कोटा: PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद एक मादा सामुदायिक कुत्ते पर तेजाब फेंकने को लेकर FIR दर्ज

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11 October 2025

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कोटा — एक हिंसक घटना की सूचना मिलने के बाद, जिसमें एक मादा सामुदायिक कुत्ते पर तेजाब से हमला किया गया था, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) ने कुंआड़ी थाने और स्थानीय कार्यकर्ता लोकेश पारेख के साथ मिलकर कड़ी कानूनी धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करवाने में मदद की। पशु चिकित्सकीय देखभाल के बाद, पीड़ित कुत्ता अब अपनी चोटों और मानसिक आघात से उबर रहा है।

यह घटना 24 सितंबर को कोटा के कुंआड़ी इलाके में हुई थी। कुत्ते पर तेजाब फेंकने की आरोपी महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। BNS, 2023 की धारा 325 के अनुसार, किसी पशु को मारने, ज़हर देने, अपंग करने या उसे किसी कार्य के लायक न छोड़ने की नीयत से की गई शरारत एक संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आती है, और इसके लिए पांच साल तक की सज़ा, जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।

PETA इंडिया की क्रूरता प्रतिक्रिया समन्वयक (Cruelty Response Coordinator) ईशानी राठी कहती हैं, – “जो लोग पशुओं पर क्रूरता करते हैं, वे अक्सर आगे चलकर इंसानों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। सभी की सुरक्षा के लिए यह ज़रूरी है कि आम जनता ऐसे मामलों की सूचना, जैसे कि यह मामला, तुरंत पुलिस को दे। हम कोटा सिटी पुलिस, विशेष रूप से कोटा सिटी की पुलिस अधीक्षक, श्रीमती तेजस्विनी गौतम, आईपीएस को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश देने और यह स्पष्ट संदेश देने के लिए सराहना करते हैं कि जानवरों के साथ क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

PETA इंडिया का सुझाव है कि पशुओं के साथ क्रूरता करने वाले लोगों की मानसिक स्थिति की जांच करवाई जाए और उन्हें परामर्श (काउंसलिंग) दी जाए, क्योंकि जानवरों के प्रति हिंसा गंभीर मानसिक विकृति का संकेत है। शोध से पता चलता है कि जो व्यक्ति जानवरों पर अत्याचार करते हैं, वे अक्सर बार-बार ऐसा करते हैं और आगे चलकर अन्य जानवरों, यहां तक कि इंसानों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। फॉरेंसिक रिसर्च एंड क्रिमिनोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि “जो लोग जानवरों के प्रति क्रूरता करते हैं, उनके अन्य अपराधों में लिप्त होने की संभावना तीन गुना अधिक होती है जिनमें हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी देना और नशे से जुड़ी आपराधिक गतिविधियां शामिल हैं।

PETA इंडिया, जो इस सिद्धांत के तहत काम करता है कि “पशु किसी भी तरह से हमारा शोषण सहने के लिए नहीं हैं”, प्रजातिवाद (speciesism) का विरोध करता है, जो कि इंसान के स्वयं मानव-प्रधान सोच है और इसके तहत वह स्वयं को संसार में सर्वोपरि मानकर अन्य प्रजातियों क् शोषण करना अपना अधिकार समझता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया PETAIndia.com पर जाएं या संगठन को X, (पूर्व में ट्विटर) Facebook, एवं Instagram  पर फॉलो करें।

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