हल्द्वानी: PETA इंडिया और पशुपालन विभाग की सहायता से जब्त की गई 100 से अधिक काँटेदार लगामों का प्रदर्शन

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16 May 2025

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Sanskriti Bansore; [email protected]

हल्द्वानी – सामान ढोने और शादियों जैसे आयोजनों में इस्तेमाल किए जाने वाले घोड़ों और अन्य पशुओं की भलाई के लिए करुणामयी कदम उठाते हुए, PETA इंडिया ने कुमाऊं मंडल के पशुपालन विभाग के सहयोग से हल्द्वानी शहर में इस्तेमाल की जा रही 100 से अधिक काँटेदार लगामें जब्त कीं। इन काँटेदार लगामों का उपयोग अक्सर घोड़ों और खच्चरों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इन्हें जानबूझकर इस तरह बनाया जाता है कि ये पशुओं के नाज़ुक मुंह को गहराई से चीरती हैं। ये उपकरण अवैध हैं, फिर भी प्रचलित हैं, और PETA इंडिया द्वारा इन्हें नरम, पीड़ारहित लगामों से बदला गया।

इन यातनादायक उपकरणों को 17 मई 2025 को हल्द्वानी के राजकीय पशु चिकित्सालय में प्रदर्शित किया जाएगा ताकि जनता को जागरूक किया जा सके और उन्हें शादियों के लिए विंटेज कारों जैसे पशु-मुक्त विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके। घोड़ों और खच्चरों के मुंह में दर्द पैदा करने के इरादे से बनाई गई ये काँटेदार लगामें “पशु क्रूरता निवारण – ड्रॉट एवं पैक पशु नियम, 1965” के नियम 8 का सीधा उल्लंघन हैं।

समय:  17 मई 2025, सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक
स्थान:  राजकीय पशु चिकित्सालय, कालाढूंगी रोड, हीरा नगर, हल्द्वानी, उत्तराखंड – 263139

PETA इंडिया के ऐडवोकेसी एसोसिएट तुषार कॉल ने कहा, “घोड़े और खच्चर चाहे शादियों में इस्तेमाल हों या सामान ढोने के लिए, काँटेदार लगामें उनके होंठों और जीभ को बुरी तरह चीर देती हैं और उन्हें लगातार दर्द का सामना करना पड़ता है। हम कुमाऊं मंडल के पशुपालन विभाग के निदेशक श्री रमेश सिंह नितवाल के सहयोग के लिए आभारी हैं, जिन्होंने इस अहम पहल में साथ दिया, जिसका उद्देश्य घोड़ों और खच्चरों की रक्षा करना और कानून का पालन सुनिश्चित करना है। हम जनता से अपील करते हैं कि वे माल ढोने के लिए ट्रैक्टर या रिक्शा जैसे आधुनिक साधनों और शादियों के लिए विंटेज कार या अन्य रचनात्मक, पशु-मुक्त विकल्प अपनाएं।”

यह जागरूकता अभियान विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों और बाज़ारों में काम करने वाले घोड़ा और खच्चर मालिकों को ध्यान में रखकर चलाया गया। इन्हें बताया गया कि काँटेदार लगामें घोड़ों और खच्चरों को शारीरिक और मानसिक रूप से कितनी गंभीर चोट पहुँचाती हैं। स्थानीय पशु कल्याण संगठन ‘स्ट्रे एनिमल्स हेल्प एंड रेस्क्यू एंजेल्स (SAHARA)’ ने इन क्षेत्रों में इन क्रूर उपकरणों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की सूचना दी थी।

PETA इंडिया जो इस धारणा में विश्वास रखता है कि “पशु मनुष्यों द्वारा दुर्व्यवहार सहने के लिए नहीं है”, प्रजातिवाद का विरोध करता है क्योंकि यह एक ऐसी विचारधारा है जिसमें मनुष्य इस संसार में स्वयं को सर्वोपरि मानकर अपनी अलग अलग जरूरतों के अनुसार अन्य प्रजातियों का शोषण करना अपना अधिकार समझता है। हमने पूरे देश में काँटेदार लगामों के खिलाफ अभियान चलाया है। हम राजकीय विभागों, पुलिस और स्थानीय समुदायों से अनुरोध करते है कि वे इन क्रूर उपकरणों को हटाकर उनकी जगह दयालु विकल्प अपनाएं। PETA इंडिया के संपर्क में आने के बाद उत्तर प्रदेश, असम, बिहार, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और नागालैंड सहित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने काँटेदार लगामों पर रोक के आदेश जारी किए और इसके सख्त पालन का निर्देश दिया। साथ ही, PETA इंडिया सरकार से यह भी मांग कर रहा है कि इन क्रूर उपकरणों के निर्माण और बिक्री पर स्थायी रूप से रोक लगाने के लिए कानून में बदलाव किया जाए।

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