PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद, इंदौर ग्रामीण पुलिस ने एक आवासीय कॉलोनी से 40 से अधिक कुत्तों पकड़ने और स्थानांतरित करने के मामले में FIR दर्ज की।
For Immediate Release:
13 October 2025
Contact:
Saloni Sakaria; [email protected]
Hiraj Laljani; [email protected]
इंदौर – सामुदायिक पशुओं को भोजन कराने वाले से मिली सूचना और साथ ही प्रमाणित वीडियो के अनुसार, समर्थ पार्क कॉलोनी, किशनगंज, इंदौर से कॉलोनी निवासियों द्वारा कथित तौर पर नियुक्त किए गए एक समूह ने 40 से अधिक सामुदायिक कुत्तों को जबरन क्रूरता से पकड़कर कूड़ा वाहन में ठूंस दिया और फिर उन्हें उस जगह से स्थानांतरित किया। यह जानकारी सामने आने के बाद, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) ने स्थानीय एक्टिविस्ट नीरज दुबेड़िया और प्रियांशु जैन, जो पीपल फॉर एनिमल्स (PFA) इंदौर से जुड़े हैं, के साथ मिलकर किशनगंज पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 के तहत कूड़ा वाहन के मालिक और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई। आरोपियों की पहचान सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से की गई है और उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया है। पुलिस यह पता लगाने के लिए जांच कर रही है कि कुत्तों को कहाँ फेंका गया या वे अभी जीवित हैं या नहीं।
PETA इंडिया की ‘लीड क्रूरता प्रतिक्रिया समन्वयक’ सलोनी सकारिया कहती हैं- “एनिमल बर्थ कंट्रोल (पशु जनसंख्या नियंत्रण)_कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से न चलाए जाने कारण सामुदायिक कुत्तों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे इन पशुओं के साथ क्रूरता के मामलों में वृद्धि होती है। हम स्थानीय नगर निगमों से आग्रह करते हैं कि वे कानून के अनुसार मानवतावादी पशु जनसंख्या नियंत्रण को तुरंत लागू करें। हम इंदौर ग्रामीण पुलिस की सराहना करते हैं, विशेष रूप से पुलिस महानिरीक्षक, इंदौर ग्रामीण, श्री चंद्रशेखर सोलंकी, IPS; पुलिस अधीक्षक, इंदौर ग्रामीण, श्रीमती यांगचेन डोलकर भूटिया, IPS; और किशनगंज पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी, श्री कुलदीप खत्री, जिन्होंने इस मामले में तत्काल कार्यवाही करके यह संदेश दिया है कि पशुओं के साथ क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
पशु जनसंख्या नियंत्रण (ABC) नियम, 2023 के नियम 11(19) के अनुसार, सामुदायिक कुत्तों को केवल नसबंदी के उद्देश्य से पकड़ा जा सकता है और सामुदायिक पशुओं को उनके मूल स्थान से काही और स्थानांतरित करना गैरकानूनी है। इसमें कहा गया है, “कुत्तों को [नसबंदी के बाद] उसी स्थान या इलाके में छोड़ दिया जाएगा जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था।” माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 22 अगस्त 2025 के अपने आदेश में ABC नियमों को बनाए रखा और पुनः पुष्टि की कि कुत्तों को आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियम, 2023 के तहत उनके क्षेत्र में वापस छोड़ दिया जाएगा।
PETA इंडिया जो इस सिद्धांत के तहत काम करता है कि “पशु किसी भी तरह का हमारा शोषण सहने के लिए नहीं हैं”, प्रजातिवाद का विरोध करता है जो इंसान की स्वयं को सर्वोपरि मानकर अन्य प्रजातियों को अपनी जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करने वाली सोच है। PETA यह मानता है कि सामुदायिक कुत्तों के साथ अक्सर क्रूरता की जाती है या वे कारों की चपेट में आ जाते हैं और भूख, बीमारी या चोट से पीड़ित होते हैं। हर साल, कई कुत्ते पशु आश्रयों में चले जाते हैं, जहाँ वे पर्याप्त अच्छे घरों के अभाव में पिंजरों या केनेलों में दु:ख भरे जीवन जीते हैं। इसका समाधान सरल है: नसबंदी। एक मादा कुत्ते की नसबंदी छह वर्षों में 67,000 जन्मों को रोक सकती है, और एक मादा बिल्ली की नसबंदी सात वर्षों में 4,20,000 जन्मों को रोक सकती है।
अधिक जानकारी के लिए कृपया PETAIndia.com पर जाएं या समूह को X, Facebook, या Instagram पर फॉलो करें।
#