़ा खतरा हो सकता है। यह चमड़ा इस्तेमाल करने वालों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे चमड़ा छोड़कर वीगन विकल्प अपनाएं।”
लगभग 500 से अधिक चमड़े के कारखानों से जुड़े कोलकाता लेदर कॉम्प्लेक्स की यह कोई पहली घटना नहीं है इस से पहले 2015 में भी, चमड़े के कारखाने से निकलने वाले जहरीले धुएं में सांस लेने के कारण तीन कर्मचारियों की मौत हो गई थी।
इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने चमड़े की दुर्गंध वाली हवा को इंसानों के लिए कैंसरजनक (कैंसर पैदा करने वाला) माना है। असल में, चमड़े के कारखाने में काम करने से सांस और त्वचा से जुड़ी बीमारियाँ हो सकती हैं, और इसके कारण फेफड़े, पेट, त्वचा, गुर्दे, मूत्राशय, अंडकोष आदि अंगों में कैंसर होने का खतरा बढ़ सकता है।
भारत में गाय, भैंस और चमड़े के लिए इस्तेमाल होने वाले अन्य पशुओं को बूचड़खानों तक ले जाने के लिए इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियों में ठूंस-ठूंसकर भरा जाता है कि रास्ते में ही उनकी हड्डियाँ टूट जाती हैं। इतना कष्ट सहने के बावजूद जिन पशुओं की जान बच जाती है, उन्हें बूचड़खाने में कसाइयों द्वारा खुलेआम टुकड़े-टुकड़े किया जाता है और उनके शरीर खाल उतारी जाती है।
आजकल भारत में वीगन चमड़ा तैयार किया जा रहा है, जो गन्ने की खोई और आम के गूदे जैसे पेड़-पौधों से प्राप्त उत्पादों से बनता है। बाज़ार में,वीगन हैंडबैग, जूते, कपड़े, एक्सेसरीज़, फर्नीचर और होम डेकोर आइटम्स की मांग लगातार बढ़ रही है, इन उत्पादों पर “PETA-Approved Vegan” लोगो होने से यह प्रमाणित होता है कि यह उत्पाद पशुओं से प्राप्त सामग्रियों जैसे चमड़ा, रेशम, ऊन, फर और पंखों के बजाय गैर पशु प्रयुक्त सामग्री से बने वीगन उत्पाद हैं। दुनिया भर में 1000 से अधिक कंपनियाँ “PETA-Approved Vegan” लोगो का उपयोग कर रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं को वीगन उत्पादों की पहचान करने में सहूलत रहती है।
PETA इंडिया जो इस धारणा में विश्वास रखता है कि “पशु हमारे वस्त्र बनने के लिए नहीं है”, प्रजातिवाद का विरोध करता है क्योंकि यह एक ऐसी विचारधारा है जिसमे मनुष्य इस संसार में स्वयं को सर्वोपरि मानकर अन्य समस्त प्रजातियों का शोषण करना अपना अधिकार समझता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाईट PETAIndia.com पर जाएँ और हमें X, Facebook, व Instagram सोशल मीडिया पर फॉलो करें।
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