जैकी श्रॉफ और PETA इंडिया ने केरल के कोडुंगल्लूर स्थित नेडीयाथली श्री शिव मंदिर को एक शानदार मैकेनिकल हाथी उपहार में दिया

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16 August 2025

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त्रिशूर – प्रसिद्ध अभिनेता जैकी श्रॉफ और पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया ने केरल के त्रिशूर जिले के पास स्थित कोडुंगल्लूर के नेडीयाथली श्री शिव मंदिर को “थलीश्वरन” नामक एक जीवन-आकार का मैकेनिकल हाथी उपहार में दिया है, जो मंदिर के इस फैसले के सम्मान स्वरूप है कि वह मंदिर में कभी भी जीवित हाथियों को नहीं रखेंगे और ना ही किराए पर लेंगे।थलीश्वरन  का इस्तेमाल मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजनों के लिए किया जाएगा, जिससे सभी कार्यक्रम सुरक्षित और पशु-क्रूरता-मुक्त होंगे और असली हाथियों को जंगल में अपने परिवारों के साथ रहने का अवसर मिलेगा।थलीश्वरन PETA इंडिया द्वारा मंदिरों को भेंट किए गए मैकेनिकल हाथियों में 11वां और केरल में सातवां है। इस नए मैकेनिकल हाथी का स्वागत एक विशेष उद्घाटन समारोह के माध्यम से किया गया, जिसमें मंदिर में एक प्रदर्शन भी हुआ।

उद्घाटन समारोह की तस्वीरें और वीडियो मांगे जाने पर उपलब्ध कराएं जाएंगे।

भारतीय सिनेमा के सबसे प्रिय अभिनेताओं में से एक, जैकी श्रॉफ, जिनका चार दशकों से अधिक का करियर और 200 से अधिक फिल्मों में काम रहा है, अपने गहरे पशु प्रेम और पर्यावरण के प्रति चिंता के लिए भी जाने जाते हैं। इस पहल के बारे में उन्होंने कहा, “भगवान द्वारा बनाए गए सभी प्राणी स्वतंत्र और खुशहाल जीवन जीने के हकदार हैं। हाथियों का उद्देश्य सख्त फर्श पर खड़े रहना, लोगों को पीठ पर ढोना या पैरों में बेड़ियाँ पहनकर गोल-गोल घूमना नहीं है। भगवान ने उन्हें नदियों में खेलने-कूदने, जंगल में खुलकर घूमने और अपना प्राकृतिक जीवन शांतिपूर्ण ढंग से जीने के लिए बनाया गया है। यही ही कारण है कि मैं थलीश्वरन, नामक एक मैकेनिकल हाथी, केरल के इस पवित्र मंदिर को भेंट कर रहा हूँ। थलीश्वरन अपने सिर और कान हिला सकता है, आशीर्वाद दे सकता है और किसी को नुकसान पहुँचाए बिना हर उत्सव का हिस्सा बन सकता है। इस तरह हमारी परंपराएँ जीवित रहती हैं, और हाथी भी जंगल में स्वतंत्र और खुशहाल रहते हैं। मेरे लिए यही सच्ची भक्ति है।”

नेडीयाथली श्री शिव मंदिर के अध्यक्ष, श्री सुरेश बाबू, ने कहा, “हम थलीश्वरन का हमारे मंदिर में स्वागत करके बहुत खुश हैं। यह सिर्फ परंपरा का प्रतीक नहीं है, बल्कि उन सभी पवित्र प्राणियों का सम्मान भी है, जिन्हें भगवान ने बनाया है और जो हमारे जैसे ही स्वतंत्र और सुरक्षित रूप से अपने परिवारों के साथ जीवन जीने के हकदार हैं। इस दयालु पहल के माध्यम से हम बिना किसी जीव-जंतु को कष्ट पहुँचाए भगवान गणेश का सम्मान कर सकते हैं। केरल में त्योहारों के दौरान बंदी हाथियों द्वारा मानवों पर हमले जैसी कई दुखद घटनाओं को देखकर, थलीश्वरन सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मदद करता है। हम अन्य मंदिरों को भी प्रोत्साहित करते हैं कि वे मैकेनिकल हाथियों को अपनाने पर विचार करें, ताकि भक्तों की सुरक्षा, पशुओं की भलाई और हमारी प्रिय परंपराओं की गरिमा बनी रहे।”

हाथी जंगल में रहने वाले बेहद समझदार, सक्रिय और मिलनसार पशु होते हैं। इंसानों के मनोरंजन के लिए विभिन्न जुलूसों, उत्सवों और कार्यक्रमों में उनका इस्तेमाल करने हेतु उन्हें कैद किया जाता है, उनके साथ मारपीट की जाती है और उन्हें यातनाएँ दी जाती हैं ताकि वे इंसानों की आज्ञा का पालन कर सकें। मंदिरों और अन्य स्थानों पर बंदी बनाए गए हाथियों को जंजीरों से जकड़कर घंटों तक पक्के फर्श या सीमेंट के फ्लोर पर खड़े रहने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे उनके पैरों में दर्दनाक घाव और अन्य जटिल समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इनमें से अधिकांश पशुओं को पर्याप्त भोजन, पानी, पशु चिकित्सकीय देखभाल और प्राकृतिक परिवेश से वंचित रखा जाता है।

इस प्रकार की दयनीय परिस्थितियों के चलते कई हाथी हताशा और निराशा का शिकार हो जाते हैं और कभी-कभी अपने महावत या आसपास के लोगों और अन्य जीवों पर हमला कर देते हैं। हेरिटेज एनिमल टास्क फोर्स के आंकड़ों के अनुसार, केरल में बंधी हाथियों ने पिछले 15 साल की अवधि में 526 लोगों की जान ली है। चिक्कोट्टुकाव रामचंद्रन, जो लगभग 40 वर्षों से बंदी हैं और केरल के त्योहारों में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले हाथियों में से एक हैं, ने कथित रूप से 13 लोगों की जान ली, जिसमें छह महावत, चार महिलाएँ और तीन अन्य हाथी शामिल हैं।

2025 में, केरल में कम से कम बीस बंदी हाथी मानसिक तनाव और हताशा के कारण भड़क उठे, जिनसे छह लोगों की मौत हुई, कई अन्य घायल हुए और संपत्ति को भी नुकसान पहुँचा। ध्यान देने योग्य है कि 2024 में पूरे भारत में कम से कम चौदह ऐसी घटनाएँ सामने आईं, जिनमें बंदी हाथियों ने अपने महावतों या आसपास मौजूद अन्य लोगों को चोट पहुँचाई या जान गंवाई। हाल ही में, अहमदाबाद में रथ यात्रा के दौरान भी हाथी नियंत्रण खोकर दौड़ते हुए दिखाई दिए।

PETA इंडिया ने 2023 की शुरुआत में मंदिरों में जीवित हाथियों की जगह मैकेनिकल हाथियों के इस्तेमाल की संवेदनशील पहल शुरू की थी। आज, दक्षिण भारत के कम से कम अठारह मंदिरों में मैकेनिकल हाथियों का उपयोग किया जा रहा है, जिनमें से दस हाथी PETA इंडिया द्वारा उन मंदिरों के इस निर्णय को मान्यता देते हुए दान किए गए हैं कि वे कभी भी जीवित हाथियों को नहीं रखेंगे और न ही उन्हें किराए पर लाएँगे। हाल ही में, तमिलनाडु के मंदिरों को अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन और पीपल फॉर कैटल इन इंडिया (PFCI) ने एक और मैकेनिकल हाथी भेंट किया। इन मैकेनिकल हाथियों का उपयोग अब मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठानों को सुरक्षित और पशु-क्रूरता-मुक्त तरीके से संपन्न करने के लिए किया जाता है, जिससे असली हाथी जंगल में अपने परिवारों के साथ स्वतंत्र और खुशहाल रह सकें।

मैकेनिकल हाथियों की लंबाई कुल 3 मीटर और वजन कुल 800 किलोग्राम होता है। यह रबर, फाइबर, मेटल, जाल, फोम और स्टील से बने होते हैं और पाँच मोटरों की मदद से काम करते हैं। यह सभी हाथी बिल्कुल किसी असली हाथी की तरह दिखते हैं और इनका उपयोग भी उसी रूप में किया जाता है। यह अपना सिर, कान और आँख हिला सकते हैं, अपनी पूंछ घुमा सकते है, अपनी सूंड उठा सकते है और सूंड से भक्तों पर पानी भी छिड़क सकते है। इन हाथियों की सवारी भी की जा सकती है औरइन्हें बिजली से संचालित किया जा सकता है। इनके नीचे छोटे व्हील लगे रहते हैं ताकि धार्मिक कार्यक्रमों की जरूरत बके अनुसार इन्हें धकेल कर या खींच कर सामान्य सड़कों पर से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है।

पिछले साल तक, नेडीयाथली श्री शिव मंदिर अपने अनुष्ठानों के लिए जीवित हाथियों को किराए पर लेने की परंपरा जारी रखता था। लेकिन इस साल मंदिर ने एक दयालु बदलाव अपनाया है और थलीश्वरन, नामक एक भव्य मैकेनिकल हाथी, का खुले दिल से स्वागत किया है। यह केरल के किसी मंदिर को PETA इंडिया द्वारा दान किया गया सातवाँ मैकेनिकल हाथी है।

नेडीयाथली श्री शिव मंदिर एक ऐतिहासिक महत्व वाला मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है और केरल के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक यहाँ विराजमान है, जो पश्चिम की दिशा की ओर मुख करता है। यह परुमकान वंश के समय बनाए गए चार थाली मंदिरों में से एक है। उल्लेखनीय है कि राजा रामवर्मा कुलशेखर ने कोडुंगल्लूर पर हुए हमले के दौरान यहाँ शरण ली थी और मंदिर के भीतर से एक चावेरपड़ा (स्वयंघाती दस्ते) का गठन किया था।

PETA इंडिया जो इस धारणा में विश्वास रखता है कि “पशु मनुष्यों के मनोरंजन के लिए नहीं है”, प्रजातिवाद का विरोध करता है क्योंकि यह एक ऐसी विचारधारा है जिसमें मनुष्य इस संसार में स्वयं को सर्वोपरि मानकर अपनी अलग अलग जरूरतों के अनुसार अन्य प्रजातियों का शोषण करना अपना अधिकार समझता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाईट PETAIndia.com पर जाएँ और XFacebook, व Instagram पर हमें फॉलो करें।

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